मेघन नाम था उस लडकी को एक ऐसी लडकी जो बात बेबात मुस्कुराती थी ।छोटी छोटी बात पर कहकहे लगाती थी।पापा की परी तो मम्मा की राजदुलारी थी।सब कुछ बहुत अच्छा था उसकी जिन्दगी में और वो डाक्टर बनना चाहती थी। उसका ख्बाब था कि सीपीएमटी की परीक्षा पास कर पाएं

किस्मत की तो तेज थी ही दिमाग भी किसी से कम ना था ।रिजल्ट आया और साथ में पैगाम लाया कि मनपंसद कॉलेज मिल जायेगा ।
बस अब तो रात दिन इन्तजार था लखनऊ जाकर के जी एम सी की जमीन को चूमने का पर उसकी जिन्दगी में हुआ एक हादसा उसके इस इन्तजार को अन्तहीन बना गया।

हुआ यह पडोस की एक दीदी जो मेडिकल के आखरी साल में थी ।उनके साथ कुछ ऐसा हो गया कि वो खुदकुशी के लिए मजबूर हो गई और मेघन के पापा ने यह बात दिल से लगा ली ।वो उसे भी अपनी बेटी जैसा ही मानते थे बस उनका डर उनकी जिद बन गया ।और मेघन को अपने सपनों की तिलांजली देनी पडी।
फिर मेघन ने अपने शहर में ही बी एस सी में एडमिशन ले लिया।पर इस वादे के साथ कि किसी लडके से बात करना तो दूर वो किसी को नजर उठा कर भी नही देखेगी।कॉलेज के दिन शुरू हो गए। पर मेघन सहमी सी ही रही।
फिर एक दिन एक लडके को देखा उसने कुछ तो बात थी उसमें जिन्दा दिल सा वो लडका कब मेघन के दिल में अपनी जगह बना गया मेघन खुद भी नहीं जान पायी।कभी दिल के हाथों मजबूर होकर मेघन ने उस लडके से बात भी करनी चाही तो पापा की कसम उसके पैरों की बेडिया बन गई।
मेघन कभी खुद को उस कसम से मुक्त नहीं कर पायी ।और इस तरह कॉलेज का आखिरी दिन भी आ गया ।दिल की बात दिल में ही दबा कर मेघन ने कॉलेज को अलविदा कह दिया ।
कभी कभी तन्हाई में सोचती काश दी के साथ वो हादसा ना हुआ होता तो आज उसकी जिन्दगी कुछ और होती।कुछ दिनों से अब पापा की तबियत कुछ ठीक नहीं रहती अब पापा का ही सहारा बन जाना चाहिए यह सोच अगले ही दिन वो पापा के साथ उनकी दुकान पर थी ।पर यह क्या यह सरप्राइज था या शॉक सामने वाली दुकान पर तो वही लडका बैठा था जिसने मेघन की रातों की नींद उडा रखी थी ।कुछ ही देर मे मेघन को पता लगा कि वो दुकान उसी लडके के पापा की है।और दोनो के पापा एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त है।अब फिर से नई डगर पर चलने लगी थी मेघन की जिन्दगी।

कुछ ही दिनों के बाद एक नयी खुशखबरी मेघन का इन्तजार कर रही थी।उसके लिए सामने वाले अकंल ने रिश्ता भेजा था।क्या करें क्या ना करें समझ ही नहीं पा रही थी वो खुशी का आलम ऐसा था वो पांव रखती कही थी और उसका पैर पडता कही और था।
देखते ही देखते घर में जोर शोर से उसकी सगाई की तैयारी होने लगी ।सारी सहेलिया उसके आने वाले कल के हवाले से उसे छेड़ती ।एक बार फिर मेघन अपनी आखों में भविष्य के लिए सतरंगी सपने सजाने लगी थी।
धीरे धीरे सगाई का दिन भी करीब आ गया ।बहुत धूमधाम से यह समारोह सम्पन्न हुआ।तोफहे तो बहुत सारे मिले थे मेघन को पर सबसे खास था उनमें से एक तोफहा जो उसके भावी पति ने उसे दिया था।बेकरारी के साथ सबसे पहले मेघन ने वही तोफहा खोला।
तोफहे में मिला मोबाइल उसे दुनिया की सबसे कीमती चीज लगा क्योंकि मोबाइल तो उसके पास पहले भी था ।पर उसमें सुरक्षित नम्बर अनमोल था ना उसके लिए ।आधा घन्टा तो यही सोचने मे निकाल दिया फोन करूँ या नहीं फिर कुछ सोच कर जैसे ही फोन लगाया पहली ही बेल मे फोन ले लिया गया।
धडकते दिल के साथ तुंरत ही मेघन ने फोन काट दिया। अब लगातार दूसरी तरफ से फोन आ रहा था ।पर वह हिम्मत ही नहीं कर पा रही थी बात करने की।पर दूसरी तरफ भी शायद अटल इरादा कर लिया गया था कि आज तो बात करनी ही है ।थक हार कर जैसे ही मेघन ने फोन लिया ।छूटते ही उसका भावी पति बोला।
तुम आज भी नहीं बदली मेघन बिल्कुल वैसी ही हो जैसी कॉलेज में थी ।डरी डरी शरमाई सी आज एक राज की बात बताऊ पहली नजर में ही मुझे तुमसे प्यार हो गया था ।पर तुम तो भूले से भी मेरी ओर नहीं देखती थी।इसलिए कभी अपने दिल की बात जुबां पर ला ही ना सका ।बस चुपके चुपके दुआ में मांगता था तुम्हें जानता तक ना था कि दुआ कबूल होगी भी या नही ।पर देखों मेरे रब ने मुझे नाउम्मीद नहीं किया।अरे अब तुम भी तो कुछ बोलो इतनी देर से मैं ही बोल रहा हूँ।
मेरी और तुम्हारी दुआ एक ही थी ना एक लाइन में अपने दिल का हाल बता फोन रख दिया मेघन ने।
सपने सच हो जाये तो खुशियों की कोई सीमा ही नहीं होती है बस वहीं हाल आजकल मेघन का था वो फिर से वही मेघन बन गई थी ।जो अपने बाबुल के आंगन को गुलजार किया करती थी।
शादी के दिन करीब ही आ गये थे पर अब जो हुआ वो तो किसी ने सपने में भी नही सोचा था।मेघन के ससुराल वालों कि व्यवहार बदल रहा था।हर वक्त वारी जाने को तैयार सास अनमनी सी रहती।होने वाला पति दिन में एक फोन ना करता ।और जब मेघन खुद से फोन करती तो व्यस्त हूँ कहकर फोन काट दिया जाता।जब तक कोई समझ पाता कि यह सब क्या हो रहा है औऱ क्यों हो रहा है।
रातों रात मेघन के होने ससुराल वाले सब कुछ बेच कर कही चले गये बिना किसी को कुछ भी बताये।बस छोड़ गए अपने पीछे बहुत से अनसुलझे सवाल।इस घटना के बाद मेघन बुरी तरह से टूट गई थी।जी करता सब कुछ छोड़-छाड कर कही चली जाये।पर इन्सान हर वक्त तो अपने मन की नहीं कर सकता ना तो मेघन ने भी खुद को संभाल लिया ।अपने घर वालों के लिए अपने पापा के लिए वह फिर से जिन्दगी की दौड़ में शामिल हो गई।उसने अपनी अधूरी पढाई फिर से शुरू करी और फिर पी एच डी कर आखिर अपने नाम के आगे डॉक्टर लगा ही लिया।इन्हीं दिनों फिर उसके लिए एक रिश्ता आया ।जो कि उसके पापा को बहुत अच्छा लगा।
ससुराल वालों ने मेघन के पापा से वादा किया था ।वो मेघन को अपने घर में रानी बना कर रखेंगे ।एक बार फिर पापा की खुशी के लिए मेघन दुल्हन बनी तैयार खडी थी।
फिर मेघन के पापा ने बहुत सी दुआओं को मेघन के आंचल में बांध उसे पिया के घर विदा कर दिया।शादी के बाद के कुछ दिन तो मेघन के बहुत अच्छे निकले पर फिर धीरे धीरे सच पर से पर्दा उठने लग गया।बात बेबात पर ताना मिलता कोई गल्ती ना होने पर भी मिलती सजा। हर वक्त घर में पैसों को लेकर रोना धोना होता ।कभी प्यार से तो कभी बहला फुसला कर बस एक ही बात बताई जाती कि पापा से अपने पैसे लेकर आओं।खुद को अब बिल्कुल तन्हा पाती थी मेघन।
फिर एक दिन जब वो सब्जी लेने के लिए बाजार गई थी तो अचानक से टकरा गई उस लडके से जिससे उसकी शादी होने वाली थी।उस लडके को देख मेघन के सारे जख्म फिर से हरे हो गये।वो लडका धीरे से मेघन के पास आकर बोला।
अपनी ससुराल में तुम खुश तो हो मेघन
मुझे आपसे कोई बात नहीं करनीगुस्से में यह बोल मेघन जैसे ही आगे बढने लगी।वो लडका गुजारिश करता हुआ बोला ।मैं तुम्हारे सभी सवालों का जवाब देना चाहता हूँ बस तुम मुझे अपनी जिन्दगी के दस मिनट दे दो, मैं नहीं चाहता कि मेरा दिया हुआ जख्म तुम्हारी पूरी जिन्दगी के लिए नासूर बन जाये।
उस लडके की बात सुनने के लिए फिर मेघन ने हाँ कर दी।लडका धीरे धीरे मेघन को बताने लगा।तुम जानती हो मेघन की तुम ही मेरी पहली और आखिरी ख्वाहिश हो ।पर मैं यह भी जानता हूँ कि तुम्हारे पापा ने हमेशा तुम्हें एक राजकुमारी की तरह ही रखा था ।मैंने भी बस यही सपना देखा था जब तुम मेरे घर पर आओ तो मैं भी तुम्हें बहुत खुश रखू।पर हम जो सोचते है वो हमेशा होता कहाँ है।पापा को अचानक से व्यापार मे बहुत बडा घाटा हुआ।उसके बाद कोशिश करने पर भी हम कुछ भी नहीं सम्भाल पाये। बस अगर कुछ बचा था उस शहर मे तो वो हमारी बची थी इज्जत।उस बाप दादा की इज्जत पर कोई आंच ना आये यह सोच हमने रातों-रात वह शहर छोड़ दिया और साथ ही छोड़ दिया तुम्हें क्योंकी मैं तुम्हें अपने साथ फाके नहीं करा सकता था।हो सके तो मुझे माफ कर देना पर मैं हमेशा तुम्हें खुश देखना चाहता था। इसलिए ऐसा करना प़डा।अपने दिल की बात बता वो लडका एक बार फिर मेघन को सोच के भंवर में घिरा छोड़ कर जा चुका था हमेशा के लिए।अब क्या करना है जिन्दगी में यही सोचते हुये घर की और चल पडी मेघन।उसे प्यार करने वालें बस यही तो चाहते है ना कि वो खुश रहे ।चाहें उसके पापा हो या ……
पर ऐसे हालात में कोई कैसे खुश रह सकता है।पर नहीं अब मुझे खुश रहना ही है।अब तक जो हुआ वो मेरी किस्मत थी।पर अब मैं अपनी मेहनत के बल पर दुनिया में खुश रहने की कोशिश करुँगी।यह सोचते हुए जैसे ही मेघन घर पहुँची।उसने देखा मेघन के पति और सास की लडाई हो रही थी।
मेघन का पति अपनी माँ से कह रहा था।माँ बस बहुत हो गया अगर आज मैं दफ्तर से जल्दी नहीं आता और आपकी और पिता जी की बातें नहीं सुनता तो कभी जान भी नहीं पाता आप लोग क्या खेल खेल रहे है।पर अब और नहीं मैं मेघन को यहाँ से ले कर जा रहा हूँ ।मुझे नहीं रहना है साजिशों के बीच।तभी पीछे खडी मेघन सामने आकर अपने पति से बोली नहीं हम कहीं नहीं जायेगें ।जो हुआ उसे भूल कर नयी जिन्दगी की शुरूवात करेंगे ।और एक बात अब आप अकेले नहीं मैं भी नौकरी करके आपके साथ घर की जिम्मेदारी उठाने मे आपका साथ दुगीं।जिन्दगी मे अब फिर से मेघन के कलिया खिलने लगी थी।अब बहार को आने से रोकना किसी के बस की बात नहीं।अब खुश रहती थी मेघन