बंबल, टेस्टबड्स, स्कोर, हैपन, फ्लिकपिक, टिनडॉग, अलाइन और कॉफी मीट्स बजल जैसे डेटिंग एप्स से वे लड़कियां व महिलाएं अच्छी तरह वाकिफ होंगी जो अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या और नीरस सेक्स लाइफ से उकता कर कैजुअल सेक्स या रोमांटिक रिलेशनशिप के लिए ऑनलाइन साथी खोजती हैं। ऑनलाइन डेटिंग एप्स को लेकर आमतौर यही धारणा है कि यहाँ आकर राइट और लेफ्ट स्वाइप कीजिये और आपको कोई हैंडसम सा माचो मैन कैजुअल या सीरियस रिलेशनशिप के लिए मिल जाएगा।यह धारणा इसलिए भी है क्योंकि इस तरह की एप्स के विज्ञापन भी सिंगल से मिंगल होने और अजनबी के साथ सेफ सेक्स डेट के दावे करते हैं।

 

छलावा है दावा

हालाँकि इन दावों को गलत साबित करती है नॉर्वे यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं की नई रिपोर्ट। महिलाओं पर किए गए एक स्टडी में ये खुलासा हुआ है कि टिंडर और दूसरी एप्स का इस्तेमाल सबसे ज्यादा महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। जिसमें महिलाएं खुद को आकर्षित और पुरूषों के साथ कैजुअल सेक्स तो वहीं शॉर्ट टर्म रिलेशनशिप के लिए ऐसे एप्स का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि इन एप्स के जरिए महिलाएं को उतना सुरक्षित और उन्मुक्त सेक्स या रोमांस नहीं मिलता जितने दावे किये जाते हैं। कई बार तो उनके अनुभव और भी कड़वे और भयावह हो जाते हैं जब इन एप्स के जरिये मिला कोई कामुक और घटिया मानसिकता का पुरुष सेक्स के लिए उन्हें ट्रोल करने लगता है।

 

महिलाएं पस्त, पुरुष मस्त

इतना ही नहीं इन एप्स के जरिये ज्यादा उत्सुकता से सेक्स पार्टनर खोज लेते हैं जबकि महिलाएं कई बार लो क्वालिटी सेक्सुअल पार्टनर्स के साथ जाकर ठगा महसूस करती हैं। शायद इसीलिए पुरूष, महिलाओं के मुकाबले राइट स्वाइप ज्यादा करते हैं। यह शोध 19 से 29 साल आयु वर्ग के 641 छात्रछात्राओं की सेक्स लाइफ और उनके एप्स यूज करने के अनुभवों पर आधारित है। शोध की मानें तो महिलाएं जहा इन एप्स में ठीकठाक समय व जानकारी जुटाकर किसी पुरुष का चयन करती हैं तो वहीँ पुरूषों में कैजुअल सेक्स और शॉर्ट टर्म रिलेशनशिप को लेकर जल्दबाजी रहती है। इसीलिए इन एप्स में पुरुष जल्दी से निर्णय लेते हैं और महिलाएं सोच समझकर। फॉर भी इस प्लेटफोर्म पर अक्सर महिलाएं गलत रिश्ते में फंस जाती हैं और पुरुष सिर्फ मस्ती कर साफ बच निकलते हैं।

 

स्ट्रेंजर्स आर डेंजरस

अकेलापन आज एक ऐसी महामारी बन चुका है जिसने महिलाओं को तकनीक इस अंधी गली में प्यार तलाशने के लिए मजबूर कर दिया है। यह एक तरह की लाइफस्टाइल बन चुकी है जहाँ महिलाएं अपने मन की कुंठा और सेक्स की अधूरी चाहतें पूरी करने की छटपटाहट में कई बार अपना सब कुछ गँवा देती हैं। संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वे के मुताबिक़ एन डेटिंग एप्स के जरिये मिलने वाले ज्यादातर लोग या तो एड्स से पीड़ित होते हैं या फिर मानसिक तौर पर बीमार। ये महिलाओं को उनकी जिन्दगी में आई कमियों को पूरा करने का लालच देकर बर्बाद कर देते हैं। याद रखें रिश्तों एक निभाने के लिए किसी सच्चे और अच्छे दोस्त की जरूरत पड़ती है लेकिन ऑनलाइन दुनिया में सब अजनबी (स्ट्रेंजर्स) हैं और स्ट्रेंजर्स आर मोर डेंजरस दैन एनी अदर्स।