सेक्स संबंधों को सामाजिक मान्यता की की ही नहीं बल्कि सही उम्र की भी जरूरत होती है। अगर अपने जीवन साथी के साथ परिपक्व उम्र में संबंध बनाए जाते हैं, तो यह दाम्पत्य जीवन में प्रगाढ़ता लाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में छोटी उम्र में बने सेक्स संबंध न सेहत की दृष्टि से ठीक होते हैं न ही समाज में स्वीकार्य। कम उम्र में बने सेक्स संबंध अक्सर जी का जंजाल बन जाते हैं, जिनसे छुटकारा पाने का कोई रास्ता नजर नहीं आता।

माधवी की शादी को पांच साल हो गये। विवाह के पहले साल से लेकर अब तक उसने मां बनने के लिए सारे उपाय आजमा लिये, लेकन वह मां नहीं बन पाई। डॉक्टर से कंसल्ट करने पर पता चला कि गलत तरीके से हुए एबॉर्शन ने उसे मातृत्व सुख से वंचित कर दिया। जब माधवी टेंथ क्लास में पढ़ रही थी, तभी उसका अपने ब्वॉय फ्रेंड के साथ उसके फिजिकल रिलेशन बन गए और जानकारी के अभाव में वह प्रेग्नेंट हो गई। घर वालों को पता चला तो उन्होंने माधवी का अबॉर्शन एक नर्स से करा दिया। बाद में माधवी की शादी हो गई। विवाह पूर्व संबंध की बात उसने पति को नहीं बताई लेकिन जब वह सारे प्रयासों के बावजूद वह प्रेग्नेंट नहीं हो पाई, तो उसे एहसास हुआ कि जानकारी के अभाव और अपरिपक्व सेक्स संबंध ने उसकी खुशियों को छीन लिया क्या व्हाट्सऐप या फेसबुक पर भेजी गई स्माईलीज जैसे कि ‘किस और ‘हग आपकी असल जिंदगी के प्यार की जगह ले सकती है?

आप मानें न मानें, लेकिन सेक्स एक्सपर्ट्स और व्यवहार विज्ञान के जानकार ऐसा मानने लगे हैं। उनके मुताबिक आज बहुत से भारतीय युवा स्मार्टफोन और टेबलेट्स पर ज्यादा वक्त बिताते हैं। यहां तक कि बाथरूम में भी वो फोन का प्रयोग करते हैं। नतीजतन, ये उनकी सेक्स लाइफ को पंगु बना रहा है। आज ‘डिजिटल इंटीमेट कनेक्शन युवाओं की सेक्स लाइफ को कमजोर और नीरस बना रहे हैं। 

सही उम्र में सेक्स
भारत में विवाह के लिए लड़के की उम्र इक्कीस साल और लड़की की उम्र अठारह साल निर्धारित की गई है। संबंधों में प्रगाढ़ता लाने और संतान प्राप्ति के लिए विवाह के पश्चात दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बनाते हैं। यह सच है कि संबंधों को पूर्णता प्रदान करने में सेक्स संबंधों का महत्वपूर्ण योगदान है। यह भी उतना ही सच है कि हैल्दी सेक्स संबंधों के लिए सही जानकारी और तरीके के साथ उम्र की परिपक्वता भी जरूरी है। कम उम्र में सेक्स संबंध बनाने से कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

ओहियो यूनिवर्सिटी में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि अगर सेक्स संबंध बनाते समय उम्र छोटी हो, तो इसका इम्यून सिस्टम और नर्वस सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि इस समय नर्वस सिस्टम विकसित हो रहा होता है। इतना ही नहीं, बहुत छोटी उम्र में सेक्स संबंध बनाने वाले लड़के बाद में डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। छोटी उम्र में सेक्स संबंधों में लिप्त होने वाली लड़कियां भावनात्मक तौर पर असुरक्षित रहती हैं।

 

 सोशल नेटवर्किंग साइट

सोशल नेटवॄकग साइट और इंटरनेट ने सेक्स को दबे-छिपे कमरे से निकलकर सबके लिए सुलभ बना दिया है। यही वजह है कि इंटरनेट के माध्यम से पोर्नसाइट्स पर जाकर युवा सेक्स से जुड़ी बातों को देखते हैं और अपने जीवन में एप्लाई करते हैं। अधकचरे सेक्स एक्सपोजर की वजह से टीनएजर्स गर्ल फ्रेंड और ब्वॉय फ्रेंड बनाकर सेक्स संबंधों को एन्जवॉय कर अपनी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं।

बदली है मान्यता
ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में सेक्स संबंधों को लेकर लोगों की मान्यता में बदलाव आया है। अब यह कतई जरूरी नहीं रह गया है कि आप विवाहित हैं तभी सेक्स संबंध इंज्वाय कर सकते हैं। आजकल लोग विवाह पूर्व भी सेक्स संबंधों का आनंद लेते हैं। लेकिन मान्यता बदलने का यह अर्थ कतई नहीं है कि छोटी उम्र में ही सेक्स संबध स्थापित हो जाएं। अगर पढऩे लिखने की उम्र में ध्यान सेक्स संबंधों की ओर लग जाए, तो न केवल पढ़ाई से नाता टूटता है वरन भविष्य में दाम्पत्य संबंधों की सहजता भी समाप्त होती है और न चाहते हुए भी पारिवारिक संबंधों में दरार पडऩे की आशंका बढ़ जाती है। सच तो यह है कि छोटी उम्र में बना यौन संबंध भविष्य पर नकारात्मक असर डालने वाला होता है।

यौन रोगों को निमंत्रण
कम उम्र में बने संबंधों में अपने साथी के प्रति किसी किस्म का कमिटमेंट नहीं होता है, जिसकी वजह से एक से ज्यादा पार्टनर्स के साथ संबंध बनते और बिगड़ते हैं। कई बार डर की वजह से भी न चाहते हुए भी किसी दूसरे के साथ संबंध बनाने की बाध्यता हो जाती है। अलग-अलग परिस्थितियों और जानकारी के अभाव में कम उम्र में ही किशोरों को यौन संक्रामक रोगों से जूझना पड़ता है। ऐसे में कई बार एड्स जैसे रोगों का भी सामना करना पड़ता है। जानकारी के अभाव में असुरक्षित यौन संबंध बनाने से भविष्य में अपने जीवन साथी के साथ सेक्स संबंध बनाते समय असहजता होती है और जीवनसाथी को पूर्व संबंधों का पता न चल जाए, इस भय के साथ असुरक्षित महसूस होता है। 

बच्चों को दें सेक्स की जानकारी
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉक्टर अतुल वर्मा का कहना है कि यह पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को सेक्स संबंधों का जानकारी दें, जिससे उन्हें गलत जानकारी न मिले। अपने घर के वातावरण को सहज बनाने के साथ-साथ बच्चे के साथ कम्युनिकेशन बनाए रखें। जैसे ही आपका बच्चा किशोरावस्था में पहुंचे, उसे सेक्स संबंधों के महत्व के बारे में बताएं साथ ही उसे जीवनसाथी के साथ कमिटमेंट के बारे में बताएं। जब आप उससे खुलकर बात करेंगे, तो आपका बच्चा अपने दोस्तों के साथ बैठकर इंटरनेट पर सेक्स संबंधित बातों की जानकारी एकत्रित नहीं करेगा। आपका ह्रश्वयार और दोस्ताना व्यवहार आपके बच्चे को छोटी उम्र में बनने वाले सेक्स संबंधों से दूर रखेगा।

कम उम्र सेक्स के खतरे
जब आप छोटी उम्र में किसी से सेक्स संबंध बनाते हैं, तो उस समय आप उस व्यक्ति से भावनात्मक तौर पर जुड़े नहीं होते हैं फिजिकल अट्रेक्शन की वजह से बनने वाले यौन संबंध बाद में आपको आत्मग्लानि से भर देते हैं, जिसकी वजह से आप भविष्य में अपने साथी के साथ सहज संबंध बनाने में खुद को असमर्थ पाते हैं।

अगर आपका किसी से सेक्स संबंध रहा है, तो आप अपने साथी पर भी विश्वास नहीं कर पाते हैं आपको हमेशा ऐसा लगता है कि जरूर आपके साथी का भी किसी के साथ फिजिकल रिलेशन रहा होगा।

अनचाही प्रेग्नेंसी के पश्चात आपने अबॉर्शन करवा लिया तो कई बार इसकी वजह से भविष्य में मां बनने की संभावना कम हो जाती है।

छोटी उम्र के संबंधों में समझदारी और कमिटमेंट का अभाव होने की वजह से एक से ज्यादा लोगों से संबंध हो जाते हैं इसकी वजह से आप भविष्य में भी अपने साथी के प्रति कमिटेड नहीं रह पाते हैं।

हमेशा खुद को भावनात्मक तौर पर असुरक्षित महसूस करते हैं, जिसकी वजह से अवसाद से ग्रसित होने की आशंका बढ़ जाती है।