रिश्ते में बात किया जाना, संवाद बनाए रखना कितना जरूरी है…? बहुत ज्यादा. कम्युनिकेशन के बिना एक रिश्ता पूरी तरह से निष्क्रिय भी हो सकता है. ये ऐसा हो सकता है कि मानो हंसते चेहरों के पीछे गहरा दुःख समाया हो. जैसे प्यार तो हो पर कह ना पा रहे हों, जता ना पा रहे हों। पूरी जिंदगी ऐसी ही निराशा के बीच काट देने से तो अच्छा है कि कम्युनिकेशन को रिश्ते में शामिल कर लिया जाए. वही कम्युनिकेशन जिसके साथ प्यार करना और जताना, दोनों ही आसान हो जाएगा. ये किसी भी प्यार भरे रिश्ते के लिए जरूरी है. इस जरूरत के साथ जिंदगी प्यार और भरोसे के साथ काटना, आसान हो जाएगा। क्यों जरूरी है और कैसे इसके साथ रिश्ते को मजबूती दी जा सकती है जान लीजिए-
इमोशनल डिपॉसिट और विथड्रा-
ये क्या है? जरूर आप यही सोच रही होंगी। हम बता दे रहे हैं इन्हीं दोनों के बीच संतुलन का बिगड़ना कम्युनिकेशन की कमी बन जाता है। इमोशनल डिपॉसिट मतलब जब आप उनकी बात में सहमति जता सकें। जबकि विथड्रा का मतलब जब आप जरा भी सहमति महसूस ना कर पाएं। बस सहमति होने और सहमति ना होने के बीच अगर बराबरी नहीं है तो मान लीजिए कि आप दोनों के बीच कम्युनिकेशन की कमी रह गई है और एक दूसरे को समझना मुश्किल हो रहा है। इसलिए कम्युनिकेशन को बढ़ाने के तरीके तलाशना शुरू कीजिए और रिश्ते में संवाद को जगह दीजिए। इमोशनल डिपॉसिट और विथड्रा के जरिए आप कम्युनिकेशन की अहमियत समझ पाएँगी। 
अहसास दिल के दिल में-
कम्युनिकेशन की कमी कभी भी आपके दिल का प्यार सामने वाले तक पहुंचने ही नहीं देंगी. आपका प्यार दिल में ही रह जाएगा. सोचिए जरा कब तक आपको प्यार करने वाला आपके दिल में बसे प्यार को समझने की कोशिश ही करता रहेगा. इसलिए जरूरी रिश्ते में बातें की जाएं. सामने वाले को बताया जाए कि वो कितना प्यारा और प्यार के काबिल है. सिर्फ शादी करके साथ रहने लगने से काम नहीं चलेगा. सिर्फ साथ रहने लगने से ये समझ लिया जाए कि सामने वाला आपको प्यार करता ही है, सही नहीं है. 
कम्युनिकेशन के तरीके-
रिश्ते में कम्युनिकेशन बनाए रखने का ये मतलब बिलकुल नहीं है कि आप हर मौके पर बात करने का तरीका तलाशने लगें. लेकिन कुछ खास मौकों पर कम्युनिकेशन शुरू करना इसे रिश्ते में जगह जरूर देगा. जैसे जब पति ऑफिस के काम से फ्री हों तो पूछ लें कि ‘दिन कैसा गया?’ या ‘आज लंच समय पर कर लिया था?’ आदि. उनको भी आपका ये पूछना अच्छा लगेगा निश्चित ही। 
 पर हर बार नहीं-
कम्युनिकेशन करने के तरीके और मौके तो तलाशने होंगे लेकिन कई बार एक्सप्रेशन और हाव-भाव से उनके दिल का हाल भी समझना होगा. जैसे जब आपने पूछा कि ‘दिन कैसा गया?’ तो हो सकता है कि आपके पति थकावट की वजह से जवाब न देना चाहते हों और शांत ही रह जाएं या फिर वो हाथों से थम्स अप का निशान बनाकर ही कम चला लें. अब इस समय में उनसे नाराज नहीं होना है बल्कि समय की जरूरत समझनी है. इस तरह से कम्युनिकेशन की अहमियत समझी जा सकती है. 
दोनों के बारे में बात-
जब कम्युनिकेशन करने की बात आती है तो मामला दो कोनों में बंध जाता है. अगर आप बात करते हुए सिर्फ अपने बारे में ही बोलती रहती हैं तो फिर मामला सिर्फ एक कोने तक ही सीमित रह जाता है. जब भी रिश्ते में कम्युनिकेशन का रंग घोलने की बारी आए तो बात आप दोनों के बारे में होनी चाहिए. इसका एक तरीका ये हो सकता है कि आप उनकी बात करें और वो आपकी. इस तरह से आप दोनों को ही खुद को इग्नोर किए जाने का अहसास बिलकुल नहीं होगा. और आप दोनों को ही अच्छा लगेगा कि आपका पार्टनर आपके बारे में सोचता है. 
नो फोन ओनली टॉक-
इस भागदौड़ वाली जिंदगी में हो सकता है आप दोनों को बात करने का मौका ही न मिलता हो. ऐसे में आपको इसके लिए अलग से समय निकालना होगा. जब भी आप दोनों फ्री होते हैं ठीक उस वक्त ‘नो फोन’ का नियम बना दीजिए. अपने पति से कही कि इस वक्त आप दोनों सिर्फ बातें करेंगे. इसको नियम से करेंगी तो आपको रिश्ते में जरूर ही पॉसिटिव अंतर दिखाई देगा. 
सामने बोलना है जरूरी-
कम्युनिकेशन कितना जरूरी है? अगर आप ये समझ चुकी हैं तो इसके लिए खुद को तैयार कीजिए ही पति से भी इसके लिए कहिए. उन्हें भी कम्युनिकेशन की अहमियत समझनी होगी। उन्हें समझाइए कि बात किए बिना रिश्ता मजबूत नहीं होगा और उनको भी खासतौर पर बात करने के लिए समय निकालना ही पड़ेगा। मुद्दा कोई भी बात जरूर की जाए। वरना सोचिए जरा अप कब तक अकेले बोलती रहेंगी और बात करने की कोशिशें जारी रहेंगी। इसलिए खुद समझने के साथ पति को भी कम्युनिकेशन का मतलब और वैल्यू समझा दीजिए। 

रिलेशनशिपसंबंधी यह लेख आपको कैसा लगा?अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ईमेल करें editor@grehlakshmi.com

ये भी पढ़ें-

रूद्राक्ष में स्वयं विद्यमान हैं देवादिदेव महादेव