बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है, वैसे वैसे उसके व्यवहार में बदलाव आता है। ये बदलाव सबसे ज्यादा माता पिता के लिए चुनौती बनते हैं। क्योंकि उन्हें खुद को इस बदलाव के साथ बदलना होता है और अपने पालन पोषण के तरीकों को भी बदलना होता है। जब बच्चे किशोर की ओर रुख करते हैं तो उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। इस उम्र में आकर बच्चों को माता पिता का हस्तक्षेप पसंद नहीं आता। आप उन्हें जिस चीज के लिए मना करेंगे वो आपके सामने नहीं तो पीठ पीछे, वो काम जरुर करेंगे, क्योंकि ऐसा करके उन्हें ख़ुशी मिलती है। अक्सर माता-पिता और किशोरों के बीच अक्सर खींचतान भी होती है। ऐसे में माता-पिता अपने किशोर बच्चों से कैसे व्यवहार करना चाहिए। साथ ही इस दौर पर सामने आ रही चुनौतियों से कैसे निपटा जाए, आज का हमारा ये लेख आपको यही बताएगा।

कैसे करें अलग व्यवहार– किशोर हमेशा स्वतंत्र रहना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि कोई भी उनको किसी काम के लिए रोके टोके। अगर आपका बच्चा भी 13 से 19 साल के बीच का है तो आपका बच्चा भी अपो इसके लिए परेशान कर सकता है। आपको इसमें आश्चर्यचकित होने की जरूरत नहीं है। बच्चों की बढ़ती उम्र में वो खुद को सेल्फ डिपेंड समझने लगते हैं और ऐसा जताते हैं जैसे उन्हें आपकी कोई जरूरत नहीं है। आइये जानते हैं, इस स्थिति में आपको और किन बातों का सामना करना पड़ सकता है।

  • किशोरावस्था का समय बच्चों के लिए कठिन हो सकता है। इसमें फिजिकल से लेकर इमोशनल और सोसाइटी की बहुत सी चीजों में बदलाव आता है। जो  कभी कभी पैरेंट्स के लिए भी कठिन समय हो सकता है।
  • किशोरावस्था के समय बच्चों का दिमाग खुले आसमान में उड़ने लगता है, वो नये दोस्तों और नये रिश्तों में बदलने चाहते हैं। ऐसे में बच्चा फैमिली में कम इंटरेस्ट भी दिखा सकता है।
  • बच्चा जब किशोरावस्था की उम्र में आता है तो वो प्राइवेसी की चाह रखने लगता है। वो ज्यादा से ज्यादा समय सोशल मीडिया में बिताने लगता है। पैरेंट्स के लिए समय चुनौती भरा हो सकता है, जब बच्चे अपना कमरा बंद कर अपनी प्राइवेसी को एन्जॉय करने लगते हैं।
  • बच्चों का ये व्यवहार करना आम है क्योंकि ये इस उम्र का हिस्सा होता है। आपको इस बात का ख्याल सबसे ज्यादा रखना होगा कि आपका बच्चा नशीली दवाओं का सेवन ना करना हो।

क्या हैं आम चुनौतियां– पैरेंट्स के लिए वो वक्त सबसे ज्यादा सम्वेदनशील होता है जब उन्हें अपने और अपने बच्चे की सोच के बीच संतुलन बनाना हो। यही समय होता है, जब बच्चे को सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। अधिकांश बच्चे अपनी लाइफ में स्वत्रन्त्र रहना चाहते हैं। वो आपसे अपनी बात को लेकर आपसे बहस कर सकते हैं। आपको खुद को इसके लिए तैयार रखना चाहिए। हालांकि ये आम बात है। बच्चे आपको उनके हिसाब से जीने पर भी जोर दे सकते हैं। उनका मूड कई बार बदल सकता है। वो आपसे बार-बार शिकायत कर सकते हैं। बच्चे अपनी किशोरावस्था में अक्सर झूठ बोल सकते हैं। वो सारे नियमी तोड़ सकते हैं। आपको इस वक्त बीएस अपना संयम बनाकर रखना होगा।

क्या करना सही?- आपका बच्चा अपनी किशोरावस्था में कदम रख रहा है तो आपको एक ओवरप्रोटेक्टिव पैरेंट्स की तरह बर्ताव रखना होगा। जिससे आप सारी चुनौतियों से निपट सकें। आपका बच्चा सही फैसला लेना सीखेगा। क्योंकि इस उम्र में बच्चों को सही सपोर्ट की जरूरत होती है। आपका बच्चा कैसा व्यवहार कर रहा है इससे सम्बंधित समस्याओं को रोकने के लिए कुछ रणनीति बना सकते हैं।

अपनी अपेक्षाएं साफ़ रखें-आप जब भी अपने बच्चों से अपेक्षाएं रखते हैं तो यही उम्मीद रखते हैं, कि वो आपकी सभी अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा। आप अपने बच्चों से स्पष्ट कर दें कि आपको उनसे क्या उम्मीदें हैं। आप उनसे ये उम्मीद रखते हैं कि वो अच्छा प्रदर्शन करेंग।

सख्त नियम बनाएं– बच्चों के दिल में आपके प्रति इस बात का डर होना जरूरी है कि वो आपके बनाए हुए नियमों को तोड़ेंगे तो उन्हें सख्त सजा मिलेगी। आप भी इस बात का ख्याल रखें कि आपकी बनाई हुई सख्ती के प्रति आप भी सचेत रहें। बच्चों को उनके विशेषाधिकार का इस्तेमाल तभी करने दें जब वो आपकी बनाई हुई रूपरेखा में खरे उतरे।

ज्यादा शक्ति ना बरतें– आपका बच्चा अक्सर आपसे किसी भी काम को तुरंत करने की बात को बाद में करने पर टाल सकता है। आप उसे किसी भी काम को करने के लिए प्रलोभन ना करें। आप सख्त जरुर रहें लेकिन हर बात में सख्ती बच्चों के मन में कहीं न कहीं बगावत की भावना जन्म को जन्म देने लगती है।

समय बिताना जरूरी– पैरेंट्स और बच्चों के बीच का रिश्ता एक मजबूत नींव पर टीका होता है। आप अपने बच्चों के किशोरावस्था के समय उसके साथ पूरा समय बिताएं। उनके साथ खेलें और हैप्पी टाइम स्पेंड करें। आप उसके लिए एक रोल मॉडल बने। ताकि आपका बच्चा आपसे आगे चलकर कुछ भी ना छिपाए और एक दोस्त की तरह बर्ताव करे।

बच्चों में बदलाव उनकी बदलती उम्र के साथ होता है। इस बीच पैरेंट्स के सामने भी कई तरह की चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। जिससे निपटना मुश्किल नहीं है। आपका बच्चा भी किशोरावस्था से गुजर रहा है तो हमारा ये लेख आपकी जरुर मदद करेगा।

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