इन दिनों यह बहुत आम हो चुकी है कि मॉडर्न अपार्टमेंट में सीमित जगह होती है। पूजा रूम जैसी कोई जगह नहीं बनाई जाती है। ऐसे में अगर आप अपने घर में पूजा के लिए कोई अलग से जगह बनाना चाहते हैं, तो आपको समझ नहीं आता है कि कौन सी जगह इसके लिए ठीक होगी। इसलिए हम आपके लिए इस आर्टिकल में पूजा की जगह बनाने के उन तरीकों पर बात करेंगे, जो वास्तु के अनुसार भी सही माने जाते हैं।

ईशान कोण और इसका महत्व

 

ईशान कोण यानी उत्तर- पूर्व दिशा को पॉजिटिव एनर्जी का मुख्य स्रोत माना जाता है। पृथ्वी की काल्पनिक उत्तर- दक्षिण धुरी सूरज के लंबवत नहीं है और असल उत्तर से लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। पृथ्वी का झुकाव उत्तर पूर्व दिशा से कॉस्मिक एनर्जी (ब्रह्मांडीय ऊर्जा) को खींचता है। ईशान कोण से ये एनर्जी दक्षिण पश्चिमी दिशा में प्रवाहित होती है। यह मुख्य वैज्ञानिक कारण है कि हम ईशान कोण को शुभ कार्यों के लिए सही मानते हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

 

कम्पैक्ट फ्लैट में हर कमरे के लिए पहले से फिक्स जगह होती है। इसमें अलग से पूजा रूम के लिए जगह नहीं बनाई जाती है। लेकिन हमारे पास इसके लिए समाधान है।वास्तु विशेषज्ञ डॉ रश्मि जैन कहती हैं, ”पूजा करने के लिए आप कोई भी ऐसी जगह चुन सकते हैं, जो शांत हो। आप किसी छोटे अपार्टमेंट में भी ऐसी जगह चुनकर वहां पूजा कर सकते हैं। अगर संभव हो तो, हमेशा उत्तर- पूर्व, पूर्व या उत्तर की ओर चेहरा करके पूजा करें।”

पवित्र चिन्ह

 

अपने ड्रॉइंग रूम में कोई पवित्र चिंह टांग लें और उसके सामने प्रार्थना करें। यह मकान मालिक के लिए बहुत पवित्र माना जाता है। उसे अपने बिजनेस सर्कल में समृद्धि और विभिन्न ट्रान्जैक्शन से लाभ प्राप्त होते हैं।

तुलसी का पौधा

 

अपनी बालकनी में या मुख्य द्वार के किसी भी ओर तुलसी का पौधा लगाएं और रोजाना सुबह में प्रार्थना करते हुए तुलसी को जल चढ़ाएं।

पानी है जरूरी

 

आप अपने घर में किसी टेराकोटा पोत में पानी भर कर रखें। इसमें तुलसी की पत्तियां और फूलों की पंखुड़ियां डालकर रखें। बढ़िया परिणाम के लिए इस पानी और फूलों को रोजाना बदलते रहें। रोजाना सुबह- सुबह सूरज को जल चढ़ाएं। यह आत्म- विश्वास बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा है।

भगवान शिव

 

अगर संभव हो, तो अपने घर की उत्तर- पूर्व दिशा में योगिक मुद्रा में भगवान शिव की पेंटिंग या कोई फोटो टांग कर रखें।

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