googlenews
कथा-कहानी

उसकी तैयारी देख बड़ी भाभी अक्सर चुटकी लेती।

‘‘ऐसा न हो कुमुद की इसी मंडप में कोई तुम्हें भी ब्याह कर ले जाए।”

शादी के दिन तो दुल्हन से ज्यादा कुमुद ही मंच से लेकर मंडप तक छायी हुई थी। रंग-रूप ही नहीं अपने आकर्षक व्यक्तित्व और आधुनिक ढंग के मैचिंग कपड़े गहने उसके व्यक्तित्व को एक अल ही आयाम दे रहे थे। वह अपनी छह- सात सहेलियों और बहनों के साथ मिलकर घर के बड़ों के हर काम में मदद तो कर रही थी। बारात लगने के बाद वर पक्ष से आये मनचलों को भीं चुन-चुन कर सुनाने और चुहलबाजी करने का भी मोर्चा संभाले हुए थी। बीच-बीच में ढोल के थाप पर चल रहे नाच-गाने में भी शामिल हो रही थी। परम्परागत सिद्धांतों को मानने और उस पर चलने वाले उसके परिवार में बस शादी-ब्याह के मौके पर ही लड़कियाें को थोड़ी आजादी मिलती थी, जिसका सब लड़कियां भरपूर फायदा उठा रही थी।

इन सब के बीच वर पक्ष का एक दुबला-पतला काफी लम्बे कद का सांवला सा साधारण चेहरे मोहरे वाले लड़के की आॅंखें लगातार कुमुद का पीछा कर रही थी जिसे भांपने में उसकी छोटी बहन काव्या को ज्यादा देर नहीं लगी। लेकिन उसपर कुमुद का ध्यान अभी तक नहीं गया था। ‘‘दी… अपने ध्यान दिया, एक जिराफ जैसे लम्बे कद और लम्बे गर्दन वाले लड़के की नजर आप पर ही लगी हुई है। ”।

कुमुद बिना कोई विशेष ध्यान दिये बोली ‘‘देखने दे-देखने दे, बेचारा लड़कियां को ही तो देखने आया है। मौका मिलेगा तो ऐसा सुनाउंगी कि उसकी बोलती बंद हो जायेगी”।

जल्द ही कुुमुद को मौका भी मिल गया जब उसके होने वाले जीजाजी, मंयक जी ने पत्नी को पहचानने वाली रस्म में करूणा के बदले घूॅंघट में छिपी कुमुद पर अपना रूमाल डाल दिया।

उनकी इस गलती पर लड़कियां वर की सजा तय करने लगी। क्या करवाया जाए इनसे, कोई गाना गाने के लिए बोला जाए, या डांस करने का न्योता दिया जाय या फिर किसी की नकल करवाई जाय। तभी वह जिराफ जैसा लड़का आगे बढ़कर बोला- ‘‘मेरे भैया हारे नहीं हैं, जो आप सब सजा तय करने में जुट गई है। उन्होंने तो अपने लिये करुणा भाभी को पहले से ही पसन्द किया हुआ है, अभी तो उन्होंने मेरे लिये लड़की पसन्द की है। आप लोग बस उससे मेरी शादी करा दो।”

उसका इतना बोलना था कि लड़कियाें की भीड़ की तरफ से जुमले उछलने लगे । ‘‘मान-न-मान मैं तेरा मेहमान,” ये मॅुह मंसूर की दाल”

‘‘लंगूर के गले में मोतियों की माला”

‘‘जा गंगा में मुंह धोकर आ ”कुमुद भी कहां कम थी, भीड़ को चीरते आगे बढ़ते हुए बोली।  ‘‘वाह-वाह कौए के मुॅंह में अंगूर”।

लेकिन बोलते-बोलते सामने खड़े लड़के पर नजर पड़ते ही उसकी बोलती बन्द हो गई। वह अपनी अंतरंग सहेली क्षमा, शालिनी और शिवप्रिया की ओर मुड़ी। उन तीनों की भी स्थिति कमोबेश कुमुद जैसी ही थी। देखते-देखते चारों मैदान छोड़कर रफूचक्कर हो गई। उन सब के लिये तो शादी का सारा मजा ही किरकिरा हो गया। बाहर उन लोगों के नाम का शोर मच रहा था और वे चारों एक कमरे में बैठी सोच रही थी कि क्या करें? उन्हें क्या पता था यह लम्बू जिसका नामकरण काव्या ने जिराफ कर दिया था, उनके घर तक आ धमकेगा और उसकी रिश्तेदारी भी वर पक्ष से निकल आएगी। एक डर इन्हें बार-बार सहमा रहा था। कहीं ऐसा न हो कि उन लोगों को पहचानने के बाद, अपने घरवालों को उस दिन की सारी बातें बता दें। यह सोचकर ही चारों के हाथ-पैर ठंडे होने लगे।

चरों उस दिन को कोस रही थी, जब उनकी मुलाकात इस ‘‘जिराफ” से हुई थी। सिर्फ दो महीने पहले की बात थी। मुकुद, शालिनी, शिवप्रिया और क्षमा चारों सहेलियाॅं काॅलेज में अपना प्रेक्टिकल समाप्त कर बाहर निकली तो दिन के एक बज रहे थे। उस दिन प्रचंड गर्मी थी। पूरा सड़क सुनसान पड़ा था। चारों किसी सवारी की तलाश में एक इमली के घने दरख्त के नीचे खड़ी थी। वहां से थोड़ी ही दूर पर दो ठेले पर गर्मियों के कुछ फल बिक रहे थे।

तभी एक बड़ी से गाड़ी ठेला के पास आकर रुकी। एक लम्बे कद का आदमी उसमें से उतर कर कुछ खरीदने लगा। क्षमा के खुराफाती दिमाग में तुरंत लिफ्ट मांगने का आइडिया आ गया। लेकिन उस छोटे से कस्बेनुमा शहर में लिफ्ट मांगना और देना दोनों ही रूढ़िवादी परिवार की लड़कियों के लिए आसान नहीं था। अगर कोई परिचित उन्हें इस तरह लिफ्ट लेते देख लेता तो चारों परेशानी में पड़ सकती थी। उनकी बातों से क्षमा तुनक पड़ी।

‘‘तुम लोग भी गजब लड़कियां हो। इस तेज गर्मी में भला कौन हमें लिफ्ट लेते देखेगा। मोड़़ तक भी ये हमें छोड़ देगा तो वहां से हमें आसानी से रिक्शा मिल जाएगा। उसकी सारी बातें ठीक थी फिर भी एक अनजानी आशंका से कुमुद का मन घबरा रहा था। कुमुद को नर्वस देख कर क्षमा धीमे से बोली।

‘‘क्यों नर्वस हो रही हो। कौन-सा हमारा जानपहचान वाला या रिश्तेदार है। शक्ल से जरूरत से कुछ ज्यादा ही शरीफ नजर आता है। वैसे भी अगर जनाब ने जरा सा भी छह-पांच करने की कोशिश की तो मेरा जुडो-कराटे सीखना किस दिन काम आयेगा।

अपनी बात समाप्त कर क्षमा बड़ी अदा से लिफ्ट लेने के लिये उस लम्बू को इशारा कर दिया। उसे अपने आप को सुपर वुमन और सब से ज्यादा आधुनिक जो साबित करना था। न चाहते हुए भी उन लोगों के साथ कुमुद को भी कार में बैठना ही पड़ा। कुछ दूर जाने पर वह पूछा-‘‘आप लोगों ने बताया नहीं कि आप लोगों को जाना कहा तक है?

‘‘जाना तो हमें हनुमान नगर के मोड़ तक है पर आप अपनी सुविधा अनुसार हमें कहीं भी उतार सकते हैं।

रास्ते में आइसक्रीम की दुकान पर नज़र पड़ते ही क्षमा यथासम्भव अपनी आवाज में माधुर्य घोलते हुए बोली-

‘‘सुनिये..मेरी एक सहेली को गर्मी से चक्कर आ रहा है, क्या आप हम लोगों के लिये आइसक्रीम ला देंगे। उसका इशारा कुमुद की तरफ था। बोलने के साथ ही वह अपना पर्स टटोलने लगी, पर वह पैसा लेने के लिये रूका नहीं उतरकर आइसक्रीम लाने चला गया। थोड़ी ही देर में चारों के लिये आइसक्रीम ले आया। क्षमा आईसक्रीम लेते हुए बोली कितने पैसे हुए।

‘‘रहने दीजिये, पैसे मैने दे दिये हैं।

‘‘थैक यू… पर यह ठीक नहीं है, पैसे तो आपको लेने ही होंगे। ‘‘क्षमा के दो बार बोलने पर भी उसने पैसे नहीं लिये। वह चुपचाप गाड़ी चलाता उनलोगों के बताएं स्थान पर उन सबको उतार कर चला गया। क्षमा उन तीनों की तरफ गर्व से देख हुए बोली-

‘‘ इतनी गर्मी में हम सब इतने आराम से घर तक पहुंच ही नहीं गये, मुफ्त की आइसक्रीम भी खाई, फिर भी मुझे दाद देने के बदले तुम तीनों मुंह लटकाए क्यों खड़ी हो।

वे सभी अपने अपने घर की तरफ चल तो दिये लेकिन एक अनजाना भय और अपराध बोध से मन बेचैन था। आज के आधुनिक युग में लिफ्ट लेना कोई बड़ी बात नहीं है। पर कस्बेनुमा शहर के लिये यह एक अपराध ही था। कई दिनों तक कुमुद का सशंकित मन, छोटी -छोटी बातों पर भी चौंक उठता। समय के साथ वह इस घटना को पूरी तरी भूल गई थी। आज एक बार फिर वह परेशान हो उठी थी।

तभी क्षमा पूरे जोश से उठी, चलो सब मंडप में। यहाॅं बैठ कर शादी का मजा किरकिरा मत करो। जो होगा उसका सामना किया जाएगा। जहां तक मैं सोचती हूं, वह वैसा कुछ भी नहीं करेगा जिसकी हमें आशंका है। क्षमा के पहल करने पर चारों सहेलियों का डर गायब हो गया और वे सब मिलकर धमाल करने लगी। वैसे भी उस जिराफ के चेहरे से जरा भी नहीं लग रहा था कि उसे उस दिन की घटना याद भी है। काव्या ने उसका नाम ऐसा जिराफ रखा कि इसी नाम से लड़कियों के बीच मशहूर हो गया। वह भी बरातियों के तरफ से मोर्चा संभाले हुए था।

शादी के बाद जब करुणा पगफेेरे के लिये लौटकर आई, कुमुद उनसे उस जिराफ का परिचय जानने के लिये बेहाल थी, लेकिन शादी के फोटो में उसे देखकर वह इतना ही बता पाई कि वह उनके देवर का दोस्त था और बिहार प्रशासनिक सेवा में कार्यरत था, पर चाह कर भी उसका नाम उन्हें याद नहीं आ रहा था।

कुमुद ने भी यह सोचकर राहत की सांस ली कि नाम में क्या रखा है वह ‘‘जिराफ” उन लोगों का रिश्तेदार नहीं था, इतना ही काफी था। वरना हर समय सर पर तलवार लटकती रहती। कुछ ही दिनों बाद ही वह सब भूल-भाल कर पढ़ाई में जुट गई थी। जल्द ही उसे मेहनत का फल मिला एमएससी में उसे काफी अच्छे नम्बर मिले। फिर सिलसिला शुरू हुआ नौकरी के लिए तरह-तरह की परीक्षाओं में शामिल होने का। एक बार फिर सफलता ने उसके दरवाजे पर दस्तक दी। उसका बीपीएससी की परीक्षा में चयन हो गया। नौकरी ज्वाइन करते ही उसकी ट्रेनिगं शुरू हो गई जिसके क्रम में उसे अक्सर एक शहर से दूसरे शहर जाना पड़ता।

एक बार उसका ट्रांसफर गया शहर में हो गया। हमेशा मां उसके साथ जाकर रहने की अच्छी व्यवस्था करके ही वापस आती थी। लेकिन उन दिनों एक तो मां की तबियत खराब थी, उस पर दीदी भी जीजाजी और बच्चों के साथ आई हुई थी। जैेसे ही जीजाजी को उसके ट्रांसफर के विषय में मालूम हुआ, उन्होंने गया में रहने वाले किसी परिचित को फोन कर बतौर पेईंग गेस्ट उसके रहने का सारा इन्तजाम करवा दिया, और उसे वहां का पता और फोन नम्बर थमाते हुए बोले, ‘‘ ये लोग मेरे परिवार की तरह हैं, तुम जाओ तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी।

वहां पहुंचने पर उसकी मुलाकात जिन दो लोगों से हुई, उसमें एक घर के मालिक मुकुन्द बिहारी थे और दूसरी उनकी पत्नी उर्मिला देवी। उनकी बेटी की शादी हो गई थी और बेटा शहर में ही कहीं गया हुआ था। उन लोगों ने उसका स्वागत अपने परिवार के सदस्य की तरह किया और उसके रहने और खाने -पीने की सारी व्यवस्था पहले से ही करवा दी।

दूसरे दिन उसे अपने आॅफिस में रिपोर्ट करना था। वह तैयार होकर समय पर आॅफिस पहुंच गई। किसी विपुल बिहारी को उसे रिपोर्ट करना था। जैसे ही वह उनके केबिन में पहुंची, सामने के सीट पर बैठे व्यक्ति को देखकर ऐसे चौंकी मानो अचानक ही उसके सामने फन उठाए कोई सांप आ गया हो। उसके सामने वहीं जाना-पहचाना व्यक्ति बैठा था, जिसे कभी उन लोगों ने जिराफ” नाम दिया था। उसे इस तरह चौंकते देखकर वह मुस्कराते हुए बोला ‘‘आइये… मिस कुमुद सिन्हा, आपका इस आॅफिस में स्वागत है। मेरे साथ ही आपको ट्रेनिंग लेनी है।

अब तक वह भी थोड़ा सम्भल गई थी, कुर्सी खींच कर उसके सामने बैठते हुए बोली ‘‘कोई नृप होय हमें का हानी।”

कुमुद के बोलने के साथ ही दोनों हॅंस पड़े। तभी वहां एक अर्दली एक ट्रे रख गया। ट्रे से निकाल कर एक आइसक्रीम का कप उसकी तरफ बढ़ाते हुए विपुल बोला ‘‘आज बहुत गर्मी थी, कहीं आपको चक्कर न आ जाए इसलिये मैंने पहले से ही आपके लिये आइसक्रीम मंगवा रखी थी। ”

अब तक कुमुद का संकोच पूरी तरह दूर हो गया था, वह इत्मीनान से आइसक्रीम खाने में जुट गई। फिर काम की दूसरी बातें होने लगी। दोपहर में दोनों ने साथ-साथ लंच किया। शाम को जब कुमुद घर लौटने के लिये उठी, विपुल भी साथ उठते हुए बोला ‘‘चलिये आपको आपके घर तक छोड़ दूं।”

कुमुद उसके साथ हो ली। देखते ही देखते कुमुद द्वारा बताए गए आधे-अधूरे पते से ही उसने उसे उसके ठिकाने तक पहुंचा दिया। कुमुद से विदा लेने के बदले उसके साथ पीछे-पीछे ड्रूाईंगरूम तक आकर सोफे पर बैठ गया। तभी उर्मिला देवी भी वहां आ गई। उन्हें देखते ही बोली- ‘‘तुम दोनों आ गये। मैं अभी चाय भिजवाती हूं।”

एक बार फिर चौंकने की बारी कुमुद की ही थी । उनके हाव भाव से कुमुद को समझते देर नहीं लगी कि विपुल ही इन लोगों का बेटा है। वह धीरे से बोली ‘‘अपने पहले क्यों नहीं बताया कि यह आपका घर है।”

‘‘फिर इतना अच्छा सरप्राइज आपको कैसे मिलता।”

दूसरे दिन दोनों साथ ही आॅफिस के लिये निकले, रास्ते में कुमुद बोली- आप लोग मेरा इतना ख्याल रख रहे हैं मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आप लोगों को कैसे धन्यवाद दूं।”

‘‘बस आप इतना कीजिए कि मेरी शादी करवा दीजिए।”

‘‘ये कैसी मांग है, शादी के लिए कोई लड़की भी तो होनी चाहिए, किससे आपकी शादी करवा दूं। कुमुद अकबका कर बोली।

‘‘खुद ही कर लो ना” विपुल के इस तरह से प्यार का इजहार करने से कुमुद के दिल में जल तरंग सा बज उठा और मुस्कराते हुए उसने अपनी नजरें झुका ली। 

दो महीने बाद ही कुमुद क्षमा को फोन कर अपनी शादी में आने का न्योता देते हुए बोली, तुमने जिराफ से ऐसी लिफ्ट ली कि उसने मुझे ही अपने जीवन में फिट कर लिया।

यह भी पढ़ें –मुंशी प्रेमचंद की ‘प्रेरणा’

-आपको यह कहानी कैसी लगी? अपनी प्रतिक्रियाएं जरुर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही आप अपनी कहानियां भी हमें ई-मेल कर सकते हैं-Editor@grehlakshmi.com

-डायमंड पॉकेट बुक्स की अन्य रोचक कहानियों और प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाओं को खरीदने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-https://bit.ly/39Vn1ji