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कसम क्या होती है जो तोड़ी ना जाये, बात बात में कसम उठानी अच्छी बात नहीं है कसम हैं इतनी पाक चीज कोई इतना पाक नहीं हैं, सही तो कहा हैं विद्वानों ने की कसम बहुत ही पाक होती है, हर धर्म के लोगों के लिए इस का बहुत ही महत्त्व होता है| भारत में तो प्राचीन काल से ही कसम को लोग देते आ रहे हैं, एक दूसरे को माता यशोदा और भगवान कृष्ण की कसमे तो दुनिया भर के लोगों के लिए मिसाल हैं की कैसे बालक कृष्ण अपने को निर्दोष साबित करने के लिए कसम खाया करते थे और माता यशोदा अपने पुत्र कृष्ण को अपनी कसम देकर उनसे ज्यादा शैतानी न करने के लिए अपनी कसम देती है|

  • कसम का प्रयोग प्राचीन भारत में प्रायः एक दूसरे के प्रति प्यार और चिंता प्रकट करने के लिए ही किया जाता था पर समय ने करवट बदली कसम का प्रयोग भी प्रायः औब बदल गया|
  • नवीन भारत में कोर्ट में गवाही के समय गवाह को भगवत गीता की कसम दिलाये जाती थी कि आप गीता पर हाथ रखकर कसम खाए की जो भी कहेगे सच कहेगे और सच के सिवा कुछ नहीं कहेंगे और गवाह भी कसम खाता और उसको निभाता भी था इतना ही नहीं प्रायः कोर्ट में गवाही के वक़्त गवाह के धर्म के अनुसार उसके पवित्र ग्रंथो की कसमे देने की प्रथा थी इसके पीछे यही कारण था की कोई भी इंसान अपने पवित्र ग्रंथो की कसम खाकर कुछ झूठ नहीं बोलगा, मुग़लों ने हिन्दुओं के लिए इस तरह के नियम बनाये थे जो अब तक मान्य है यदपि अब कोर्ट में काफी जगह धार्मिक ग्रंथो के कसमें बंद करा दी गयी है|

भारत में कसमें देना और खाना आज भी लोगों में प्रचलित है लोंगो आज भी खुद को निर्दोष व दूसरो को गलत साबित करने के लिए अक्सर कसमों का सहारा लेते है| भारतीय समाज में आज भी कुछ कसमें इस प्रकार से है जैसे

  • बच्चों, पति, पत्नी, माता, पिता या किसी खास रिश्ते की कसम देना या लेना जैसे तुम्हेँ तुम्हारें बच्चों की कसम है सही बोलो या मैं अपनी माँ की कसम खाता हूँ की मैं सही बोल रहा हूँ ये वो मानदंड है कसमों के जो प्रायः शहर और गाव सब जगह ही लोग प्रयोग करते है|
  • गंगाजल की कसम, रोजी रोटी की कसम, अपने धर्म से जुड़े भगवानों की कसम भी अक्सर लोग खाते और देते है|

कसम खाने की पीछे कारण – कसम खाने की पीछे प्रमुख कारण अपनी सत्यता को दूसरों को समजाना और दूसरों की सच्चाई को जानना ही होता है|

झूठी कसम खाने के प्रभाव – कसम को सब धर्मो में बहुत      
पवित्र माना गया है ये कोई मजाक का विषय नहीं है परन्तु इसके बावजूद भी लोग झूठी कसम खा लेते है जबकि वो ये नहीं जानते की इस के बहुत ही गलत प्रभाव होते हैं जानें कैसे और किन पर|

  • गर्गसंहिता व विष्णु पुराण में लिखा है की झूठी कसम खाने या कसम तोड़ देने से जिसने कसम खायी हैं और जिसकी खायी गईं है उन दोनों को ही हानि होती हैं जाने कैसे व किसको कितनी|
  • जो कसम तोड़ता हैं या किसी की झूठी कसम खाता है तो  उसके सम्मान में आने वाले दिनों में कमी आती है साथ ही लोगों का विश्वास भी वो इन्सान खो देता हैं|
  • जिस इंसान की कसम खायी जाती है, या झूठी कसम खायी जाती या कसम को तोड़ दिया जाता हैं जानकर तब कई बार ऐसा भी देखा गया है की उस इंसान के स्वास्थ्य व आयु की हानि तो होती ही है साथ ही कई बार वो बहुत ही ज्यादा बीमार भी हो जाता है, तो कसम को तोड़ना या झूठी कसम खाना दोनों ही तरह से जिसकी कसम खायी गयी है उसको ही हानि का सामना करना पड़ता है, ये प्रभाव उस इंसान के ग्रहों के हिसाब से पड़ता है अगर उस इंसान के गृह निर्बल होगे या उसके ऊपर शनि, राहू, केतु की महादशा चल रही होगी तब उस पर इसका तुरंत और गलत असर होगा पर अगर शनि, राहू, केतु की दशा नहीं चल रही है साथ ही उसकी कुंडली में बाकि ग्रह उच्च के हैं तो उस पर थोड़े दिन बाद और कम असर पड़ेगा, पर सार यही है कसम एक पवित्र चीज हैं तो इसका कभी भी दुरपयोग करके अपने सम्मान व अपनों के जीवन को खतरे में न डाले |

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