क्या आप जानते हैं कि सेक्स के बाद एक महिला के शरीर में एक स्पर्म कितनी देर तक जीवित रहते है? क्या आपको आश्चर्य है कि स्पर्म काउंट कितना होना चाहिए? एक स्पर्म की जर्नी एक अद्भुत और जटिल होती है। अधिकांश लोग स्पर्म के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानते हैं जबकि स्पर्म के बारे में ऐसी कई जानकारियां हैं जिसके बारे में आपको पूरी जानकारी होनी चाहिये। आइये जानते हैं स्पर्म के बारे में कुछ रोचक बातें।

शुक्राणु शरीर से कितनी देर बाहर जीवित रह सकता है

शुक्राणु के जीवित रहने का समय हर जगह निर्भर करता है। इसके लिए इस बात का पता होना जरुरी होता है कि शुक्राणु शरीर के अंदर और बाहर कितनी देर तक रह सकते हैं।

शुक्राणुओं का जीवनकाल नियमित होता है। कुछ शुक्राणु मिनटों में ही नष्ट हो जाते हैं तो कुछ 7 दिन तक जीवित रह सकते हैं लेकिन तब ही जब वह सही कंडीशन में रखे जाएं। शुक्राणुओं का जीवनकाल इरैजुकेशन के बाद ही शुरु हो जाता है। शुक्राणु महिला के सर्विक्स, गर्भाशय से होते हुए फैलोपियन ट्यूब में जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान कई शुक्राणु कम होते जाते हैं। आधे से ज्यादा शुक्राणु बाहर चले जाते हैं जिनमें से 10-20 ही सही जगह तक पहुंच पाते हैं।

शुक्राणु महिला के शरीर के बाहर कुछ ही मिनट तक रह पाते हैं। शुक्राणुओं को जीवित रहने के लिए नमी और गर्माहट की जरुरत होती है। वेजाइना के पास सीमन होने की वजह से यह 20 मिनट तक जीवित रह पाते हैं। शुक्राणु के जीवित रहने की क्षमता को नहाते समय बढ़ाया जा सकता है। लेकिन पानी के साथ साबुन होने की वजह से यह बहुत जल्दी नष्ट भी हो जाते हैं। ओव्यूलेशन के दौरान प्रजनन मार्ग का पीएच लेवल कम होने से शुक्राणुओं को सर्विक्स की तरफ जाने में ज्यादा समय मिल जाता है। जो शुक्राणु सर्विक्स या गर्भाशय में चले जाते हैं तो उनका जीवनकाल लंबा हो जाता है। वह वहां 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं। ज्यादातर शुक्राणु 1-2 दिन में नष्ट हो जाते हैं।

1) संख्या-

औसत स्खलन में अनुमानित 280 मिलियन स्पर्म पाए जा सकते हैं। और यदि ऐसा लगता है कि बहुत ज्यादा हैं, तो आपको सिर्फ गाय और सूअर जैसे अन्य प्रजातियों के बारे में सोचने की ज़रूरत है जिनमें प्रति मिलीमीटर अनुमानित 3,000 और 8,000 मिलियन स्पर्म होते हैं।

2) कम स्पर्म काउंट और फर्टिलिटी-

जब शुक्राणु की संख्या 10 मिलियन से कम हो जाती है, तो आपको नंबर सुधारने के लिए किसी विशेषज्ञ से मिलने की आवश्यकता हो सकती है। नेशनल इनफर्टिलिटी एसोसिएशन के अनुसार, अगर आपके शुक्राणु की संख्या 40 मिलियन और 300 मिलियन प्रति मिलीलीटर के बीच है, तो आप सामान्य श्रेणी में हैं।

3) 5 मिनट से एक घंटे की गति की यात्रा-

प्रकृति ने प्रजनन के लिए शुक्राणु बनाया है। सेक्स के बाद स्पर्म महिला की फैलोपियन ट्यूब में जाते हैं और स्पर्म अंडे की तरफ जाते हैं। और यह औसतन 5-68 मिनट में कहीं जा सकता है।

4) स्पर्म बनने में लगने वाला समय-

वैसे तो पुरुषों के अंडकोष में हमेशा स्पर्म बनता रहता है लेकिन किसी भी स्पर्म को पूरी तरह परिपक्व होने और प्रजनन के लिए बिलकुल तैयार होने में लगभग 46 से 72 दिनों तक का समय लग जाता है।

5) स्वस्थ स्पर्म-

जितने भी स्पर्म शरीर से बाहर निकलते हैं उनमें से सभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं होते हैं बल्कि उनमें 90% स्पर्म ख़राब होते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि आपके स्वास्थ्य में कोई खराबी है बल्कि यह सामान्य बात है। वास्तव में जब ये स्पर्म अंडे की तरफ जाते हैं तो उस दौड़ में कई स्पर्म पीछे ही छूट जाते हैं, सिर्फ हेल्दी स्पर्म ही अंडों तक पहुँच पाते हैं।

6) ऐसे बढ़ता है स्पर्म काउंट-

बहुत अधिक जंक फूड, संसाधित मांस और डेयरी खाने से शुक्राणु बर्बाद हो जाते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि इन चीजों को ताजे फल और सब्जियों के के साथ खाने से वीर्य की गुणवत्ता गिर सकती है। मछली के तेल और जंगली सामन में पाए जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड से अधिक डीएचए प्राप्त करें, और इससे आपके शरीर को एक स्वस्थ शुक्राणु बनने में मदद मिल सकती है।

8) शराब और रेडियेशन से बचें-

शुक्राणु की संख्या लैपटॉप और वाई-फाई के उपयोग और शराब की अधिक खपत और धूम्रपान तक कई कारकों से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकती है। इसलिए लैपटॉप और वाई-फाई से विकिरण से बहुत ज्यादा एक्सपोजर का प्रयास करें और इससे बचें, कम शराब पिएं और धूम्रपान छोड़ दें।

 

इन्हें भी पढ़ें –

कंडोम न पहनने के पीछे मर्दों के बहाने, देखें वीडियो

बच्चे पैदा करना या न करना अब महिला के हाथ

पीआईडी भी हो सकती है गर्भधारण न कर पाने की वजह