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अगर हरिवंशराय बच्चन जी ‘मधुशाला’ आज लिखते, तो ये चार छंद उसमें अवश्य होते

मदिरालय के द्वार पड़ा है आज कोरोना का ताला। रो धो जैसे तैसे सबने सवा माह का दिन टाला।। जाने किसने पाप किये जिसका मदिरा को दंड मिला, तरस रहे हैं पीने वाले, सिसक रही है मधुशाला॥ दो हफ्ते का लॉक पीरियड फिर से आगे कर डाला। भूल गए सब किसने किसके साथ कहां और […]