ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एकादश भाव में ब्रहस्पति का या चंद्रमा का शुभ स्थिति में होना, आपकी मनोकामनाओं का शीघ्र और शत प्रतिशत पूर्ति का संकेत देता है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखे कि इस भाव में ग्रह तभी मनोकामना पूर्ण करते हैं जब वे एकादश की नीच राशि में हो।

मनोकामनाओं का पूर्ण होना हमारे चाहने भर पर निर्भर नहीं करता इसके लिए कुंडली में ग्रहों की सही दिशा का होना भी आवश्यक है।

  • यदि एकादश ब्रहस्पति आपकी प्रश्न कुंडली में शुभ होकर स्थापित हो जाते हैं तो आपकी मनोकामना जरूर पूरी होगी।
  • कुंडली में लग्नेश का शुभ स्थिति में होना मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जरूरी है।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आपकी कुंडली का एकादश भाव आपकी मनोकामना के लिए बहुत अहम है। उसमें स्थित सभी ग्रहों का अच्छी स्थिति में होना आपकी इच्छा को पूर्ण करने में लाभदायक होता है।

सूर्य- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर आपकी कुंडली के एकादश भाव में सूर्य उपस्थित है तो आपकी सरकार और सरकारी तंत्रों से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

चंद्रमा- चंद्रमा के एकादश भाव में उपस्थित होने का अर्थ है कि आपकी समाज से जुड़ी सारी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

मंगल- अगर आपकी कुंडली के इस भाव में मंगल है तो आपकी किसी पद और सम्मान को पाने की मनोकामना पूर्ण होगी।

बुध- बुध ग्रह के एकादश भाव में होने का अर्थ है कि इससे आपको आपके मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, साथ ही आपकी सारी मनोकामनाएं जल्दी ही पूरी होगी और आपको स्त्री पक्ष से भी लाभ मिलेगा। 

शुक्र- कुंडली के एकादश भाव में शुक्र के शुभ होने से आपकी हर मनोकामनाएं पूर्ण होती है और आपके हर कार्य में आपको सफलता प्राप्त होती है, साथ ही शुक्र के इस ग्रह में होने से आपको महिला अधिकारी से भी लाभ मिलता है।

शनि- एकादश भाव में शनि की शुभ स्थिति में होने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं किन्तु आपको अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कड़ी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।

राहू- अगर आपकी राजनीति से संबंधित कोई मनोकामना है तो उसके लिए आपकी कुंडली के एकादश भाव में राहू का शुभ स्थिति में होना बहुत जरूरी है तभी आपकी इस मनोकामना की पूर्ति होती है।

केतु- आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए आप अपनी कुंडली के एकादश भाव में केतु को शुभ स्थिति में लाने का प्रयास करो। आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।

उपाय

  • प्रत्येक बुधवार हरे रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
  • प्रात:काल स्नान के पश्चात् पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाकर यदि सच्चे मन से सफलता की प्रार्थना की जाए तो शीघ्र ही हर मनोकामना पूरी होगी।
  • शुद्ध तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर प्रतिदिन यदि तुलसी का पौधा सींचा जाए व ऊं सूर्याय नम: का सात बार मंत्र जप करते हुए सूर्य का जल का अर्घ्य दिया जाए तो मन की सभी इच्छाएं शीघ्र ही पूरी होंगी।
  • इसके अलावा आप सुबह पूजा के समय एक बेल पत्र ले और उस पर सफेद चंदन से तिलक कर दें। उसके बाद आप अपनी मनोकामना को बोलकर उसे शिवलिंग पर अर्पित कर दें। आपकी मनोकामना जल्द ही पूर्ण होगी।
  • बरगद के पत्ते पर अपनी मनोकामना लिखते  हुए, यदि उसे बहते हुए जल में छोड़ दिया जाये तो मनोकामना पूर्ण  होती है।
  • यदि कोई जातक नीलम या कटैला शुक्लपक्ष के शनिवार अथवा शनि पुष्य योग में मध्यमा अंगुली में धारण करें शीघ्र ही उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती दिखाई देगी।
  • यदि व्यक्ति सदैव सदाचरण के मार्ग का अनुसरण करें तो स्वयं ईश्वर उसकी  मनोकामना पूर्ति करने की अभिलाषा रखते हैं।
  • यदि शुक्लपक्ष के शनिवार को एक बांसुरी में चीनी भरकर किसी एकांत स्थान में दबा दी जाए तो जातक की आजीविका  मनोकामना भी शीघ्र ही पूरी हो जायेगी।
  • अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आपको रोज सुबह जल्दी स्नान करके तुलसी के पौधे को जल चढ़ाना चाहिए साथ ही आपको तुलसी के सामने गाय के घी का दीपक  जलाना चाहिए। 
  • आप रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में श्वेत आक की जड़ को ले आये, फिर आप उस जड़ से श्री गणेश की प्रतिमा बनाएं और उन्हें खीर का भोग लगाये। जब आप इस प्रतिमा की पूजा करें तो आप पूजा में कनेर और चन्दन के फूलों को सम्मिलित करें। उसके बाद आप ऊं गं नम: मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आप एक नया लाल सूती कपड़ा लें और उसमें आप एक जटावाला नारियल बांध दें। उसके बाद आप उसे किसी नदी में प्रवाहित कर दें। आपकी मनोकामना जल्द ही पूर्ण होगी। 

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