हम सब जानते हैं कि बढ़ते बच्चों को आत्मविश्वासी और अपने प्रति आश्वस्त व्यक्ति बनने में मदद देना कितना आवश्यक है। खासकर आज जब दुनिया में स्पर्धा इतनी बढ़ गई है। इतना ही नहीं इस बारे में हमें शुरुआत से ही प्रयास करना होगा ताकि वह इन कौशलों को पूरी तरह अपना सके। माता-पिता और शिक्षक के नाते हमें अपने बच्चों में आत्मविश्वास का स्तर बढ़ाने के लिए कुछ बातें हमेशा याद रखनी चाहिए-

माता-पिता की भागीदारी बढ़ाएं
बच्चे में आत्मविश्वास का स्तर ऊपर उठाने के लिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे के साथ रहें। उसके साथ अच्छा समय बिताएं और गतिविधियों में हिस्सा लें। इससे न सिर्फ आप बच्चे को बेहतर समझेंगे, बल्कि उसके नजरिए से बातों को देखने लगेंगे।

पक्का लगाव रखें
जिम्मेदार माता-पिता और शिक्षक के नाते हमें बच्चे के साथ सुरक्षित और पक्का रिश्ता पैदा करने के लिए प्रयास करने चाहिए। इससे बच्चे के साथ आपका संबंध गहरा होगा और बच्चा अधिक सुरक्षित और आश्वस्त महसूस करेगा।

बधाई देने में न हिचकें
याद रखें कि हमें बच्चे की मेहनत को हमेशा बढ़ावा देना है। वास्तविक परिणाम कुछ भी हो कोशिश की तारीफ होनी चाहिए ताकि बच्चा महसूस करे कि उसकी सराहना हुई है।

सीखने के अवसर दें
यह सच है कि हम अपने बच्चे को दुनिया के किसी भी खतरे से बचाकर रखना चाहते हैं, फिर भी जरूरी है कि बच्चे को हर स्थिति का सामना करना सीखने का मौका दिया जाए। इसलिए संकट में ढाल बनने के बजाय उन्हें सहारा देने के
लिए साथ रहें और ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए उन्हें स्वयं तैयार होने के मौके दें।

क्षमताओं पर भरोसा करें
माता-पिता और शिक्षक होने के नाते हमें बच्चे की क्षमताओं पर भरोसा करना चाहिए। बहुत अधिक आशावादी भी नहीं होना है और बच्चे को मनमर्जी करने की छूट भी नहीं देनी है। किंतु बच्चे को हार मानने से पहले अपनी दिलचस्पी
का काम करने की कोशिश करने का पर्याप्त मौका अवश्य दिया जाना चाहिए।

ठप्पा लगाने से बचें
बच्चे के व्यवहार पर छींटाकशी करने या उस पर कोई ठप्पा लगाने से बच्चे का आत्मविश्वास कमजोर होता है और वह अपनी ही नजरों में गिर जाता है।

किसी से तुलना न करें
बच्चे की तुलना भाई-बहनों, साथियों या अपने आप से करने का बच्चे की आत्मकुशलता पर बहुत विपरीत असर पड़ सकता है।

गुणों को बढ़ावा दें
हमेशा बच्चे की कमजोरियां गिनाने के बजाय उसके गुणों पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चे को अपनी रुचि और प्रतिभा के हिसाब से आगे बढऩे दें और उसकी मेहनत की तारीफ करने या बधाई देने में कंजूसी न करें।

व्यावहारिक रहें
बच्चों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि आगे की जिन्दगी में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। बहुत अधिक आशावादी होने से काम नहीं चलता क्योंकि उस स्थिति में हार को सह पाना और कठिन हो जाता है। अत: बच्चों को उन बातों और कारणों के असर को समझना सीखने में मदद देनी चाहिए जिन पर उनका वश नहीं है। उन्हें बड़ीबडी काल्पनिक उम्मीदों से बचाना चाहिए।

हार न मानें
मजबूत और आश्वस्त होने के लिए उन्हें हर असफलता या निराशा पर नाउम्मीद न होना सीखना पड़ेगा। उन्हें जोश रखना है और हार नहीं
माननी है।

असफल होने पर सहारा बनें
जीवन में हम सब को असफलता का सामना करना ही पड़ता है। ऐसे वक्त में बच्चे को सहारा देने के लिए हमारा मौजूद रहना जरूरी है।

रोल मॉडल बनें
आत्मविश्वास बच्चे को सिखाया नहीं जा सकता। बच्चों के मन पर हर बात की छाप बहुत जल्दी लगती है और वे अपने आसपास की घटनाओं को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अत: हम मातापिता और शिक्षकों को बच्चों के लिए रोल मॉडल यानि आदर्श बनना होगा।