यह बात सही है कि जिस तरह से प्यार की कोई उम्र नहीं होती है, उसी तरह से सेक्स की भी कोई उम्र नहीं होती। बस जरूरत है इच्छा क्षमता और ढेर सारे प्यार की। डाॅ. अशोक रामपाल कहते हैं, प्राणी अपने जीवन में कई प्रकार के कार्य करता है, जिसमें सेक्स एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ज्यादातर पति-पत्नी हफ्ते में कम-से-कम दो बार सेक्स करते हैं और वे इसे जीवन का एक हिस्सा बना लेते हैं, जिसके कारण वे आनंद की अनुभूति प्राप्त करते हैं और अपने जीवन साथी को भी आनंद की अनुभूति करवाते हैं।
डाॅ.सतीश गोयल कहते हैं, ‘अनेक व्यक्तियों की यह धारणा गलत है कि जैसे जैसे आयु बढ़ती है, वैसे की सेक्स समाप्त होता जाता है। संभव है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में एवं विशेष कारणों से कुछ व्यक्तियों के साथ ऐसी बात हो, लेकिन प्रायः देखा गया है कि अधिक आयु में ही अनेक स्त्री-पुरूषों में अधिक यौनेच्छा पाई जाती है। कुछ मनोविनोद एवं सामाजिक कारणों से भी हम स्वयं ही अपना ध्यान सेक्स की ओर से हटाने लगते हैं और यदि ये कारण बीच में न रहें तो निश्चय ही सेक्स की भावना जीवन भर एक-सी बनी रहे।

सेक्स को अनदेखा न करें

आजकल की भागती-दौड़ती जिंदगी में पति-पत्नी दोनों कामकाजी होने के कारण वह सेक्स का भरपूर आनंद या तो ले नहीं पाते या फिर थकान के कारण आनंद लेना नहीं चाहते और सेक्स से परहेज करना शुरू कर देते हैं। डाॅ. रामपाल कहते हैं, ऐसा न ही थकान के कारण वह सेक्स से परहेज करते हैं, बल्कि परहेज करने के कई कारण होते हैं जैसे-शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक व दवाइयों का सेवन आदि। परहेज के साथ-साथ यदि मनुष्य अध्यात्म की ओर जुड़ जाता है तो उसमें दुष्परिणामों की संभावना बहुत कम हो जाती है, परंतु यदि वह केवल परहेज ही करता है तो उसके जीवन में एक नीरसता उत्पन्न हो जाती है, जिसके शीघ्रगामी व दूरगामी दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं।

सेक्स में ठंडापन आने से दुष्परिणाम

सेक्स में ठंडापन आने से निम्नलिखित दुष्परिणाम हो सकते हैं-

डिप्रेशन :-  प्राणी तनाव में रहने लगता है, जिससे वो बाहरी संसार से कटने लगता है। वो अपनी ही दुनिया में रहने लगता है, अपने साथी को पूर्ण खुशी देने में सक्ष्म नहीं रहता। जिसके कारण समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती रहती है।

चड़चिड़ापन व मूड में बदलाव :- प्राणी बात-बात पर परिवार में और बाहर के लोगों से उलझने लगता है, उसकी सोच में परिवर्तन आने लगता है, जिससे उसकी किसी से नहीं बनती, कोई भी उनकी मदद करने को नहीं आता।

एकाग्रता में कमी :- वह किसी भी काम को बारीकी से नहीं कर पाता। थोड़ी ही देर काम करने पर वह थक जाता है। पढ़ने में उसमें कमी आ जाती है और नौकरी में उसे दिक्कत आने लगती है।

गरम पसीने :- उसे टाइम बे टाइम पसीना आने लगता है, मुंह लाल हो जाता है, दिल घबराने लगता है, चक्कर व उल्टी भी आ जाती है।

बालों में परिवर्तन –बालों का समय गिरना, सफेद होना शुरू हो जाता है, उसके बालों के स्टाइल में परिवर्तन होने लगता है, चेहरे व शरीर के बालों में कमी आ जाती है।

ओस्टोपोरोसिस :- शरीर की हड्डियों में खोखलापन आना शुरू हो जाता है, वे पतली हो जाती हैं और जरा-सी चोट से टूट जाती है। यह बीमारी औरतों में ज्यादा पाई जाती है।

मोटापा परंतु मांसपेशियों में लचिलापन :- शरीर में वसा की मात्रा बढ़ने लगती है, मांसपेशियां पतली व लचीली होनी शुरू हो जाती हैं, नमक और पानी की मात्रा बढ़ने लगती है, जिससे शरीर फूल जाता है।

स्तनो में परिवर्तन :- स्तनों का आकार बढ़ना शुरू हो जाता है। उनमें ढीलापन आ जाता है, उन पर हाथ लगने से दर्द अनुभव होता है। स्तनों में कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।

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कमजोरी, थकावट, शारीरिक शिशिलता :- प्राणी में कमजोरी बढ़ती जाती है और काम करने में मन नहीं लगता।

सिरदर्द :- सिर में दर्द रहने लगता है, यह अंदर या पीछे के हिस्से में ज्यादा महसूस होता है। आंखों के आगे अंधेरा आने लगता है। दर्द कभी-कभी इतना ज्यादा होता है कि उल्टी आने लगती है।

ग्लैंड में परिवर्तन :- बच्चेदानी के कैंसर की दर बढ़ने लगती है, यह एंडोमीडियम में ज्यादा होता है।

खून का जमना :- ब्लड क्लोटिंग अर्थात् खून का जमना ज्यादा होने लगता है, जिससे दिमाग में स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है।

थायराइड :- थायराइड ग्लैंड में परिवर्तन आने लगता है, उससे कम मात्रा में हारमोंस उत्पन्न होता है, जिससे शारीरिक प्रतिक्रियाएं कम होने लगती है।

डायबीटिज:- छुपी हुई डायबीटिज शुगर का बिगड़ना जैसी स्थिति शुरू हो जाती है, जिससे शुगर की मात्रा का संतुलन बिगड़ जाता है।

बार-बार पेशान जाना :- मूत्र की मात्रा बढ़ने लगती है और वह बार-बार पेशाब करने जाता है।

हार्ट अटैक की समस्या :- दिल का दौरा होने की संभावना बढ़ जाती है और मृत्यु जल्दी आ सकती है। मन में एक प्रकार का भय होने लगता है।

गैस का बनना :- पेट में गैस आदि ज्यादा होने लगती है। मनुष्य सेक्स के दूसरे तरीके अपनाने लगता है, जैसे-ओरल सेक्स आदि।

सेक्स करना फायदेमंद 

  • सेक्स न केवल पति-पत्नी के प्रेम को मधुर बनाता है, बल्कि उनको करीब लाता है। यह केवल क्षणिक उन्माद या तृप्ति के लिए ही नहीं किया जाता, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य एवं मानसिक संतोष के लिए किया जाता है।
  • सहवास केवल आनंद प्राप्ति के लिए ही नहीं किया जाता, उसके साथ हमारा शरीर, सुख लाभ भी प्राप्त करता है। इच्छित और संयमित सहवास स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह आवश्यक नहीं है कि केवल विषय भोगों के सुख लाभ के लिए ही मनुष्य अपने यौवन को दीर्घकाल तक बनाए रखना चाहे, बल्कि जीवन भर स्वस्थ रहने के लिए भी उसे यौवन शक्ति की नितांत आवश्यकता है।
  • स्त्री पुरूष सेक्स द्वारा जो मनोरंजन प्राप्त करते हैं वह मन एवं मस्तिष्क को शांति प्रदान करने वाला होता है। आज के उलझे हुए संसार में इसका महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। प्रत्येक स्त्री-पुरूष के जीवन में सेक्स महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है और अन्य क्रियाओं के साथ-साथ मनोरंजन भी बहुमूल्य घड़ियां प्रदान करता है। सेक्स मनोरंजन के सभी साधनों में सर्वोपरि है।

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