कपल थेरपि– अब अगर सबकुछ नॉर्मल नहीं है तो कपल घुटने या तुरंत अलग हो जाने की जगह काउमसेलर से मिलते हैं औऱ अफने रिलेशनशिप पर वर्क करते हैं। ये अच्छा बदलाव है। 

दो अलग बेडरूम- पहले अगर पति-पत्नी दो अलग रूम में सोने लगते थे तो इसका मतलब होता था कि दोनों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। लेकिन अब के कपल्स  लिए अलग-अलग बेडरूम का कॉन्सेप्ट उनके पर्सनल स्पेस से जुड़ा है। कपल्स एक दूसरे को ये प्रीडम देना पसंद करते हैं कि वो अपनी मर्जी से सोएं, जगे या रात में कुछ करना हो तो दूसरे को बिना परेशान किए कर सकें। 
 
शादी दोनों की- पहले शादी के बाद लड़की को सिखाया जाता था कि उसे सारा जीवन पति का साथ देना है, उनकी खुशी के लिए जीना है। लेकिन अब शादी के पति -पत्नी एक दूसरे के साथ एक दुसरे के लिए जीते हैं। अब शादी एक के लिए मजा और एक के लिए सजा जैसी बात नहीं है। 
 
सिंगल होना अभिशाप नहीं- पहले 30 की उम्र तक अगर किसी लड़के या लड़की ने शादी नहीं की या ये कह दिया कि वो शादी नहीं करना चाहती/चाहता है तो बवाल मच जाता था। आजकल ऐसा नहीं है, परिवार और पेरेंट्स दोनों ये समझ रहे हैं कि बचचे तभी शादी निभा पाएंगे जब उन्हें मन लायक साथी मिलेगा औऱ ऐसे रिश्ते थोपना सही नहीं है। 
 
ऑनलाइन डेटिंग से नहीं है गुरेज- जब कपल्स ऑनलाइन डेटंग ऐप के थ्रू एक दूसरे से मिलते हैं, तो वो ये जानते हैं कि दोनों ने उनके पहले भी किसी को डेट किया होगा, या दूसरों से भी ऑनलाइन बात कर रहे होंगे  और वो इससे एक दूसरे का कैरेक्टर जज नहीं करते हैं।