सभी लोग चाहते हैं कि दूसरे उनका कहना मानें लेकिन अक्सर ऐसा हो नहीं पाता। क्या आप इसके पीछे की कमजोर कड़ी जानते हैं? इसका सबसे प्रमुख कारण है कि हमारा काम करने का तरीका लोगों को प्रभावित करने की योग्यता नहीं रखता।

यदि आप चाहते हैं कि दूसरे लोग आपकी बात मानें और आपकी इच्छा के अनुसार कार्य करें तो सबसे पहले आपको उन्हें अपने प्रभाव में लेना होगा।

इसके लिए आपको निम्न बातों पर विशेष तौर से ध्यान देना है-

 सबसे पहले आपको पता लगाना है कि ‘वे क्या हैं?
 दूसरा, उन्हें क्या पसंद है और वे क्या चाहते हैं?
 फिर मालूम करें कि उन्हें किस बात या चीज से कैसे प्रेरित किया जाए?

दरअसल एक जैसी शारीरिक संरचना होने के बावजूद हम सभी मनुष्यों का नजरिया अलग-अलग होता है, हमें अलग-अलग किस्म की चीजें पसंद होती हैं, हम प्रत्येक वस्तु, परिस्थिति, रिश्ते या संबंधों का अलग-अलग मूल्यांकन करते हैं। इस बात को स्पष्ट करने के लिए मैं आपके सामने छोटा-सा उदाहरण दे रहा हूं।
मेरा एक मित्र है जो कि एक कंपनी में सीनियर सेल्स मैनेजर के पद पर कार्य कर रहा है। कुछ वर्ष पहले वह एक साधारण-सा सेल्समैन था। जब वह सेल्समैन था तब एक दिन उसने मुझे अपने यहां डिनर पर बुलाया। मैं उसके घर गया और मैंने देखा कि उसके घर में एक बड़ा सा चूहा घूम-घूम कर उपद्रव मचा रहा है। चूहे की तरफ देखते हुए मैंने अपने मित्र से कहा कि एक चूहेदानी क्यों नहीं ले आते? उसने कहा, ठीक है! कल ही ले आऊंगा और उसने ऐसा ही किया। अगले दिन एक चूहेदानी ले आया और चूंकि उसे स्वयं को सेब बहुत पसंद है, इसलिए उसने चूहे को पकडऩे के लिए उसमें एक सेब का टुकड़ा भी लगा दिया। दिन बीतते गए मगर चूहे ने न तो सेब के टुकड़े को खाया और न ही चूहेदानी में फंसा। कुछ दिनों बाद मेरे मित्र ने परेशान होकर मुझे बताया कि चूहा चूहेदानी में फंसता ही नहीं, जबकि वह उसके लिए रोज एक ताजा मीठे सेब का टुकड़ा उसमें लगाता है। इस पर मैंने उससे कहा कि चूहे को क्या पसंद है, क्या वह यह जानता है? उसने उसे बताया कि चूहे की पसंद देखोगे तो पाओगे कि उसे सूखी बासी रोटी पसंद है। इसलिए आज तुम उस चूहेदानी में बासी सूखी रोटी का टुकड़ा लगाओ। मेरे उस मित्र ने, मेरे सुझाव के अनुसार उसी रात चूहेदानी में रोटी का टुकड़ा लगाया तो अगले दिन उसने उस चूहे को चूहेदानी में फंसा पाया। इस बात से उसने सदा के लिए सबक सीख लिया, जिसे बाद में उसने अपने प्रोफेशन में भी लागू कर लिया।
‘अगर हम किसी को अपने साथ जोडऩा चाहते हैं या किसी को कुछ बेचना चाहते हैं तो हमें यह नहीं देखना है कि हमें क्या पसंद है बल्कि हमें यह देखना है कि उन्हें क्या पसंद है और वह क्या चाहते हैं। उन्हें उनकी पसंद की चीज देने से ही आपको कामयाबी मिल सकती है।

दोस्तों, विश्वास मानिए इस सिद्धांत को अपनाने के बाद मेरा वही दोस्त जो अपनी कंपनी में एक साधारण सा सेल्समैन था, उस कंपनी में एक सीनियर सेल्स मैनेजर के पद पर कार्य कर रहा है।

उपरोक्त उदाहरण से हमें यह सबक मिलता है कि ऐसा मानकर चलना हमारी भारी भूल होती है कि सबका नजरिया हमारे जैसा है अथवा जो चीज हमें पसंद है, वह औरों को भी पसंद आएगी। या जिस चीज को पाने के इच्छुक हम हैं, दूसरे भी उसे पाने के उतने ही इच्छुक होंगे।
इसलिए सबसे पहले पता करें कि ‘वे यानी सामने वाले क्या चाहते हैं। किस चीज को या किस मुकाम को पाना उनकी प्राथमिकता है। फिर आप उन्हें उन्हीं की इच्छानुसार प्रेरित करें। आपको उन्हें केवल यह समझाना है कि वे अपनी इच्छित वस्तु प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते कि वे आपकी इच्छा के अनुरूप कार्य करें।
लोगों को प्रभावित करने का यह एक बड़ा ही सधा हुआ मंत्र है। लेकिन यह मंत्र तभी प्रभावी होगा जब आप सामने वाले के विषय में अच्छी तरह से जान लें कि उसे क्या पसंद है और वह क्या चाहता है? फिर उसे विश्वास दिलाना है कि जो चीज वह चाहता है, उसे वह आपकी इच्छा के अनुरूप कार्य करके ही प्राप्त कर सकता है।

इसलिए पहले लोगों की इच्छा का पता लगाएं कि उन्हें क्या चाहिए- इसका तरीका है, उनसे पूछना, उन्हें ध्यानपूर्वक सुनना और समझना। एक बार आपने यह सीख लिया, फिर आपके प्रयत्न आपको इस कला में माहिर बना देंगे, यह तय मानिए।