सेक्स से जुड़े सवाल-जबाब
पुरूषों की सेक्स की समस्याएं
यह सच है कि सेक्स एक शारीरिक जरूरत हैए पर हकीकत यह है कि यह मन से जुड़ा मामला हैए क्योंकि सेक्स मन से संचालित होता है और शरीर के जरिये व्यक्त होता है। पर देखने में आ रहा है। कि आजकल के माहौल में महिलाओं महिलाओं और पुरूषों में सेक्स संबंधी चिंताएं बहुत बढ़ गई हैं। मन में अक्सर कई सवाल उमड़ते हैंए कई गलतफहमियां होती है तो क्यों न सेक्स से जुड़ी कुछ गलतफहमियों और सच व झूठ को जानें। पुरूषों में सेक्स से जुड़ी शंकाओं का समाधान कर रहे हैं अशोक क्लीनिक चांदनी चैक के सीनियर सेक्सोलाजिस्ट डाॅण् अशोक गुप्ता से ।
 
पुरूषों के लिए
क्या पेनिस का आकार निर्धारित करता है कि आप कितने मर्द है?
पुरूषों में लिंग के आकार को लेकर कई तर्कहीन बातें रहती हैएं जैसे लिंग का बड़ा और मोटा होना आप पौरूष व सेक्स में बेहद एक्टिव हैं आदि दर्शाता है। ये सब गलतफहमियां हें सेक्स क्रिया पर लिंग के छोटे या पतले होेने का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
 
जब सेक्स की बात आती है चाहे स्त्री हो या पुरूष दोनों के मन में इस लेकर कई तरह के जबाव खड़े हो जाते हैं आइयें जानें इन सवालों के बारें में ।
टेस्टीकल्स छोटे होने की स्थिति में शादी के बाद पार्टनर को पूर्ण संतुष्टि नहीं दे पाउंगाघ्
टेस्टीकल्स स्पर्म की एक फैक्ट््री है और पेनिस सप्लाई का माध्यम। इसके छोटे होने और सेक्स का कोई संबंध नहीं है।
 
यदि लिंग एक तरफ से टेढ़ा हो तो शादी के बाद सही तरीके से संबंध बनाने में दिक्कत आएगी?
आमतौर पर लिंग की कोई भी अवस्था असामान्य नहीं होती। पेनिस किसी की भी 90 डिग्री एंगल पर नहीं होती है। स्त्री की वेजाइना फ्लैक्सिबल होती है अतः संबंध बनाने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
 
अधिक मास्टरबेशन ;हस्तमैथुनद्ध से टीवी व नपुंसकता हो सकती है?
मास्टरबेशन एक साफ.सुथरा तरीका है। यह केवल भ्रांति मात्र है कि हस्तमैथुन से टीवी या नपुंसकता आ जाती है। पर अधिकता अवश्य हर चीज की बुरी होती है। मनोचिकित्सकों का मानना है कि हस्तमैथुन तब तक नुकसानदेह नहीं रहता जब तक अति न हो। 
 
क्या स्वप्नदोष या हस्तमैथुन से कमजोरी आती है?
कमजोरी की शिकायत महज दिमागी तौर पर होती है। इन भ्रातिंयों के बारें में यह जानना आवश्यक है कि वीर्य बनता ही डिस्चार्ज होने के लिए है। जब वीर्य अधिक हो जाता है तो रात में सोते समय अपने आप डिस्चार्ज हो जाता है। यह बेहद एक आम शारीरिक क्रिया है। पर इसके अलावा सही जीवन शैली न अपनानेए कामुक बातें हर समय सोचनेए डर आदि से भी हो जाता है। 
 
क्या तंबाकू और शराब के सेवन का असर सेक्स परफार्मेंस पर पड़ता है?
कुछ शोधों से यह प्रमाणित किया गया है। कि धम्रपानए तंबाकू और शराब के सेवन से सेक्स परफार्मेस पर असर पड़ता है। कम मात्रा में अल्कोहल का सेवन सेक्स इच्छा को जागृत करता है। वहंी इसकी अधिकता से शीघ्र पतन और लिंग उत्तेजना में कमी की शिकायत हो सकती है।
 
क्या ;एनलद्ध और ओरल सेक्स नहीं करना चाहिए यह अनहाइजेनिक होता है?
यह सेक्स क्रियाएं अनहाइजेनिक होती है। इसकी कई वजहें हैं। इससे एड्स आदि होने की संभावनाएं हो सकती हैं । लेकिन फिर भी यह काफी हद तक पार्टनर पर भी निर्भर करता है। वैसे भी कई देशों में एनल सेक्स कानूनी रूप से जुर्म माना जाता है। इससे वीर्य स्तंभन की शक्ति कमजोर या क्षीण होकर शीघ्रपतन को भी जन्म देती है। इसलिए बेहतर होगा कि इसे न किया जाए।
 
आमतौर पर सेक्स कितनी देर तक करना चाहिए ?
सेक्स के लिए कोई निश्चित समय.सीमा नहीं हैए ना ही वैसा मापदंड जिसे नापा जा सके। फिर भी प्ले व आफ्टर प्ले और सेक्स क्रिया मिलाकर चालीस मिनट का समय लगना एक आदर्श व संतुष्टिदायक क्रिया मानी जाती है। 
 
क्या कुछ बिमारियों का असर भी सेक्स क्रिया पर पड़ता है?
अवश्य कुछ बिमारियों जैसे.हार्ट प्राॅब्लमए शुगरए दमाए कैंसर जैसी बिमारियों का असर सेक्स क्रिया पर पड़ता है। इसके लिए अपने डाक्टर से विवाह पूर्व अवश्य परामर्श करना चाहिए। यह जानना भी जरूरी है कि लिंग में पर्याप्त उत्तेजना हो। अच्छा ही वीर्य जांच जरूर करवाएंए ताकि सही स्थिति पता चल सके। जो लोग रेडिएशन के काम से जुड़े हैं उन्हें तो अवश्य अपने स्पर्म की जंाच करा लेनी चाहिए।
 
क्या सेक्स उत्तेजक दवाएं सेक्सुअल इच्छा को बढ़ाने के साथ.साथ सेक्सुअल क्रिया भी देर तक बनाए रखती हैं?
सेक्स उत्तेजक दवाओं को लेकर कइयों के दिमाग में गलत धारणाएं होती हैं। दरअसल लिंग में इरेक्शन होना परंतु चरम सीमा पर पहुंचने से पहले ही शिथिल हो जाने पर पहंुचने से पहले ही शिथिल हो जाने पर ही सेक्स उत्तेजक दवाइयां प्रभावशाली होती हैं। पर कौन.सी दवा कितनी मात्रा में चाहिए यह तो डाॅक्टर ही बताएगा।
 
यदि पुरूष इरेक्शन होने पर सेक्स नहीं करे तो क्या उसे दर्द या तकलीफ होती है?
यह पूरी तरह से सच नहीं है। थोड़ी बहुत परेशानी और असुविधा जरूर होती है। 
 
एक दिन में कितनी बार संभोग किया जा सकता है?
यह सब दोनों की सहमति व शारीरिक और सेक्स संबंधी सक्रियता पर निर्भर करता है। ज्यादा या कम सेक्स दोनों पर ही निर्भर करता है। 
 
पुरूषों में नपुंकसता का कारण क्या है?
न्पुंसकता रोग में पुरूष के शिश्न में उत्थान नहीं होता है। इसके कई कारण होते हैं ।दवाएंए नशीले पदार्थए डायबिटीजए उच्च रक्तचापए तंत्रिका तंत्र के रोगए ब्लैडर का कैंसरए कोई चोटए आदि रोग पुरूषों में पुंसत्व हीनता ला सकते हैं। सिगरेट पीने से नपुंसकता तो नहीं आतीए पर शुक्राणुओं की क्वालिटी प्रभावित होती है। किसी कारण से धमनियां संकरी हो जाएं तो शिराओं मंे रक्त का संचार कम हो जाता हैए जिससे शिश्न को उत्थान के लिए पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता है। यह यौन क्षमता में बाधा पहुंचाता है। व्यक्ति डायबिटिज से 15.20 सालों से प्रभावित रहा हो और खुद पर नियंत्रण भी बहुत कम रहा हो तो ऐसे 50 प्रतिशत रोगी नपुंसक हो जाते हैं। ब्लैडर के कैंसर के उपचार में सर्जरी के समय प्रोस्टेट ग्रंथि निकाल दिए जाने से भी पुरूष नपुंसक हो जाता है। उच्च रक्तचाप की बीटा ब्लाॅकर दवाएं नियमित लेने वालों में से 10.20 प्रतिशत रोगियों को नपुंसकता आ जाती है। ऐसे ही अल्सर की दवाएं भी यौन क्षमता पर विपरीत प्रभाव छोड़ती हैं। मदिरा रोग के शिकार पुरूषों के अंगों व हार्मोंस पर शराब का नकारात्मक प्रभाव पड़ता छोड़ती हैं। मदिरा रोग के शिकार पुरूषों के अंगों व हार्मोंस पर शराब का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।ड््रग एडिक्ट लोग भी नपुंसक हो जाते हैं। पूर्ण नपुंसकता उसे कहते हैंए जो जन्मजात होती है और इसका कोई निदान भी नहीं है लेकिन अचानक आई नपुंकता शारीरिक कम और मानसिक ज्यादा होती है और इसका निदान भी है। 
 
नपुंसकता का संबंध मन से है और शरीर से कम है?
यह सच है कि मानसिक नपुंसकता ही ज्यादातर पुरूषों में देखने को मिलती है। स्त्री पार्टनर की सेक्स संबंधी कोई बात या कटाक्ष भी पुरूषों में नपुंकता का कारण बन सकता है। स्त्री पार्टनर अति क्रोधीए अव्यावहारिकए सेक्स में अकुशल और बात.बात पर झिड़क देने वाली होती है तब भी पुरूष हीन भावना से ग्रस्त होकर नपुंसकता का शिकार हो जाता है। शिश्न.उत्थान न होने के ज्यादातर मामलों में पुरूष के मन में ही दोष होता है। मन से ही सेक्स का संचालन होता है। आंखों की भी इसमें भूमिका होती है ।आंखों को स्त्री भाती हैए सुंदर सेक्सी और आकर्षक दिखती है तो ये मन का संदेश भेज देती है। मन फिर सेक्स के लिए तैयार होने लगता है। मन पहले कामोत्तेजना पैदा करता हैए फिर शिश्न में उत्थान स्वाभाविक रूप से आने लगता है। स्त्री का बिहेवियर पुरूष के प्रति ठीक नहीं हैए वह सज.संवर कर नहीं रहती है। और सेक्स के लिए खुद को तैयार नहीं करती है फिर पुरूष मन.ही.मन उस पर कुढ़ता ही मानसिक दोष बनकर पुरूष को नपुंसकता की ओर ले जाती है। सच तो यह है कि जो पुरूष खुद को नपुंसक मानते हैंए वे वास्तव में नपुंसक होते ही नहीं है। 95 प्रतिशत ऐसे पुरूष होते हैंए जो मानसिक नपुंसकता के शिकार होते हैं। और इसके पीछे स्त्री का बिहेवियर होता है और उनकी खुद की जीवनशैली होती है। 
 
अनिद्रा और अति व्यस्त जीवनशैली से भी नपुंसकता आ जाती है?
हांए अनिद्रा और व्यस्त जीवनशैली भी नपुंसकता की वजह हो सकती है। गहरी नींद से पाचन तंत्रए मस्तिष्क और रक्त के संचार में संतुलन बना रहता है। मस्तिष्क स्वस्थ रहता है। जीवनशैली जब अति व्यस्त हो जाती है। तब मन की चंचलता बढ़ जाती है। कार्य पूरा करने की चिंता मन को बिजी रखती है। जिससे इरेक्शन की प्राॅब्दम खड़ी हो जाती है। जबकि यह कोई समस्या होती ही नहीं है क्यांेकि जब मन कार्य की तरफ है तो फिर एक समय में दो कार्य कैसे कर सकता हैघ् सेक्स के लिए मन का तनावमुक्त होना जरूरी है। इरेक्शन मन के आदेश से ही होता है।
 
शिश्न में पूरा उत्थान होता है लेकिन सहवासरत होते ही शिश्न शिथिल पड़ जाता हैए क्या यह शारीरिक नपुंसकता है?
नहींए यह मानसिक  नुपंसकता है। मानसिक नपुंसकता में शिश्न सोते समयए रोमाटिंक कल्पना करते समय स्वाभाविक रूप से उत्तेजित होता हैए पर स्त्री के संपर्क में आते ही शिश्न अपनी उत्थान शक्ति को खो देता है। कारण सेक्स को लेकर मन में भय होता है। कि पता नहीं यह शिश्न कब शिथिल पड़ जाए। मन में यह सवाल आते ही कभी सहवास आते ही कभी सहवास से पहले ही या कभी सहवासरत होने के बाद बीच में ही शिशन शिथिल पड़ जाता है। क्योंकि शिश्न के शिथिल होने की आशंका शिश्न को देर तक उत्तेजित अवस्था में रहने हीनहीं देती है। मन से यह आशंका अगर पुरूष निकालकर सहवास करे तो यह समस्या हल हो सकती है। 
 
स्त्री अगर सहयोगी प्रवृत्ति की हो और पुरूष को यह आश्वासन दे दे कि तुम सहवास करोए शिश्न शिथिल भी पड़ जाएगा तो कोई बात नहींए तो क्या मानसिक नपुंसकता दूर हो सकती है?
स्त्री सहयोगी प्रवृति क अगर होगी तो जाहिर .सी बात हैए वह पुरूष को हर तरह से सेक्स के लिए उत्साहित करेगी और कोई कटाक्ष भी नहीं करेगी तथा फोरप्ले भ करेगीए फिर पुरूष के मन का भय बहुत कुछ हद तक खुद ही दूर हो जाएगा और वह भय व आशंकारहित यौन.संबंध बनाने की कोशिश करेगा। ऐसे में शिथिल पड़ गया शिश्न धीरे.धीरे उत्थान की ओर अग्रसर होता चला जाएगा। यह मानसिक नपुंकता को दूर करने का एक कारगर उपाय है। 
 
नपुंसंकता नाशक हर्बल औषधियां पुरूष बिना किसी डाॅक्टर की सलाह बिना किसी डाॅक्टर की सलाह लिए ही खरीदकर खाना शुरू कर देते हैंए क्या यह उचित है?
 
खुद यह निर्णय ले लेना कि आप नपुसंक हैं और आप डिब्बे पर लिखी नपुंसकता नाशक दवा ले सकते हैंए यह घातक सिद्ध हो सकता है। दवाएं विशेषज्ञों की राय से लेना ही फायदेमंद साबित हो सकता है। कामोत्तेजक दवाएं अपने मन से लेना फायदा कम और नुकसान ज्यादा होने के चांस रहते हैं। मानसिक नपुंसकता में तो दवा की जरूरत ही नहीं होती है। नपुंसकता का सही निदान क्या हो सकता है ताकि पुरूष फिजूल की मानसिक दुश्चिताओं से बच सकें और नीम.हकीमों की झोली भी भरने से बच जाएंघ्
पति मिलन के नाम से घबराता हो तो सबसे पहले कारण जानने की कोशिश स्त्री करे। महज प्रेम देकर बहुत से मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान हो सकता है। किसी सेक्सोलाॅजिस्ट से भी संपर्क स्त्री कर सकती है । यदि शारीरिक .विकार हो तो डाॅक्टर के पास जाने के लिए प्रेमपूर्वक पति को स्त्री प्रेरित करे। अक्सर पुरूष इसके लिए डाॅक्टर के पास जाने से कतराते हैं। पति को यौन.व्यायाम करने व प्रामाणिक यौन.व्यायाम करने व प्रामाणिक यौन.साहित्य पढ़ने की सलाह स्त्री दें । पुरूष अगर कोई दवा सालों से ले रहा हो और आगे भी लेनी हो तो अपने डाॅक्टर से मिलकर समस्या बताएं। यदि डाॅक्टर समझेगा कि परेशानी उस दवा से ही है तो वह दवा बदल देगा। अगर हार्मोनल कारण होगा तो वह इसकी चिकित्सा कराने की सलाह देगा। कारण शारीरिक हो या मानसिक दोनों ही अवस्थाओं में इलाज की गुंजाइश है। शरमाने की बजाए स्त्री पार्टनर से बेझिझक पुरूष को अपनी समस्या बता देनी चाहिए । वह यथासंभव सहयोग अवश्य ही करेगी। आधुनिक चिकित्सा में नपुंसकता का माकूल इलाज है लेकिन दिक्कत तो यह है कि पुरूष अपनी समस्या किसी के साथ जल्दी शेयर ही नहीं करते और स्त्री के सामने बार.बार शर्मिंदा होते रहते हैं। 
 
पुरूष नपुंसकता की समस्या से स्त्री के सामने बार.बार शर्मसार होने के बाद भी इलाज कराने से कतराते क्यों हैं?
पुरूष ईगो के कारण कि हम पुरूष हैंए स्वप्नदोष महीने में दस.पन्द्रह बार हो जाए तो क्या तब भी कोई विकार नहीं कहा जा सकताघ्
अति तो किसी भी चीज की बुरी होती है। विवाहित स्त्री.पुरूष भी सेक्स में अति कर दें तो समस्या खड़ी हो सकती है। युवाओं को कम से कम उत्त्ेाजना आए और स्वप्नदोष की आवृत्ति कम.से.कम हो इसके लिए अश्लील फिल्में अश्लील तस्वीरें और गंदे साहित्य कम.से.कम पढ़ें और अपना ध्यान कैरियर निर्माण में लगाएं। 
 
स्वपन दोष की वजह से युवक दुर्बल हो सकता है या विभिन्न बिमारियों का शिकार हा सकता है?
ऐसा कुछ भी नहीं है । स्वप्नदोष से न तो कमजोरी आती है। और  न ही आंखों के आगे अंधेरा छाता है और न ही यौनागों पर कोई विपरित प्रभाव पड़ता है। वैवाहिक जीवन के आनंद में भी कोई कमी नहीं आती है। सेक्स शक्ति भी कम नहीं होती है। सेक्स शक्ति भी कम नहीं होती है। यह रोग नहीं है तो कोई दवा लेने या इलाज कराने की भी जरूरत नहीं होती है। 
 
कुछ युवक या किशोरों को तो एक ही रात में एक से अधिक बार स्वप्नदोष हो जाता है। क्या यह गलत नहीं है?
कोई गलत नहीं है क्योंकि किशोरवस्था या युवावस्था में कामोत्तेजना का वेग बहुत ही प्रबल होता है। और वीर्य बनने की प्रक्रिया भी प्रौढ़ों के मुकाबले बहुत तेज होती है। वीर्य की अधिकता और कामोत्तेजना की प्रबलता के कारण एक से अधिक बार भी स्वप्नदोष होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। कुछ युवक वीर्य को बहुत कीमती मानकर उसके क्षरण से घबरा जाते हैं और यह घबराहट उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर देती है जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। वीर्य तो लगातार बनता रहता है और जब अधिक हो जाता है तो निकल जाता है। 
 
युवाओं को कैसा आहार दिया जाए कि उन्हें स्वप्नदोष का सामना कम.से.कम करना पड़े और कामोत्तेजना के प्रबल वेग से बचे रहकर कैरियर को बनाने में अपना ध्यान लगाएं?
 
युवाओं को सबसे पहले तो यह समझाना जरूरी है कि स्वप्नदोष एक स्वाभाविक क्रिया है । कोई रोग नहीं है। वे अप्राकृतिक मैथुन से बचकर अपने आहार.विहार में परिवर्तन लाएं। ऐसे पदार्थों का सेवन बंद कर दें जो कामेच्छा या कब्ज को बढ़ाते हैं। हल्के सुपाच्य भोजन करें और किसी.न.किसी प्रकार का शारीरिक परिश्रम अवश्य करें। अच्छे साहित्य पढ़ें । रात का भोजन सोने से तीन घंटे पहले ले लें। चटपटेए खट्टे तथा देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। धूम्रपानए गुटखाए तंबाकू की आदत न डालें। चायए काॅफी कम.से.कम लें । अश्लील फिल्में न देखें। 
 
क्या युवकों की तरह युवतियां भी स्वप्नदोष से प्रभावित होती हैं और आॅर्गेज्म की अनुभूति करती हैं?
हां, युवतियां भी स्वप्नदोष का सामना करती हैं और अपने मनपसंद युवक के साथ नींद में ही सहवास करती है और चरम पर पहुंचने पर उनकी योनि गीली हो जाती है। स्वप्नदोष युवक या युवतियों के लिए समस्या नहीं बल्कि उनके पुंसत्व और नारीत्व का सूचक है। इससे यह साबित हो जाता है कि वे सेक्स की दृष्टि से नाॅर्मल हैं और वैवाहिक .जीवन का लुत्फ बेहतर ढंग से भविष्य में उठाएगें। 
 
पुुरूषों में यौन ठंडापन या सेक्स अरूचि के लिए कौन.सी बातें जिम्मेदार होती हैं?
हस्तमैथुनए अति सहवासए अप्राकृतिक सहवासए वीर्य का न बननाए स्त्री पार्टनर का शुष्क व्यवहारए शीघ्रपतनए नपुंसकताए सहवास के प्रति गलतफहमीए सहवास को गंदा समझना आदि ऐसे कारण हैंए जो पुरूषों में यौन ठंडापन ला देते हैं और वे समय से पहले ही सेक्स की ओर से विमुख हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त हृदय रोगए भयए सुरक्षा का अभावए आर्थिक प्राॅब्लमए शारीरिक कमजोरी आदि बातें भी पुरूषों में यौन ठंडापन लाती है। 
 
सेक्स अरूचि यानी यौन ठंडापन को कैसे दूर किया जा सकता है। 
शरीर में आई जिस कमी की वजह से यौन ठंडापन हुआ होए उस कमी को सबसे पहले पूरा करना चाहिएए फिर स्त्री में रूचि लेना शुरू करना चाहिए। पौष्टिक भोजन और फोरप्ले पर भरपूर ध्यान देना चाहिए। मादक और रोमांटिक संगीत सुनना चाहिए और सेक्स संबंधी अच्छा साहित्य पढ़कर सेक्स ज्ञान में वृद्धि करनी चाहिए। सेक्स न करना प्रकृति के खिलाफ है और सेक्स गंदी चीज नहीं है। इस बात का ध्यान रखते हुए स्त्री पार्टनर को आलिगंन में तब भी लेना चाहिए जब उत्तेजना महसूस न हो
। ऐसा करने से स्त्री पार्टनर का रूझान भी यौन.संबधों की ओर होगा।