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गृहलक्ष्मी की कहानियां - मुझे पता नहीं था कि तुम इसके हो..
Stories of Grihalaxmi

गृहलक्ष्मी की कहानियां – कुछ दिनों पहले मैं अपनी दीदी के यहां गई हुई थी। एक दिन शाम को जीजाजी अपने एक मित्र राज को साथ लेकर घर आए, दीदी बाहर गई हुई थी। मैंने किचन में जाकर उन दोनों के लिए चाय बनाई। वे दोनों जिस कमरे में बैठ कर चाय पी रहे थे, उसी कमरे में दीदी की सास धुले हुए कपड़ों की तह लगा रही थी। मेरा और दीदी का सूट एक जैसा ही था, मेरे सूट पर ‘राज टेलर्स का लेबल लगा हुआ था। दीदी की सास ने मुझसे पूछा, ‘बेटा, जिस पर राज का लेबल लगा हुआ है, वह सूट किसका है। मेरे मुंह से जल्दी में निकल पड़ा, ‘अरे राज तो मेरा है।

मेरी बात सुन कर जीजाजी हंसते हुए अपने मित्र से बोले, ‘अरे यार ‘राज मेरी साली ठीक कह रही है क्या? मुझे तो पता ही नहीं था कि तुम इसके हो। उनका इतना कहना था कि कमरे में जोरदार ठहाका गूंज उठा। मुझे मेरी कही बात का अर्थ समझ में आया तो मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और मैं भाग कर दूसरे कमरे में चली गई।

 

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