कलावा यानि की मौली का हिन्दू धर्म में बहुत महत्त्व है| कोई भी पूजा पाठ बिना कलावे के अधूरा ही माना जाता है किसी भी धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत कलावे को कलाई पर बांधकर ही की जाती है|

कलाई में बांधा गया कलावा संकट और भय के समय रक्षा कवच बन जाता है तभी तो कलावे को रक्षा सूत्र भी कहते है इसलिए सनातन धर्म ये मानता है की जब भी कोई धार्मिक काम किसी विशेष उदेश्यों व मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाता है तो उस काम की सफलता के लिए ही रक्षा सूत्र बांधा जाता है क्योंकि कलावे के सूती धागे में भगवान साक्षात् निवास करते है जो उस काम को सफल बनाते है कलावे प्रायः दो तरह के होते है तिरंगी और पचरंगी| तिरंगी कलावा ब्रह्मा, विष्णु, .महेश का रूप माना जाता है यानि इन तीन रंगों लाल, पीले, हरे में इन तीनो देवता का वास और शक्ति होती है जो की इस तिरंगी कलावे को बांधने से मिल जाती है साथ ही पचरंगी कलावे के पांच रंगों लाल, पीले, हरे, सफ़ेद, नीले रंगों में ब्रह्मा, विष्णु, महेश के अलावा सरस्वती और काली देवी की शक्ति मानी जाती हैं इसको पंचदेव कहा जाता हैं साथ ही आप अपने ग्रहों के हिसाब से भी कलावा पहन सकते है|

मंगल और सूर्य ग्रह को मजबूती देने के लिए कलाई पर लाल या नारंगी कलावा बांधें| चन्द्रमा और शुक्र की शांति के लिए सफ़ेद रंग का कलावा बांधें| गुरु ग्रह की शांति के लिए पीले रंग का कलावा बांधें बुधवार ग्रह शांति के लिए हरे रंग का कलावा बांधें व शनि, राहू, केतु ग्रह की शांति के लिए नीला, काला, भूरा, स्लेटी रंग का धागा बांधें जब भी कलाई पर आप कोई भी कलावा बांधें तो शुक्ल पक्ष के किसी भी सोमवार को सुबह बांधें अगर आपको ग्रह शांति के हिसाब से धागे बांधने हो तो आप उस ग्रह के वार को ही बांधें|

हिन्दू धर्मकांड के अनुसार पुरुष व कुवारी कन्या या महिला अपने सीधे हाथ में और शादीशुदा महिलाएं अपने उल्टे हाथ में कलावा बांधें तो इसकी शुभता व ताकत बड़ती है इतना ही नहीं बईखातों, बच्चों की किताबों, तिजोरी, चाबी के गुच्छों, घर, आफिस, दुकान के दरवाजों पर भी कलावा बांधने से लाभ मिलता है| विज्ञान भी मानता है की कलाई पर बांधा गया धागा हमारे शरीर की रक्षा करता है साथ ही अनेक रोगों जैसे की शुगर, दिल के रोगों, उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, मिर्गी, मानसिक तनाव व गर्भाशय के रोगों से भी बचाव करता है| ये ही कारण था कि वैध लोग आज भी कलाई, हाथ , कमर, अगूठे पर सूती धागा बांधने के लिए कहते है अपने मरीजों को और इससे फायदा भी होता है रोगी को क्योंकि इस से शरीर की नसे दबती है जो शरीर को निरोगी रखने में मदद करती है और दवा जल्दी असर करती है|

कलावे बांधने से जुड़े कुछ नियम जो की इस प्रकार से है जिनको पालन करने से ही कलावे को बांधने का पूरा लाभ मिलता है अन्यथा नहीं|

कलावा कलाई पर तीन बार लपेटा जाता है अगर आप किसे देवी देवता या ग्रह के लिए बांध रहे है तो उन देवी और देवता व ग्रह के मंत्र को बोलते हुए कलावा बांधें तो तुरंत ही लाभ होगा| कलावे को बांधते ही इंसान खुद को सुरक्षित और शक्तिशाली महसूस करता हैं जिससे उसका मन शांत रहता है और वो सही दिशा में चलता है|

कलावा अगर किसी पुरोहित के जरिये बांधा जाये तो ज्यादा असर करता हैं क्योंकि वो मंत्र बोलते हुए शुद्ध तरह से बांधता है अगर आप खुद बांध रहे है तो उस कलावे को घर के मंदिर में रख कर बांधें तो सही होगा|

कलावा को हर अमावस्या पर उतारकर अगले दिन नया बांधने से सुरक्षा ज्यादा रहती है अगर ऐसा संभव ना हो तो सूतक व ग्रहण काल के बाद जरुर कलावा बदल ले क्योंकि सूतक और चंद्रग्रहण  सूर्यग्रहण के बाद कलावा अशुद्ध हो जाता है और अपनी शक्ति खो देता है| कलावा उतारने के बाद कभी भी गन्दी जगह पर ना डाले उसको किसी साफ़ नदी में प्रवाहित कर दे या मंदिर में पीपल के नीचे रख दे| कलावा हमेशा सूती धागे का ही प्रयोग करे नायिलोंन के धागे का नहीं|

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