एक रिसर्च के अनुसार उम्र बीत जाने के बाद पति पत्नी के चेहरे में साम्यता नजर आने लगती है। ऐसा तब होता है जब उनका आपसी प्यार, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति सम्मान जीवनपर्यंत कायम रहता है। एक सुखी और खुशहाल परिवार तब ही बनता है, पति-पत्नी दो पहियों की तरह परिवार रूपी गाड़ी को चलाते हैं। अगर इनमें से एक भी पहिया कमजोर हुआ तो पूरी गाड़ी चरमरा जाती है। दोनों का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता होता है, जो पूरे जीवनकाल तक निभाना होता है। इस रिश्ते को ‘जीवनसाथी भी कहा जाता है। यह वो रिश्ता है जहां अधिकार का भाव दोस्ती में बदल जाता है। अपने दोस्तों से जिस तरह हम बिना स्वार्थ के बिना औपचारिकता निभाए हर छोटी-बड़ी बात शेयर करते हैं, पति-पत्नी को चाहिए कि वे भी इसी तरह के संबंधों से अपनी जिंदगी को खुशहाल रखें ।

काम में सहयोग दें

पति को अपने दफ्तर या दुकान के साथ सुबह और शाम का कुछ वक्त घर के कामों के लिए भी निकालना चाहिए। मसलन, शाम को कार्यालय से वापस आते वक्त घर के लिए खरीददारी कर सकते हैं। सुबह घर के बगीचे की देखभाल करना, बच्चों को बस स्टॉप तक छोडऩा, दूध या सब्जी लाना आदि काम सरलता से किए जा सकते हैं। इससे आपकी पत्नी को घर के कार्यों में सहायता तो मिलेगी ही, साथ ही आपका तालमेल बेहतर होगा और आपका रिश्ता भी मधुर बना रहेगा। पति यह न सोचें कि बच्चों की देखभाल का काम तो पत्नी का ही है, आप भी बच्चों की परवरिश में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। जैसे छुट्टी के दिन बच्चों को नहलाएं, उन्हें तैयार करें। बच्चों के साथ खेलें, उन्हें पढ़ाएं। ऐसा करने से आपके और बच्चों के बीच भावनात्मक रिश्ता भी मजबूत होगा, पत्नी को भी कुछ समय तक बच्चों की देखभाल की चिंता नहीं होगी और इससे वह प्रसन्न होगी। 

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सम्मान बराबरी से दें

इस रिश्ते में आपसी प्रेमभाव, भरोसा और एक-दूसरे की मानसिकता का सम्मान करना बहुत आवश्यक है। पति-पत्नी का रिश्ता जन्म-जन्मांतर का माना जाता है। इस रिश्ते में परस्पर विश्वास और आदर की भावना ही एक-दूसरे के लिए स्नेह व समर्पण का बीज बनती है, जिससे दाम्पत्य रूपी वटवृक्ष फलता-फूलता है। कितना प्यारा और खूबसूरत है यह रिश्ता कि शादी से पहले दो इंसान एक-दूसरे को कितना कम जानते हैं, लेकिन विवाह हो जाने के बाद यह रिश्ता इतना प्रगाढ़ और अटूट हो जाता है कि जिंदगी की आखिरी सांस तक दोनों का साथ बना रहता है। लेकिन इस रिश्ते में सबसे महत्त्वपूर्ण है पति-पत्नी दोनों ही एक-दूसरे को सम्मान दें और एक दोस्त की तरह हर सुख-दु:ख में साथ निभाएं।

मैं की भावना क्यों?

रिश्तों में प्यार और समझ के लिए बहुत जरूरी है कि कभी भी दोनों एक-दूसरे पर हावी न हों। पति यह न समझे कि मैं पति हूं तो मुझे ही हक है कुछ भी करने का। वहीं पत्नी भी अपने पति के हर क्रिया-कलाप में एक दोस्त की तरह व्यवहार करे। घर में लिए जाने वाले निर्णय आपसी सहमति से हों, न कि एक-दूसरे पर जबरदस्ती थोपने की भावना हो। हर दंपती चाहता है कि उसके परिवार में सभी सुख-सुविधाएं हों। अपने सपनों को दोनों तभी साकार कर पाएंगे, जब दोनों मिलजुलकर सलाह मशवरे से काम करेंगे। पति यदि यह अधिकार जताए कि मैं कमाता हूं तो जो मैं चाहूंगा और पत्नी  के मन में यह भावना हो कि घर को चलाना सिर्फ मेरे अधिकार क्षेत्र में है, तो फिर कभी भी सामंजस्य नहीं हो पाएगा। इसके लिए दोनों को ही समझदारी और बड़प्पन दिखाना होगा।

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 मेरा पैसा मेरी मर्जी

जहां दोनों कामकाजी हों, वहां पैसा बहुत मायने रखता है। अपने वेतन को कैसे खर्च करना है और कहां निवेश करना है, ये विवाद का विषय बन जाता है। पत्नी कोई बड़ा सामान खरीदने में पति की सलाह नहीं लेती या पति बिना पत्नी से पूछे शेयर या अन्य किसी चीज में पैसे लगा देता है, तो निश्चित ही झगड़े होंगे। इससे बचने के लिए पति-पत्नी को मिल-बैठ कर हर महीने का बजट बनाना चाहिए। पति-पत्नी के बीच ऐसी समझदारी होनी चाहिए कि किसी मुद्दे पर विचार अलग-अलग हों तो भी एक-दूसरे को समझते हुए निर्णय लें। अगर एक-दूसरे का ध्यान न करते हुए ये सोचेंगे कि मैं चाहे जो करूं मेरी मर्जी, तो बात बनने की बजाय बिगड़ जाएगी।

शक न करें

दाम्पत्य की अटूट कड़ी है विश्वास। और विश्वास पर ही पति-पत्नी का रिश्ता टिका होता है, इसलिए इसमें शक न लाएं क्योंकि अगर यह एक बार आ जाता है तो पूरी जिंदगी लग जाती है टूटी कड़ी जोडऩे में, इसलिए जरूरी है कि विश्वास की नींव हिलने न दें बल्कि इतनी मजबूत बनाएं कि प्रचंड आंधी भी इसे हिला न सके। थोड़ी-सी लापरवाही की वजह से भी अविश्वास पैदा होने लगता है। जैसे- पत्नी को दफ्तर से घर आने में लगातार देर हो रही है, तो फोन कर उसे पति को बता देना चाहिए कि वह देर से आएगी, उसी तरह अगर पति भी किसी काम से फंसे हैं और देर से घर आते हैं तो पत्नी को इसकी सही वजह बताएं। छोटे-छोटे झूठ बोलने से बचें क्योंकि कई बार एक छोटा-सा झूठ बड़े शक की वजह बनता है।

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जरूरी है ये बातें

  • आपस में प्यार, मित्रता, सुख-दु:ख में साथ, पूरी समझ-बूझ और एक-दूजे के लिए त्याग की भावना होनी चाहिए।
  • गलती होने पर माफी जरूर मांगे, सॉरी कहना बुरी बात नहीं है और ना ही माफ करना मुश्किल काम है। माफी मांगने से झगड़ा आगे नहीं बढ़ता, इसलिए माफी मांगने में कंजूसी ना करें।
  • कोई इंसान परफेक्ट नहीं होता, इसलिए एक-दूसरे में गलतियां न निकालें बल्कि गलतियों को सुधारने का मौका दें। अपने प्यार में इतनी ताकत लाएं कि सामने वाला अपनी कमियों को आपके कहे बिना ही सुधार लें।
  • एक-दूसरे के लिए हमेशा ईमानदार रहें और कोई भी ऐसी बात ना छुपाएं, जो बाद में पता चलने पर दिल को ठेस पहुंचाए।
  • अगर किसी बात को लेकर बहस हो रही है तो उस बात का बतंगड़ ना बनाएं बल्कि तुरंत खत्म करने की कोशिश करें।
  • झगड़ा होने पर एक-दूसरे को छोड़ देने की धमकी ना दें, इससे रिश्ते की डोर कमजोर होती है। आमतौर पर ये माना जाता है कि शादी के बाद प्रेम और परिपक्व हो जाता है, इसलिए प्रेम को और बढ़ाएं ना कि कम होने दें।
  • अपने दोस्तों को हम बात-बात पर धन्यवाद बोलते हैं क्योंकि यह शब्द जादू का काम करता है। इसलिए अगर आपके जीवनसाथी ने आपके घर व आपके लिए कुछ किया है तो शुक्रिया जरूर कहें। आपके द्वारा कहा गया धन्यवाद उनको कितनी खुशी देगा, उसका अंदाजा आप नहीं लगा सकते।

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