मेरे 5 साल के बेटे ने टीचर्स डे के दिन जब अपनी पसंदीदा टीचर के लिए प्यारी सी दो लाइन्स बोलीं तब मेरा मन भी अपने अतीत के पन्ने पलटने लगा। मुझे भी अपना स्कूल और कॉलेज का टाइम याद आ गया। न जाने कितनी अच्छी बातें सीखीं, टीचर्स  ने ही मुझे अच्छे बुरे की पहचान सिखाई और उन टीचर्स की ही सीख से मैं अपनी एक पहचान बना पाई। यह एक बहुत बड़ा सच है कि गुरु का स्थान माता-पिता से भी ऊपर होता है क्योंकि गुरु की ही सीख हमें माता-पिता का सम्मान करना सिखाती है। एक कहावत है “गुरु के बिना ज्ञान कहां ” और ये सच भी है क्योंकि गुरु ही हमें कई चीज़ों की जानकारी देता है।  बचपन से लेकर बड़े होने तक टीचर्स ही होते हैं जो हमें कई बातों का अनुभव करवाते हैं। टीचर चाहे नर्म रहे हो या सख्त, किसी भी व्यक्ति की लाइफ में सक्सेस की मुहर वही लगाता है। आज शिक्षक दिवस के अवसर पर हम आपको स्टूडेंट्स और टीचर्स के रिश्ते की वो बातें बताने जा रहे हैं , जो इस रिश्ते को बेहद खास बनाती हैं।

 

अच्छे विचारों का भण्डार हैं टीचर्स 

पैरेंट्स के अलावा अगर आपको कोई अच्छे बुरे की पहचान कराता है तो वो टीचर ही होता है। ऐसा माना जाता है की टीचर अच्छे विचारों से ओतप्रोत होता है और उन्ही विचारों का संचार वो अपने स्टूडेंट में करता है। 

स्टूडेंट के हुनर को निखारता है 

स्टूडेंट के अंदर के किसी भी हुनर को बखूबी पहचान कर उस हुनर को निखारने का काम एक टीचर ही कर सकता है। कई बार ऐसा भी होता है कि स्टूडेंट को अपने ही टैलेंट के बारे में पता नहीं लगता लेकिन टीचर उसकी पहचान कर लेता है। 

 

जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं 

कभी -कभी बेहद सख्त तो कभी नर्म होकर टीचर अपने स्टूडेंट को उसकी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाता है। होमवर्क टाइम से पूरा करने से लेकर किसी बड़े प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी बखूबी निभाने तक का एहसास एक टीचर ही स्टूडेंट को कराता है। 

 

नैतिक शिक्षा देता है टीचर 

अपने स्टूडेंट को नैतिक शिक्षा का पाठ एक टीचर ही कराता है। बड़ों की इज़्ज़त करना, छोटों से प्यार , बुराइयों से लड़ना और अच्छाइयों को गले लगाना ये सब स्टूडेंट अपने टीचर से ही सीखता है।