प्रफुल्ल और प्रज्ञा की शादी को  कुछ ही महीने हुए थे कि उनके बीच की लड़ाइयों ने बड़ा रूप ले लिया। एक दूसरे पर कभी जान छिड़कने वाले इस रोमांटिक कपल के बीच लड़ाइयां इतनी ज़्यादा बढ़ गयीं कि दोनों को एक दूसरे से नफरत होने लगी। वजह दोनों के पास एक दूसरे के लिए टाइम नहीं था ।  दिनभर के 8 -9 घंटे ऑफिस और बाकी के सोशल मीडिया के साथ गुज़रते थे। ये प्रफुल्ल और प्रज्ञा ही नहीं बल्कि किसी भी कपल की कहानी हो सकती है। एक समय था, जब किसी को संदेश भेजने के लिए चिट्ठी का सहारा लेना पड़ता था और लंबे इंतजार के बाद कोई खबर मिलती थी।

 

लेकिन आज सोशल मीडिया की बदौलत सात समंदर पार बैठे व्यक्ति को भी मिनटों में संदेश भेजा जा सकता है। जहां एक ओर घंटों की दूरी मिनटों में सिमट गई है वहीं दूसरी ओर हम सोशल मीडिया की चकाचौंध में इतना डूब गए हैं कि इसका असर हमारे रिश्तों में भी पड़ने लगा है। पार्टनर बगल में होता है लेकिन हम उस पर ध्यान देने की जगह सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में हम ये भी नहीं सोच पाते हैं कि सोशल मीडिया हमारे रिश्तों की डोर को कमज़ोर करके टूटने की कगार पर ले आता है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात में सोने तक हम सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं और जीवन के खूबसूरत पलों को बर्बाद कर देते हैं। 

 
सोशल मीडिया पर मिलने वाली झूठी या आधी-अधूरी कहानियों के प्रभाव में आकर हम अपने पार्टनर की तुलना दूसरों से करने लगते हैं और कई तरह की ऐसी उम्मीदें लगा बैठते हैं जिन्हें पूरा करना प्रेक्टिकल नहीं होता है। जिससे रिश्तों की गर्माहट में कमी आने लगती है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स का अधिक इस्तेमाल करने से किसी रिश्ते की सबसे अहम बातों, जैसे विश्वास, निजी राय और व्यैक्तिक स्वतंत्रता में भी कमी आ जाती है। इस समस्या को स्मार्टफोन ने और बढ़ा दिया है जो बेडरूम  में किसी ‘तीसरे व्यक्ति’ जैसी उपस्थिति रखने लगा है, जो पति-पत्नी के बीच रोमांस पनपने के लिए जरूरी निजता को खत्म कर देता है।
 
हालांकि, इस समस्या का उपाय भी आपके ही पास है, अगर आप सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी की जगह अपने रिश्तों के बारे में लिखते समय अपने पार्टनर को भी उस पोस्ट का हिस्सा बनाएंगे तो ऐसा करने से आपके रिश्तों में खटास कम हो सकती है। यही नहीं ऐसा करने से आपके पार्टनर के बीच दूरियां कम होने के साथ आप एक दूसरे के करीब आ सकते हैं।
 
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