क्या आपने कभी सोचा है कि आप अपने बच्चों, सहकर्मियों, जीवनसाथी, माता-पिता, काम करने वाली, सब पर इतनी अच्छी तरह से नजर क्यों रख पाती हैं? क्योंकि हमें या हमारे परिवार को प्रभावित करने वाली हर चीज पर नजर रखना स्त्रियों की एक स्वभाविक प्रवृति है। अब मैं इसे एक सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझाती हूं। मुझे लगता है कि हम भारतीय अनुवांशिक रूप से गुप्त सीक्रेट एजेंट बनने के काबिल हैं और हमारी ट्रेनिंग बचपन से शुरू हो जाती है। बचपन में मैंने देखा है कि कैसे हमारी मां घर पर नियंत्रण रखने के लिए जांच-पड़ताल और ताकाझांकी करती हैं। लेकिन उनका जासूसी करने का ये तरीका इतना सटीक था कि हमें कुछ पता ही नहीं चलता था। अब चार बच्चों के होते हुए शांति और भीड़ पे नियंत्रण रखने के नाते उनके पास शायद कोई चारा ही नहीं था। छिपे हुए कागज, गुप्त फोन कॉल, बॉयफ्रेंड, सब कुछ के बारे में उन्हें आसानी से पता चल जाता था। अगर सीबीआई के अधिकारियों को ज्ञात होता उनके बारे में तो भी उन्हें एक खुफिया एजेंट के रूप में जरूर भर्ती कर लेते। मेरे लिए जासूसी करने की जरूरत थी बहनों की भीड़ में खिलौनों, खाने और प्यार के मामले में आगे बने रहने के लिए। ये जासूसी के बीज एक दुष्चक्र हैं जो तब शुरू हुआ जब हम केवल बच्चे थे, धीरे-धीरे यह एक मामूली बात हो गई। यहां तक कि हमारे पार्टनर्स भी इस चक्रव्यूह में अक्सर फंस जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, महिलाएं सूचनाओं को अलग-अलग तरीके से प्राप्त और  संसाधित करतीं हैं। जबकि पुरुषों को तर्क और तथ्यों से अधिक प्रेरित किया जाता है, महिलाओं में आईक्यू अधिक होता है और वे सहज होती हैं। शायद यही जासूसी और शक की जड़ बन जाती है। निश्चित रूप से वैध कारण हो सकते हैं जैसे कि बेवफाई के पिछले इतिहास या कोई संदिग्ध व्यवहार। पर ज्यादातर प्यार करने वाले या साथ रहने वाले कभी-कभी जिज्ञासा या शक से प्रेरित होकर जासूसी करने की आवश्यकता महसूस करते हैं। जासूसी करने के तरीके, बहुत बेहतरीन से लेकर बेतुके भी हो सकते हैं। आइए उनमें से कुछ लोगों और उन लोगों के प्रकरणों पर एक नजर डालें, जिनके उपयोग की संभावना है।

मासूमियत का मैजिक

आप अपने जीवनसाथी से प्रेमपूर्वक व्यवहार कर बेहद आसानी से उनसे बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकतीं हैं। घरेलू मामलों की बातों में आकस्मित प्रश्नों को उलझाएं और आपको जो जानकारी चाहिए उसे बाहर निकालें। पुरुष आसानी से विचलित हो जाते हैं, इसलिए विषयों को बदलना मुश्किल ना होगा। केवल याद रखिए कि यहां उद्देश्य उनसे लगातार बातें करके उन्हें सुला देना नहीं है।

डिजिटल क्वीन

इस तरह की जासूस जेम्स बॉण्ड और ब्योमकेश बक्शी को शॄमदा कर देती हैं। जब साथी आस-पास ना हो या व्यस्त हो उसके फोन, आइपैड, लैपटॉप, इत्यादि उपकरणों पर लॉगइन करें। पासवर्ड जानना आसान होगा आपके लिए। जानकारी निकालिए और उपकरण बंद कर दीजिए।

बिल से बिल तक

यहां उपाय थोड़ा कठिन है तो पहले सुनिश्चित करें कि प्रयास वास्तव में इतनी मेहनत के लायक है या नहीं। क्रेडिट कॉर्ड बिल, फोन बिल और अदर्स बिल सब की जांच करें। आप ज्यादातर सामान्य खर्चों से अवगत होंगी। साधारण से बाहर कोई भी खर्चा आपकी आंखें निश्चित रूप से पकड़ लेंगी।

दोस्तों की दास्तां

एक आदमी अपने दोस्तों से जाना जाता है। दोस्त या साथ काम करने वालों के पास समय बिताने या नज़दीकी तौर पर काम करने की वजह से वो आपके बारे में काफी जानकारी रखते हैं। इसका तात्पर्य यह नहीं कि हम इतने सीधे-सीधे सवाल करें कि यह प्रतीत हो कि हमें अपने साथी पर भरोसा ही नहीं है। यह बातें थोड़े घुमावदार तरीके से करना अनिवार्य है।

यह बहुत फिल्मी है

इस तरीके में काफी जुगाड़ करना पड़ता है। आजकल कई छोटे कैमरा हैं जो पेन, पेनड्राइव, किचेन आदि में छुपा रहता है। यह सब चीजें लोग दैनिक आधार पर अपने साथ रखते हैं। इन्हें प्लग इन करें और पॉपकॉर्न खाते हुए देखें।

तु जहां-जहां चलेगा 

इन दिनों ट्रैकिंग के लिए बहुत सारे एप्लिकेशन उपलब्ध हैं। चुपके से अपने पार्टनर के फोन पर एक ट्रैकिंग एप डॉउनलोड करें। आइकॉन को किसी ऐसे फोल्डर में छिपा दें जो वह ज्यादा इस्तेमाल ना करते हों। यह बातें करने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि सावधान इंडिया की मैं कोई अपराधी मास्टरमाइंड हूं! लेकिन हंसी-मजाक अलग रखते हुए, कभी- कभी हल्की-फुल्की जिज्ञासा भी जुनून में बदल सकती है और संबंध बिगाड़ सकती है। बेशक, अपनी जिंदगी और पार्टनर के विषय में जागरूक होना महत्वपूर्ण है लेकिन जासूस बनने से पहले, अपने विवेक का प्रयोग करने में ही समझदारी है। क्योंकि कोई भी यह पसंद नहीं करेगा कि उनका पार्टनर उन पर शक करे। आपने एक कहावत सुनी होगी ‘रहिमन धागा प्रीत का मत तोड़ो चटकाय टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ पर जाए। ताका-झांकी करने से शायद आपकी जिज्ञासा शांत हो जाएगी पर इसके कारण आप किसी प्रिय का दिल दुखा सकतीं हैं। तो अगली बार करमचंद बनने का मन करे, दिमाग से काम लें, एक बेहतरीन थ्रिलर या जासूसी उपन्यास पढ़ें और अपने बेचारे पार्टनर का पीछा छोड़ दें।