10 साल का अभिनव हर बात पर चिढ़चिढ़ा हो जाता है। फिर चाहे खाना खाने को बोला जाए या फिर खेलने को या पढ़ने को। कई काम उसके फायदे के होते हैं तब भी वो नाराज हो रहा होता है। उसकी मां श्वेता समझ ही नहीं पा रही हैं कि दिक्कत कहां है। उनको लग रहा है कि उनसे ही कुछ गलती हो गई है। इसलिए अब वो भी बहुत स्ट्रेस महसूस करती हैं। आप भी श्वेता की तरह अपने बच्चे के चिढ़चिढ़ेपन को लेकर परेशान हैं तो अब न आप खुद परेशान हों और ना ही बच्चे को ही परेशान होने दें। व्यवहार से जुड़े कुछ बदलाव आपके बच्चे को सुधरने में पूरी मदद करेंगेiइनको आजमाइए और बच्चे को सुधारिए-

बच्चे का अच्छा व्यवहार- बच्चा जब भी चिढ़चिढ़ा होता है तो उसका खास मकसद दूसरों का ध्यान आकर्षित करना होता है। पर इस वक्त आपको बच्चे को बताना होगा कि आप अच्छे व्यवहार से आकर्षित होंगी ना कि बुरे व्यवहार से। ऐसे में जब भी बच्चा चिढ़चिढ़ेपन से इतर अच्छा व्यवहार करे तो उसे शाबाशी जरूर दें। जैसे आपके किसी से फोन पर बात करते हुए अगर उसने पीछे से शोर नहीं किया है या कोई दूसरी शैतानी नहीं की है तो उन्हें शाबाशी जरूर दें। उनसे कहें कि आप इसलिए उसे खूब पसंद करती हैं। इससे उनको ऐसे ही रहने की प्रेरणा मिलेगी वो चिढ़ाचिढ़ाएंगे नहीं।

कुछ बातें इग्नोर करें- आपको कुछ बातें इग्नोर भी करनी होंगी जैसे बच्चा अगर खाने के इंतजार में जल्दी करने को कह रहा है तो इसे कई बार इग्नोर किया जा सकता है। आप तुरंत उन्हें डांटने या समझाने न पहुंच जाएं। उसे अहसास होगा कि हर बार चिढ़चिढ़ाने से काम नहीं चलेगा। हर बार परिवार वाले ध्यान ही नहीं देंगे तो बात मानी भी कैसे जाएगी।

लेकिन दूसरे भी न सुनें- लेकिन इस दौरान ये ध्यान देना होगा कि अप जब इग्नोर कर रही हों तो दूसरे बच्चे की मदद करने ना पहुंच जाएं। या दूसरे उनके इन व्यवहार से न चिढ़ें। क्योंकि तब उन्हें आप से न सही किसी से तो अहमियत मिलेगी ही न। जैसे जिस वक्त वो गुस्सा हो रहे हैं और आप ध्यान नहीं दे रही हैं,ठीक उसी वक्त दूसरे लोग कानों पर हाथ लगाए बैठें हैं तो बच्चा अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा। अपने काम में सबको शामिल कीजिए,तब ही बात बनेगी।

इमोशन पहचानना जरूरी- बच्चे को ये पता होना चाहिए कि इमोशन को नाम देना जरूरी है। इमोशन छुपाए नहीं जाने चाहिए। लेकिन गुस्सा बोलकर दिखने और चिल्लाने में अंतर होता है। इसलिए चिल्लाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। चीजें फेंकना भी स्वीकार्य नहीं है। अगर किसी बात पर गुस्सा हो तो बताओ कि ये परेशानी है लेकिन इससे ज्यादा कुछ भी नहीं।

बच्चों को पता हो ये गलत है- जब बच्चा बहुत चिढ़चिढ़ा रहा हो ठीक उसी वक्त उसे टोकना भी जरूरी है। क्योंकि तब ही बच्चे को पता चलेगा कि वो गलत कर रहा है। ऐसा न करने पर वो हो सकता है मेहमानों के सामने ऐसे ही बिहेव करे और सोचे कि ये सिर्फ मनोरंजन के लिए है या वो गलत नहीं है और वो ये कर सकता है। इसमें कोई दिक्कत है ही नहीं।

पब्लिक में हों तब- जब आप पब्लिक में हों तब बच्चे को सबके सामने ये बात समझाने की जरूरत बिलकुल नहीं है। बल्कि आप बच्चे को लेकर थोड़ा अलग जाएं और उसे इस बात के लिए टोकें। उनको बताएं कि ये व्यवहार ठीक नहीं है। और आप उसे सबके सामने भी डांट सकती थीं लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। इसलिए उसे अपनी हरकत सुधारनी होगी और किसी भी परिस्थिति में अपना व्यवहार नहीं खराब करना होगा।

कोड तय करें- क्योंकि वो छोटा बच्चा है इसलिए उसके लिए हमेशा आपकी कही बात ध्यान रख पाना आसान नहीं होगा इसलिए आप एक कोड बना सकती हैं। जिसके साथ वो ठीक उसी वक्त अपना व्यवहार सुधार सके। जैसे आप ठीक इस वक्त उसे‘आई लव यू’कह सकती हैं। बच्चे को क्योंकि पहले से पता होगा इसका मतलब इसलिए वो तुरंत अपना व्यवहार सुधार लेगा। ये तरीका पब्लिक में आपके बहुत काम आएगा। बच्चा आपके ये शब्द बोलते ही समझेगा कि वो गलत है।

वार्निंग भी है जरूरी- जब बच्चा हद से बाहर हो जाएगा तो आपके लिए जरूरी है कि आप उसे वार्निंग दे दें। आप उसे समझा दें कि जब वो हद से ज्यादा चिढ़चिढ़ाएगा तो उसके मन का काम बिलकुल नहीं होगा। जैसे बच्चा खिलौने की दुकान में जिद कर रहा है। जिद भी इतनी कि वो जमीन पर लेटा जा रहा है। तो उसे सख्ती से कहें कि वो ऐसा करेगा तो आप उसे कुछ भी नहीं दिलाएंगी। खिलौने मिलेंगे जब वो अच्छे से बिहेव करेगा। चिढ़चिढ़ापन जरा भी एडजस्ट नहीं किया जाएगा।

 

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