आजकल महिलाएं पुरुषों के  कंधे से कंधा  मिलाकर चलने लगी हैं  और किसी पर भी निर्भर नहीं रहना चाहती हैं। महिलाओं को ऐसा लगता है कि वो खुद कमाएं और अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। लेकिन महिलाओं का वर्किंग होना उतना भी आसान काम नहीं है जितना कि सुनने में लगता है। क्योंकि महिलाएं चाहें जितनी भी उन्नति क्यों न कर लें उन्हें काम के साथ घर की बहुत सी ज़िम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। आइए आपको बताते हैं कि वर्किंग वूमेंस को अपने डेली रूटीन में कौन सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

घर की सफाई और खाना 

महिलाएं चाहें वर्किंग ही क्यों न हों लेकिन उन्हें घर के कुछ काम ज़रूर करने पड़ते हैं जैसे साफ़ सफाई और खाना। भले ही इन कामों के लिए मेड ही क्यों न हो लेकिन इसकी ज़िम्मेदारी घर की महिलाओं की ही होती है। ऐसे में कभी मेड न आए तो इसका पूरा जिम्मा महिलाओं पर ही होता है। यदि पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं तो घर की ज़िम्मेदारी पुरुषों को भी निभानी चाहिए। जिससे महिलाओं का स्ट्रेस लेवल कम हो सके। 

बच्चों का जिम्मा 

जिन वर्किंग वूमेन के बच्चे होते हैं उनके ऊपर ऑफिस के साथी बच्चों की भी पूरी ज़िम्मेदारी होती है जैसे भले ही बच्चा क्रच में सारे दिन  रहता हो लेकिन ये देखना कि बच्चा ठीक से रह रहा है या नहीं ,उसे किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं है ये महिलाओं की ही ज़िम्मेदारी होती है।  इसके अलावा बच्चों के स्कूल की पैरेंट टीचर मीटिंग अटेंड करना भी महिलाओं की ज़िम्मेदारी का ही एक हिस्सा है और पुरुष इस ज़िम्मेदारी से बहुत आसानी से पीछा छुड़ा लेते हैं। 

ऑफिस का दबाव 

महिलाओं को घर के साथ ऑफिस में भी काम का दबाव झेलना पड़ता है इसके अलावा उन्हें बहुत बार पुरुष सहकर्मियों से ये कमेंट भी सुनने को मिलता है कि वो ठीक से काम नहीं कर पा रही हैं। जिसकी वजह से भी महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पति का ईगो हर्ट होता है 

अगर पत्नी  अपने  पति से ज्यादा कमाने लगती है तो उसके पति का ईगो हर्ट होने लगता है जिसकी वजह से घर में लड़ाइयां होने लगती हैं। इससे उबरने का सबसे अच्छा तरीका है कि पति -पत्नी को आपसी समझ बनाए  रखनी चाहिए।