अनाड़ी जी, आजकल की नारी और पहले की नारी में क्या फर्क है?
सलोनी शर्मा, चंडीगढ़
नारी में कोई खास $फर्क नहीं है,
$फर्क पुरुष में आया है कि
अब उसके पास
अपनी श्रेष्ठता दिखाने का
कोई तर्क नहीं है।
तुम कमाते हो तो
मैं भी कमाती हूं,
मेहनत करती हूं
घर चलाती हूं।
पुरुषों से मिलती हूं
स्वच्छंद खिलखिलाती हूं,
करवा-चौथ के साथ
फ्रेंडशिप डे भी मनाती हूं।

अनाड़ी जी, आप प्यार और पैसे में किसे ज्यादा महत्व देते हैं? क्योंकि आज पैसों की $खातिर हत्या, लूट, रिश्तों में दरार और भावनाएं टूटने की कगार पर घिनौनी वारदातें समाज-परिवार में बहुत हो रही है।

प्रीति कुमारी, रांची (झारखंड)

प्यार के आगे पैसा क्या है,
मगर देख लो कैसा क्या है!
जिसे तुम प्यार समझते हो
कहीं वह वासना में सना
व्यभिचार तो नहीं,
तुम्हारी ज्यादा उम्मीदों में
अत्याचार तो नहीं!
प्यार और पैसे में कौन कब बड़ा है
ये हमें हमारी अंतश्चेतनाएं बताती हैं,
और वारदातें कभी कहकर नहीं आती हैं।
जिसको हम करते हैं प्यार,
उसके दो दुश्मन हैं
एक पैसा दूसरा अहंकार।

क्यों दुनियां में इतने $गम हैं? क्यों अपने सुख लगते कम हैं?
प्रो. बी.के. सिंह, रीवा (म.प्र.)
सुख दुख के गहरे नाते हैं
ज्यादा सुख, दुख बन जाते हैं,
हरते हैं पीर पराई जो
वे वैष्णव जन कहलाते हैं।
तेरा $गम, यदि मेरा $गम है
ऐसा $गम! ना सुख से कम है।
$गम न करो, बस गमन करो जी
जीवन सुख दुख का संगम है।