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बिल्ली का न्याय - पंचतंत्र की कहानी - Hindi Moral Stories | Grehlakshmi

एक बड़े पीपल के पेड़ के खोल में कठफोड़वा रहता था। वह वहाँ कई साल से रह रहा था। पड़ोस में रहने वाले सभी पशु-पक्षियों से उसकी दोस्ती थी। एक दिन कठफोड़वा अपना घर छोड़ कर भोजन की तलाश में निकला। काफी लंबा सफर तय करके वह मक्का के
खेत में पहुँचा। फसल कटने का समय था। मक्का की फसल कटने को तैयार थी। वह खेत में ही रहा और कई दिन तक पेट भरके खाया।
जब कठफोड़वा गया हुआ था तो एक नन्हा खरगोश घर की तलाश में आया और उसके घर में रहने लगा। जब कठफोड़वा अपने घर लौटा तो उसने वहाँ खरगोश को मजे से गाजरें खाते देखा। उसे देखते ही कठफोड़वा गुस्से से चिल्लाया। ष्यह घर मेरा है
“तुम्हारा घर?” खरगोश बोला- “ये तो मेरा है। मैं यहाँ कई दिन से रह रहा हूँ।”
“तुम यहाँ नहीं रह सकते। यह घर मैंने बनाया है और हमेशा से इसमें रहता आया हूँ। मेरे पड़ोसियों से पूछ लो।” पर खरगोश ने उसकी एक न सुनी। वह उल्टा चिल्लाया- “मैं किसी से क्यों पूछू? जब मैं यहाँ आया तो जगह खाली थी ए इसलिए मैं रहने लगा।”
अब मैं यह घर नहीं छोड़ सकता। दोनों में जबरदस्त लड़ाई होने लगी। पड़ोसी भी झगड़ा नहीं सुलझा सके। अंत में उन्होंने उस बूढ़ी बिल्ली के पास जाने का फैसला किया जिसे काफी सयाना माना जाता था। वह गंगा नदी के किनारे रहती थी।
उसने दोनों को अपने पास आते देखा तो आँखें मूंद करए जप करने बैठ गई।
कठफोड़वा और खरगोश उससे डर के मारे थोड़ी दूर ही बैठ गए। उन्हें उसके पास जाने से डर लग रहा था- बिल्ली ने आँखें खोली तो कठफोड़वा बोला- खरगोश और मेरी लड़ाई हो गई है। हमारी कहानी सुन करए सही न्याय करें। जिसे दोषी मानेंए सजा
वह मीठी आवाज़ में बोली। प्यारे बच्चों! ऐसी बुरी बातें मत कहो। हरिद्वार से आने के बाद मैंने खुद को भगवान के चरणों में सौंप दिया है इसलिए किसी को सजा देने की बात सोच भी नहीं सकती। मुझे बताओ किस बात का झगड़ा है
कठफोड़वा कहानी सुनाने लगा तो दृष्ट बिल्ली बोली- ‘यारे में बढ़ी हो गई हैं। इनी दूर से तुम्हें सुन नही सक्ती देने थोड़ पास आ कर वे डेनों उस पर भरोसा रखते हुए शेड पास आ गए। इससे पहले कि उन्हें परमास होत, बिल्ली ने उनपर झपटा दिया। उसने उन्हें नीचे पंजे से मार दिया और खा गई

शिक्षा : दुष्ट आफ्ना बाहरी सा-रंग चाहे बदल ले लेकिन अपनी दुष्टता नहीं डा। ऐसे लोगों से बच कर रहना चाहिए।

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