किसी ने आपके साथ दो-चार चिकनी-चुपड़ी बातें क्या कर ली, हंस क्या ली। मान लिया, हंसी तो फंसी। जबकि ये सही नहीं है। सेक्स को लेकर भी यही स्थिति है। सेक्स को लेकर जितनी फंतासियां हैं, कहानियां हैं, उतनी ही मिथक भी हैं, जो कई बार सच के करीब होकर भी सच नहीं होते। एक आम सोच है कि विवाह का मुकाम सिर्फ सेक्स है। सेक्स बोरियत मिटाने का तरीका है।

ऑर्गेज्म के बिना सेक्स सिर्फ लस्ट है। उन दिनों में नहीं करना चाहिए। ऐसे करें, ऐसे नहीं… फलां…फलां। सच तो यह है कि आपने यदि सेक्स को लेकर सुनी-सुनाई व आधी-अधूरी जानकारियों पर भरोसा किया, तो यकीन मानिए आपकी ‘बेड लाइफ’ बर्बाद होकर रहेगी। सेक्सोलोजिस्ट व डॉक्टरों का मानना है के सेक्स सेहत को फिट रखता हैै। हां, कुछ खास परिस्थितियों में सेक्स वर्जित होना चाहिए, वरना सेक्स सेहत के लिए घातक हो सकता है। जैसे इंफेक्शन, यौन संक्रमित बीमारियां आदि ।

मन भी खिल जाए

लोगों का मानना है कि सेक्स शरीर की जरूरत है। ऐसे में कभी भी, कहीं भी सेक्स से गुरेज नहीं करना चाहिए। यह आधा सच है। माना कि सेक्स शरीर की जरूरत है, लेकिन किसी दबाब में की गई यह क्रिया खुशी नहीं देती। असल में सेक्स शारीरिक पूर्ति के अलावा मानसिक व भावनात्मक सुकून भी देता है। हम जिस परिवेश में रहते हैं, वहां शादी से पहले सेक्स को बुरा माना जाता है। हालांकि, इस सोच में बदलाव आ रहा है।

 

 

चुप-चुप हो, फिर भी खुश हो 

अगर कोई ऐसा सोचता है कि सिर्फ पुरुष ही सेक्सुअल फैंटसीज का आनंद लेते हैं, तो आप गलत हैं। महिलाओं की भी सेक्सुअल फैंटसी होती है, भले ही वे अपने पार्टनर से शेयर ना करें। अगर आपकी पार्टनर सेक्स के दौरान किसी तरह की आवाज नहीं करती तो इसका मतलब यह नहीं कि वह सेक्स इंजॉय नहीं कर रही। सेक्स के दौरान कुछ महिलाएं वोकल होती हैं और कुछ शांति से इंजॉय करती हैं। हर बार अपनी सेक्स पार्टनर से आवाज की अपेक्षा करना गलत है। सेक्स के दौरान आप चरम आनंद (ऑर्गेज्म) महसूस नहीं करतीं तो आप अबनॉर्मल हैं…यह सोच 100 फीसदी गलत है। कई महिलाएं ऑर्गेज्म तक पहुंचती हैं पर वे खुद उसके बारे में नहीं जानतीं।

फर्स्ट टाइम पर न हों क्रेजी

आप सोच रहे हैं कि आपका पहली बार सेक्स करने का एक्सपीरियंस माइंड ब्लोइंग होगा तो यह सही नहीं है। याद रखिए यह आपके लिए नया अनुभव है, इसलिए जरूरी है कि आप चीजों को आराम से करें। अक्सर कहा जाता है कि पहली बार सेक्स करने में बहुत दर्द होता है लेकिन अगर ठीक से फोरप्ले किया जाए और आप इसके लिए पूरी तरह तैयार हों तो पहली बार सेक्स करना बहुत आसान हो जाता है और बहुत कम दर्द होता है। हो सकता है आपको पहली बार बहुत अच्छा एक्सपीरियंस न हो लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि चीजें बेहतर होती जाएंगी। महिलाओं को फस्र्ट टाइम सेक्स के दौरान अपने पार्टनर को खुश करने के लिए ऑर्गेज्म का दिखावा करने की जरूरत नहीं है। धारणा है कि पहली बार सेक्स की अवधि बहुत लंबी होती है और इसका अंत ऑर्गेज्म के रूप में होता है। लेकिन यह धारणा सही नहीं है और ऑर्गेज्म के मामले में महिलाओं को निराशा हाथ लग सकती है। इसलिए जरूरी है कि पहली बार सेक्स के दौरान बिना किसी उम्मीद के सिर्फ इसे एंजॉय करने की कोशिश करें।

 

शिक्षा है जरूरी

  • शिक्षा की कमी और जागरूकता के अभाव के कारण सेक् स को लेकर कई सवाल उठते हैं, लोगों में भ्रम बना रहता है। सही जानकारी न होने पर सेक् स के बारे में अक्सर अंदाजा लगाते हैं जो कि गलत होता है। कई लोग तो सेक् स से कतराते भी हैं और कुछ जानकारी के अभाव में इसे अच् छी तरह से इंज्वॉय नहीं कर पाते। एक रिसर्च के अनुसार 14 फीसदी पुरुष सेक् स के बारे में हर 7 मिनट में सोचते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि पुरुष हमेशा सेक्स के लिए तैयार रहते हैं।
  • अधिकांश लोग मानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति सेक्स पर खुलकर बात नहीं कर रहा या अपनी सेक्सुअल इच्छाओं को बयान नहीं कर रहा तो उसको जरूर कोई बीमारी है। ये गलत है। कई बार व्यक्ति संकोचवश तो कई बार अपने व्यवहार के कारण भी सेक्स पर खुलकर बात नहीं कर पाता।
  • एक मिथक यह भी है कि शादी से पहले सेक्स का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। लेकिन यदि आप प्रोटेक्शन नहीं लेते तो इसका दुष्प्रभाव जरूर पड़ सकता है। इतना ही नहीं बेशक शादी से पहले शारीरिक तौर पर कोई फर्क न पड़ता हो लेकिन इसका मानसिक दुष्प्रभाव जरूर होता है।

नकल नहीं, जानकारी जरूरी

यूरोपीय देशों में ओरल सेक्स काफी प्रचलित है। हालांकि भारत में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत ‘प्रकृति के आदेश के खिलाफ’ कामुक संभोग के रूप में माना गया है, और अवैध श्रेणी में है। लेकिन फिर भी देश में भी यह काफी प्रचलित होता जा रहा है। सेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि आप अपनी सेक्स लाइफ में सुधार लाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। उनका कहना है कि ओरल सेक्स वयस्क रिश्तों का एक सुखद और स्वस्थ भाग हो सकता है लेकिन इससे जुड़ी कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनके बारे में अधिक लोग नहीं जानते। जैसे सेक्सुअली ट्रांसमिटिड डिजीज, एचआइवी या गले का कैंसर। 

मिथक नहीं, सच पर करें यकीन

मिथक – लड़की अगर पहली बार सेक्स करे, तो प्रेगनेंट नहीं होती। 

सच -आप पहली बार सेक्स करें या कई बार करें, प्रेगनेंट होने के चांस दोनों में हैं। इस बहाने सेफ सेक्स को न कहना भारी पड़ सकता है।

मिथक – पीरियड में सेक्स करने से प्रेग्नेंसी नहीं होती। 

सच – कभी भी किया गया सेक्स लड़कियों को प्रेगनेंट कर सकता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सेक्स के बाद लड़की के शरीर में काफी देर तक स्पर्म रहता है।

मिथक – किसी खास पोजिशन में किया गया सेक्स प्रेग्नेंसी से बचाता है।

सच – डॉक्टर्स कहते हैं कि प्रेग्नेंसी का चांस तब तक है, जब तक आप प्रोटेक्शन का इस्तेमाल नहीं करते।

बड़ा है बेहतर ?

बड़ा है तो बेहतर है। क्या आप भी सोचते हैं कि सेक्सुअल प्लेजर प्राइवेट ऑर्गन के साइज पर डिपेंड करता है? अगर हां, तो आप गलत हैं। आप भी अपनी सेक्स लाइफ को बूस्ट करने के लिए ओएस्टर और स्ट्रॉबेरी जैसे फूड खाती हैं? हां…तो इस भुलावे में मत रहिए कि सेक्सुअल प्लेजर का इन लव फूड्स से कोई संबंध है। डिस्चार्ज के समय विदड्रॉल मेथड अपनाने से प्रेग्नेंसी का चांस जीरो हो जाता है, ऐसा सोचना गलत है। कई बार प्री-इजैक्युलेशन के दौरान ही स्पर्म ट्रांसफर हो जाता है।

 

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