googlenews
कुलदेवता बाघ-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Tiger Story
Kuldevta Baagh

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Tiger Story: एक बार एक आदमी जंगल में फल-फूल बीनने गया। काम करते-करते उसे जोरों की प्यास लगी। खोजने पर उसे एक पुराना कुआं दिखाई दिया। कुएँ के अंदर से पानी निकालने की कोशिश में वह फिसलकर कुएँ के अंदर गिर पड़ा। बहुत कोशिश करने पर भी वह बाहर नहीं निकल सका। उसने खूब आवाज लगाई पर जंगल में कौन सुनता। धीरे-धीरे दिन ढला रात हुई। मरता क्या न करता, वह ईश्वर से यही मांगता रहा कि कोई उसे निकाल ले। एक-एक दिन करते-करते एक सप्ताह बीत गया पर किसी ने उसकी सुध न ली।

उसी जंगल में एक बाघ रहता था। उस दिन शिकार की तलाश में बाघ कुएँ के निकट से गुजरा। पानी पीने की इच्छा से बाघ ने कएँ में झाँका। वहाँ उसे वह व्यक्ति दिखाई दिया। आज तो मजा आ गया। खाना और पानी दोनों एक साथ मिल गए उसने कहा। बाघ की बात सुन उस व्यक्ति के होश उड़ गए। वह सोचने लगा बाघ को कैसे रोकू? उसे एक उपाय सूझा। उसने कराहना शुरू कर दिया। बाघ ने पूछा की वह कराह क्यों रहा है तो उसने उत्तर दिया कि कुएँ में बड़े-बड़े केंकड़े हैं जो उसे डंक मार रहे हैं। काश कोई और कुएँ में आ जाता तो उसकी जान बच जाती। उसकी बात सुनकर बाघ घबराया। उसने कहा मुझे बहुत प्यास लगी है।

उस व्यक्ति ने बाघ से कहा की वह एक मटका रस्सी में बाँधकर लटका दे तो वह पानी भर देगा। बाघ मटका खींच कर अपनी प्यास बुझा सकता है। बाघ को यह सलाह ठीक लगी। इस तरह से उसे कुँए में न उतरना पड़ता, न केंकड़े काट पाते। बाघ जल्दी से रस्सी और मटका ले आया। बाघ ने रस्सी से बाँधकर मटका लटकाया तो उस आदमी ने पानी भर दिया। बाघ ने मटका ऊपर खींच कर अपनी प्यास बुझा ली और जाने लगा। अब उस आदमी ने बाघ से कहा की वह एक बार और रस्सी लटकाकर उसे भी बाहर खींच ले।

बाघ ने सोचा कि अगर इसे निकालूँगा तो इसके साथ केंकड़े भी निकल आएँगे और मुझे काटेंगे। इसलिए बाघ ने मना करते हुए कहा कि वह मनुष्यों से डरता है, मनुष्य जानवरों का शिकार करते हैं। तब उस आदमी ने ईश्वर की शपथ लेकर कहा कि वह और उसके वंशज बाघ को अपना कुल देवता मानेंगे और फल-फूल से अपना पेट भरेंगे। बहुत मजबूरी होने पर पेट भरने के अलावा किसी जानवर को नहीं मारेंगे। यह सुनकर बाघ की शंका मिटा गई। उसने कुएँ में रस्सी लटका दी जिसे पकड़कर वह आदमी बाहर आ गया।

तब से कुरुख जाति के लोग बाघ को कुलदेवता मानकर पूजने लगे।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

Leave a comment