मेरा 14 वर्षीय भतीजा कुछ समय अलग ही व्यवहार कर रहा है। कभी अचानक से खुश हो जाता है तो कभी बहुत चिड़चिड़ा जिसे समझ पाना बड़ा मुश्किल होता है। उसके पेरेंट्स उसके इस अचानक जवार में परिवर्तन से परेशान हैं अभी वह ब्रेकफास्ट के बाद ही लंच नहीं करता तो  कभी-कभी डिनर यह लंच पर अजीबो गरीब फरमाइश कर बैठता है। हद तो तब हो जाती है जब अचानक से छोटी सी बात पर भी वह जरूरत से ज्यादा गुस्सा कर बैठता है। कहा जाता है कि बच्चे दिल के साफ होते हैं लेकिन किशोर अवस्था में उनके व्यवहार उनके मूड में इस तरह के उतार-चढ़ाव देखने से अक्सर सभी माता-पिता परेशान रहते हैं और घर का माहौल भी तनावपूर्ण हो जाता है।

अगर थोड़ा बहुत व्यवहार में परिवर्तन है तो कोई चिंता की बात नहीं लेकिन यदि किशोर बच्चा आए दिन कुछ इस तरह से अप्रत्याशित व्यवहार करता है तो माता-पिता के लिए परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। किसी-किसी बच्चे में तो यह बदलाव बहुत अक्रामक और नकारात्मक होता है। बच्चे में मूड स्विंग और अचानक व्यवहार में बदलाव आने के कई कारण होते हैं।

अगर आपका बच्चा किशोरावस्था में हैं, तो उसके मूड स्विंग होने के मिजाज से आप काफी परिचित होंगे। अब सवाल ये उठता है कि, आप उनके इस मिजाज से निपटें कैसे। उम्र में जैसे जैसे बदलाव आता हैं, बच्चों में इमोशनली और मनोवैज्ञानिक ग्रोथ प्रभावित होती जाती है। लेकिन अगर आपने एक बार उनकी चाह को मनोस्थिति को समझ लिया तो आपके लिए हर चीज आसान हो जाएगी। आपको ये कैसे समझनी है, और जब आपके बच्चा इस स्थिति में आये तो उसे कैसे हैंडल करें, आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है। 

क्या है मूड स्विंग होने का कारण– उनके शरीर भी बदल रहे हैं और हार्मोन उनके मूड को प्रभावित करते हैं। शोध के अनुसार एक हार्मोन जो वयस्कों में एंजाइटी शांत करता है वह किशोरों में स्ट्रेस का कारण बनता है। मूड स्विंग्स वैसे तो किशोरावस्था में होने वाला एक संभावित बदलाव है। लेकिन यदि किशोरों में यह बदलाव जरूरत से ज्यादा है या बहुत ही आक्रामक और नकारात्मक है तो जरूर किसी चिकित्सक से सलाह लेने की जरूरत है। हालांकि यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं जिनसे आप अपने किशोरों को समझ सकते हैं।किशोरावस्था जीवन की वो सीढ़ी होती है, जिससे हर कोई गुजरता है। इस उम्र में आकर ना सिर्फ शारीरिक, मानसिक बल्कि यौन परिपक्वता भी शुरू हो जाती है। ये बदलाव नये होते हैं, समाज को देखने का नया नजरिया देते हैं। अपनी जैसी सोच ना पाकर बच्चे का मूड बिगड़ ना स्वभाविक है और यही बदलाव मूड स्विंग होने का कारण बनता है। 

शारीरिक बदलाव भी हैं कारण-किशोरावस्था के दौरान शरीर में काफी बदलाव आते हैं। बच्चों को शरीर में यौन लक्षण नजर आते हैं। जैसे लड़कों की आवाज बदलना, लड़कियों में पीरियड्स होना आदि। शोध के मुताबिक उम्र का ये ऐसा चरण होता है, जिसमें बच्चे खुद को खूबसूरत दिखाने पर जोर लगाते हैं। इस उम्र में अक्सर बच्चों के लिए उनकी शारीरिक बनावट ही सब कुछ हो जाती है।

भावनात्मक असुरक्षा– एक अन्य कारण जो अक्सर किशोर मिजाज को जन्म देता है वह है बढ़ता दबाव और तनाव जो समाज धीरे-धीरे लोगों पर डालता है जैसे वे बड़े होते हैं। कई मामलों में, विशेषज्ञों का सुझाव है कि किशोर भावनात्मक रूप से उन जिम्मेदारियों के लिए तैयार नहीं होते हैं जिनके साथ वे सामना करते हैं, और उन सभी हार्मोनल परिवर्तनों के साथ जो वे आमतौर पर काम नहीं करते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें अक्सर अपने पहले वास्तविक रोमांटिक रिश्तों का भ्रम हो जाता है, जिससे उनके जीवन में बहुत उथल-पुथल हो जाती है जिससे उन्हें पहले कभी नहीं निपटना पड़ता है।

संज्ञात्मक बदलाव भी मिजाज बदलने का कारण– बच्चों के लिए हर पहलू में विचार करना असल में उन चीजों के बारे में विकास करना है, जिनके बारे में वो अनुभव करते हैं। साथ ही उनका नजरिया भी बदलता है। जब भी वो किसी से तर्क करते हैं, तो उन्हें समाज को समझने में भी मदद मिलती है। जिससे उनका आगे रास्ता खुलता है।

व्यवहार में बदलाव– कोई भी बच्चा जब किशोरावस्था के पड़ाव में प्रवेश करता है, तो उसकी स्वतंत्रता की खोज भी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में आप एक व्यस्क की तरह सोचें, और उसे कुछ सीमाओं के अंदर रहने की छूट दें। कई बार किसी ना किसी बात पर बच्चों का मतभेद पैरेंट्स के साथ होता है, जिससे संघर्ष की स्थिति पनपने लगती है। 

कैसे करें मददशोधकर्ताओं के मुताबिक पेरेंटिंग एक ऐसा गुण है जिसकी मदद से पैरेंट्स अपने बच्चों के किशोरावस्था के दौरान बदल रहे मिजाज को शांति से दूर कर सकते हैं। ऐसे में आपको क्या कुछ करना पड़ सकता है चलिए वो भी जान लेते हैं।

  • आप बचपन से ही अपने बच्चों के साथ रिश्ते को मजबूत रखें। ताकि जैसे जैसे बच्चे किशोरावस्था की ओर बढ़े वो आपका सबसे अच्छा दोस्त भी बनकर उबरे। ताकि वो अपने दिल की बात आपसे कह सके।

  • उन्हें ज्यादा से ज्यादा प्यार दर्शाएं , और उन्हें ये भी बताएं कि वो आपके लिए कितने इम्पोर्टेंट हैं। ताकि समय के बदलाव और मूड स्विंग के चलते वो खुद को अकेला ना समझें।

  • किशोरावस्था के दौरान बच्चों की मनोस्थिति में काफी उतार चढ़ाव होता है। आप ऐसे में उनका सहारा बनें , उनकी उपलब्धियों को स्वीकार भी करें। और उनका बेहतर मार्गदर्शन करते हैं।

  • भावात्मक रूप से अपने बच्चों को सुरक्षित महसूस कराइए। उनके लिए सीमा निर्धारित कीजिये, ताकि उनके मिजाज में बदलाव आये।

  • बच्चों के लिए एक अच्छा उदाहरण सेट कीजिये। जिससे बच्चे के कौशल में विकास हो। आप बच्चों के साथ रह कर उनका मनोबल बढाइये। 

  • किशोरावस्था में अक्सर बच्चों को सम्मान की अहमियत समझ में आती है। इसी लिए वो भी चाहते हैं  कि, उन्हें भी उनके हक का सम्मान मिले। इसलिए अगर उन्हें सम्मान का अहसास दिलाया जाएगा, तो उनको बेहतर महसूस होगा।

बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं, उनका दिमाग का भी विकास होता जाता है। जब बच्चे किशोरावस्था में प्रवेश करते हैं, तो उनकी भावनाओं और जरूरतों के साथ आपको उनका जीवन को लेकर नजरिया समझने की भी जरूरत है। क्योंकि बच्चे पहले से काफी कुछ झेल रहे होते हैं, ऐसे में उनकामिजाज बदलना भी जायज है।

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