सुहाग का प्रतीक होती है काँच की चूड़ियाँ। चूड़ियाँ नारी की ख़ूबसूरती को जहाँ चार चाँद लगा देती हैं, वही वो उसके पति की आयु को भी लम्बी करती हैं। उसके सोभगाय को भी बढाती हैं। प्राचीन काल से चूड़ियों को हर सुहागन नारी के लिए ज़रूरी माना गया है, यू तो कुँआरी कन्या भी चूड़ी पहन सकती है पर उसके लिए चूड़ी से जुड़े हुए कोई नियम नहीं होते है। वो कभी भी चूड़ी पहन या उतार सकती है।पर किसी भी लड़की की शादी हो जाते ही उसके चूड़ी से जुड़े नियम भी बदल जाते हैं| ये लेख एक छोटा सा प्रयास हैं| चूड़ी से जुडी कुछ जरुरी बातों को बताने का जो होंगी आपके लिए लाभदायक |

नयी चूडियाँ पहनने के नियम|

  • सबसे पहले तो जब आप चूडियाँ पहनने जा रही हो तो उस दिन का दिन देख ले| सोमवार, बुधवार, शुक्रवार चूड़ी पहनने के लिए बहुत ही शुभ दिन माने जाते है, शनिवार, मंगलवार को चूड़ी पहनने के लिए भारी दिन मानते है, रविवार और गुरूवार चूड़ी पहनने के लिये अशुभ दिन माना जाता है| अमावस्या व पित्र पक्ष में भूल कर भी नयी चूड़ी न ख़रीदे न ही उनको पहने क्योंकि ये बहुत ही अशुभ माना गया है| ये दिन विचार प्रायः नयी चूडियों पर लागू होता है| पुरानी चूडियों को अगर आप दोबारा पहन रही है तो आप उनको कभी भी किसी भी दिन पहन सकते है एक बात और भी याद रखने की होती है हर सुहागन को की वो चूड़िया बदलते और नयी चूड़िया पहनते वक़्त समय का ख्याल रखे | चूड़ी नयी हो पुरानी कभी भी सुबह होते ही या या फिर रात को ना बदले न ही नयी पहने, चूड़िया पहनने का सही समय होता है दोपहर का समय और जरुरत अनुसार आप शाम को भी बदल सकते है पर गोधुली की बेला से पहले पहले यानि जब रात और दिन मिल रहे होते है उससे पहले| कई बार जब कई ऐसे त्यौहार जैसे करवा चौथ, बड मावस, हरियाली तीज या दुल्हन को चूड़ी उस दिन ही पहनने होते है, जिस दिन ये होते है तब उस समय अगर निषेध दिनों में से कोई दिन पड़ जाता है तो उसके लिए उसको चाहिए की वो चूडियों को पहले से किसी अच्छे दिन सही समय में उनको कुछ देर पहन कर रख ले और फिर उतार कर रख दे इस से अगर वो निषेध वाले दिन भी अगर पहनती है तो उसको कोई दोष नहीं लगता है, पर समस्या तब आती है जबकि दिन भी गलत है और उस दिन ही चूड़िया पहननी होती है और वो भी नई तबी क्या करे तो इस के लिए उपाय है की आप अपनी चूडियों को माता पार्वती जी के कुछ देर चरणों में रख दे और फिर उनसे कहे की हे माँ इन चूडियों पर अपना आशीर्वाद बनाये और उसके बाद उनको वहा से उठा ले और पहन ले|ऐसा करने से वो माता पार्वती जी का प्रसाद बन जाएगी और इस से निषेध दिन का दोष भी कट जायेगा |

चूड़िया उतारते समय नियम |

जैसे चूडियों को पहनने के कुछ नियम बताये गए है वैसे ही उनको उतारते या बदलते समय भी दिन और समय का विचार किया जाता है जिनको मानना भी जरुरी होता है ये भी लगभग वैसा ही है मंगलवार, शनिवार, रविवार, गुरूवार, अमावस्या और पित्र पक्ष में चूड़िया उतारी या बदली नहीं जाती है| अगर कोई विशेष ही वजह है तो माता पार्वती या फिर अपने इस्ट भगवान का जो भी हो आपके धर्म अनुसार उनका स्मरण करके ही चूड़ी उतारे या बदले तो इससे दोष नहीं लगता है |

अब बताते आपको है चूडियो से जुड़े कुछ ऐसे नियम जिनको नहीं मानने पर होती हैं वैवाहिक जीवन में हानि जो न केवल पति और पत्नी के आपसी रिश्तों को खराब करती है, साथ ही कई बार तो उनको तलाक के मोड़ पर भी लाकर खड़ा कर देती है, जहां पहुच कर रिश्ता तोड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प ही नहीं रह जाता फिर दोनों के पास और कई बार अगर रिश्ता नहीं टूटता तो फिर पति की सेहत बिगड़ने लगती है या पति की आयु पर गलत प्रभाव भी पड़ता देखा गया है|

तो ये है वो बातें जो अनेक बार एक सुहागन नारी से भूलवश या खुद को आधुनिक दिखाने या किसी से बहस लगाने की कारण या बहुत बार तो इन गलतियों के कुप्रभाव ही पता न होने के कारण हो जाती है| पर कारण चाहे कोई भी हो जब गलती होगी तो सजा भी मिलती ही है तो जाने उन गलतियों को और तुरंत ही दूर भी कर दे, ये है वो गलतिया जो देती हैं घातक परीणाम|

  • अपनी पहनी हुई चूड़ी किसी को भी पहनने को न दे चाहे वो आपकी सास, माँ, बहन, भाभी, सहेली ही क्यों ना हो एक बेटी भी अपनी माँ की चूड़ी तब तक ही पहन सकती है जब तक की वो कुआरी है जैसे ही उसकी शादी हो जाती है उसके बाद बेटी को भी अपनी चूड़ी पहनने को ना दे| ये नियम इसी तरह से आप पर भी लागू होता है| आप भी अपनी किसी परिचित की चूड़ी ना पहने एक गलती महिलाएं अक्सर कर देती है वो ये है की वो अपनी चूडियों को कई बार ये सोचकर की इनसे मन भर गया वो अपने घर काम करने वाली बाई को दी देती है,की चलो गरीब है बेचारी नई चूड़िया नहीं ले सकती तो इसके काम आ जाएगी पर आपकी ये सोच न उसका भला करेगी और न ही आपका इस लिए इन बातों को तुरंत ही रोक दे| ऐसा ना करने के पीछे यहीं कारण हमारे शास्त्रों में बताया गया है की चूड़ी किसी भी सुहागन के सुहाग का प्रतीक मानी जाती है| जब कोई लडकी शादी के समय सुहाग चुडा पहनती है, तब से ही उसकी चूडियों पर हमेशा के लिए उसके पति का नाम लिख जाता है, जो उन दोनोँ के रिश्तों को पति और पत्नी का नाम देता है| तो इस प्रकार ये बात सिद्ध हो जाती है की चूड़िया किसी सुहागन के सुहाग की निशानी होने के कारण एक अहम् चीज होती है पर जब आप गलती से या जानकर अपनी चूडियों को किसी दूसरे को पहनने को देते है तो दूसरे अर्थो में आप अपने पति को ही दूसरे को दे रहे होते हैं| तो ये एक तरह से आप अपने सोभाग्य को खुद ही कम करने का काम कर देती है| विद्वान लोगो और बड़े बुजुगों का तो यहाँ तक कहना है की इस कारण से जो दोष उत्पन्न होता है, वो दोष ही  एक श्राप बनकर कई बार पति पत्नी के तलाक और अलगाव या दरार का कारण भी बन जाता है| पुराणों में भी अपने सुहाग की चीजों को इसी कारण से देने के लिए बहुत सख्ती से मना किया गया है उसमे तो ऐसा करना एक पाप ही कहा गया है तो अगर आप भी ऐसा कर रही है तो ऐसा न करे कोई आपका अपना भी अगर ऐसी गलती कर रहा हो तो उसको भी ऐसा करने से रोके|
  • एक अहम् गलती अक्सर होती है कि महिलाएं अक्सर चूड़ी के चटक जाने पर उसको कहती है की चूड़ी टूट गई जबकि हमारे शास्त्रों में भी लिखा है की किसी भी सुहागन नारी को अपनी चूड़ी के चटक जाने पर उसको टूटना नहीं कहना चाहिए बल्कि ये कहना चाहिए की चूड़ी मौल गई या चूड़ी चटक गई चाहे वो उसकी चूड़ी हो या किसी दूसरे की चूड़ी क्योंकि चूड़ी के लिए टूटना शब्द का प्रयोग अशुभ माना गया है, एक सुहागन नारी के लिए, तो इस बात को हमेशा ही ख्याल रखे बोलते समय|
  • चूड़ी अगर मौल जाती है तो उस चूड़ी को महिलाएं अकसर यू ही इधर उधर डाल देती हैं, विशेष कर कूड़ेदान में, ये तो सही है की आप उसको मोल जाने पर वहीं डालेगे पर उसका भी एक नियम यानि एक तरीका भी बताया गया है, हमारे हिन्दू दर्शन में यानि जब अगर आपको अपनी मोली हुई चूड़ी फैकनी हैं तो उस चूड़ी को आप फैकने से पहले अपने हाथों में लेकर तीन बार चूमे फिर चूमने के बाद ही उसको ऐसी जगह पर डाले जहां पर आपका साफ़ कूड़ा डलता हो, चूड़ी को चूमने के पीछे चूमने का एक ही कारण होता है की चूड़ी किसी भी नारी का सुहाग का प्रतीक होता है उसको सम्मान देने से नारी के पति की आयु और उसका मान समाज में बढता है साथ ही दोनों का वैवाहिक जीवन में मधुरता और विश्वास की बढोतरी भी होती है, इस लिए जब भी चटकी चूड़ी फैके तो उसको चूमकर ही फैके तो आपके और आपके पति के लिए शुभ होगा |
  • दोनों हाथों में चूड़ी कभी भी बराबर नहीं पहनी जाती | बाएँ हाथ में दायीं हाथ से एक-दो चूड़ी ज्यादा ही पहने तो शुभ माना जाता है| इस बड़ी हुई चूड़ी को आशीष की चूड़ी भी कहा जाता हैं| चूड़ी खरीदते समय भी चूड़ी वाले से आशीष की चूड़ी लेना कभी न भूले| पहले सब चूड़ी वाले दो चूड़ी आशीष की देते थे, हर डब्बे के साथ पर अब ऐसा गावों में चलन है पर शहरों में बंद हो गया है, क्योकि अब प्रायः बारह चूडियों के सेट मिलते है जिसके कारण सेट बिगड़ जाने की बात बोलकर वो दो चूड़ी के अलग से पैसे माँगते हैं तो आप पैसे देकर ही सही पर आशीष की चूड़ी जरुर ले उनसे क्योकि चूडिया हमेशा बारह या फिर चोबीस ही लिया करे यही शुभ संख्या मानी जाती है|तो इसबात का ख्याल रखे |
  • काली, नीली, ग्रे, सफ़ेद रंग की चूडियाँ ना ले तो अच्छा होगा आपके लिये क्योंकि ये शुभ रंग नहीं माने जाते एक सुहागन के लिए इसकी जगह अगर आप लाल, गुलाबी, पीला, हरा, नारंगी, महरून रंग लेगे तो अच्छा होता है किसी भी नारी के लिए क्योकि ये शुभ रंग माने जाते है जो की नारी के सोभाग्य में बढ़ोतरी करते है और पति और पत्नी की आयु को बढ़ाते है साथ ही उनके वैवाहिक जीवन को राहू, केतु, शनि ग्रह के घातक प्रभाव से बचाते है, साथ ही जीवन में शुभता को बढ़ाते है| इस लिए चूड़िया हमेशा शुभ रंगों की ही पहने और दूसरो को भी शुभ रंगों की ही चूड़िया उपहार में दे|पर आज जमाना बदल गया हैं| आज महिलाएं अपने कपड़ो को मैच करती हुई चूड़िया पहनना अधिक पसंद करती है, फिर चाहे कपडें काल, नीले, ग्रे, भूरे ही क्यों न हो ऐसे रंगों की चूडियों को पहनकर वो अनजाने में अपने वैवाहिक जीवन पर शनि, राहू, केतु ग्रहों के घातक प्रभाव को बढ़ा लेती है जिसको वो जान भी नहीं पाती इस लिए चूडियों की चयन में ऐसे रंगों का चयन ना करे तो अच्छा ही होगा पर आज की ज़माने के अनुसार अगर आप पहन भी रही है तो ऐसे रंगों को कभी अकेले न पहने इनके साथ में अगर आप एक लाल, पीली चूड़ी लगा लेगी तो इनका कुप्रभाव खत्म तो नहीं पर कम जरुर हो जायेगा तो ऐसा जरुर करे| किसी भी कुआरी कन्या पर नीली, काली, भूरी, ग्रे रंग की चूड़ी पहनने का दोष तो नहीं लगता परन्तु उस कन्या के ऊपर शनि, राहू, केतु ग्रहों का कुप्रभाव कही न कही जरुर पड़ेगा ये भी सही ही हैं| इस लिए कुआरी कन्या भी अगर ऐसे अशुभ रंगों ली चूडियों को पहनने से बचे तो अच्चा ही होगा उसके क्युकी सुहागन नारी हो या कुआरी कन्या हर एक के लिए जरुरी है की वो शुभ ग्रहों को मजबूत करे न की अशुभ ग्रहों को|
  • किसी भी सुहागन महिला को चाहिए के वो प्लास्टिक की चूड़ी ना पहने हमेशा कॉच, लाख, पोत चूड़ी ही पहने सोने और चादी की चूड़ी कभी भी अकेले न पहने उसके साथ एक चूड़ी कॉच, लाख, पोत की जरुर लगा ले या फिर चूडियों में अन्दर की तरफ लाख भरवा ले तब उनको अकेले पहन ले तो दोष नहीं लगता| कुआरी कन्या अगर प्लास्टिक की चूड़िया पहनती है तो उसको कोई दोष नहीं लगता है, साथ ही वो अगर चादी और सोने की चूड़िया अकेले भी पहनती है तो भी उसको कोई दोष नहीं लगेगा|
  • चूडियों के लिए विद्वान लोग ये भी कहते है की चूडियों को कोई सुहागिन नारी दूसरी सुहागनों को तीज और त्योहारो पर जितना अधिक उपहार में देती है उसका वैवाहिक जीवन उतना ही अधिक खुशहाली से भरता जाता है साथ ही उसके पति की आयु को भी बढाता है तो अपनी यथासकती सुहागनों को चूड़िया दे उपहार में शुभ रगों की|

तो ये कुछ बातें थी चूडियों से जुडी हुई कि चूडियों को किस तरह से पहना और रखा जाये ताकि वो किसी भी सुहागन नारी के सोभाग्य और उसके वैवाहिक जीवन को लम्बी उम्र दे और उसमे खुशहाली, विश्वास को भी बढाये |                                    

        

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