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वह उनसे मिठाई खाने का आग्रह करने लगी और एक बादाम लगा बरफी का टुकड़ा उठा कर जीजाजी को खिलाने लगी। इन्होंने कहा, ‘आधा ही चलेगा।’ मेरी चचेरी बहन बोली, ‘नहीं नहीं, यह तो आपको पूरा ही खाना होगा। यह तो साली का अधिकार है।’
इतना सुनते ही पास बैठे इनके दोस्त झट से बोले, ‘यदि यह नहीं खाना चाहते तो पूरी बर्फी हमें खिला दो, हम आपको पूरा ही अधिकार दे देंगे।’ इतना सुनते ही सब हंस पड़े और वह शरमाती हुई अंदर चली गई।

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2- जो भी काटेगा मारा जाएगा

बात मेरी चचेरी बहन मोनिका की शादी की है। मंडप के नीचे परिवार के काफी लोग शादी की रस्मों को देख रहे थे। वहां बैठे लोगों को रह-रह कर मच्छर काट रहे थे। मैंने तपाक से एक मच्छर को मार दिया। ऐसा करते देख कर वहीं बैठे मेरे जीजाजी बोले, ‘अरे, मार दिया मच्छर को?’
मैंने कहा, ‘जो काटता है उसे मैं मार देती हूं।’ जीजाजी ने फिर पूछा, ‘जो काटता है उसे आप मार देती हैं?’ मैंने समझा कि मच्छर के लिए पूछ रहे हैं। मैंने बड़े उत्साह से फिर कहा, ‘जो भी काटेगा मारा जाएगा।’ इस पर जीजाजी ने मेरे पति को देख कर पूछा, ‘कहिए पवन जी, कितनी बार आप मारे जा चुकेहैं?’

उनकी बात सुन कर मंडप में बैठे लोग हंसने लगे। मैंने जब अपनी बात का अर्थ समझा तो मैं शर्म से लाल हो गई।

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3- द्रौपदी रह चुकी हो

मुझे नाटकों में भाग लेने और लिखने का शौक बचपन से ही रहा है। इसलिए जब मेरी शादी की बात चली तो अपने होने वाले पति की लेखन क्षमता से प्रभावित होकर मैंने रिश्ते के लिए हां कर दी। शादी के कुछ साल बाद एक रोज हमारा किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ। गुस्से में आकर मेरे मुंह से निकला कि मैं तुमसे तंग आ गई हूं, इससे अच्छा तो यह होता कि मैं कुंआरी रह जाती। मेरा इतना कहते ही ये तपाक से बोल पड़े, ‘हमने तो सुना था कि तुम कॉलेज के दिनों में स्टेज पर द्रौपदी का रोल कर चुकी हो। जिसने पांच पति संभाले हों वो आज एक अकेले पति से तंग कैसे आ सकती है?’ उनकी बात सुनते ही मेरा सारा गुस्सा छूमंतर हो गया और मैं शर्म से लाल हो गई। उनकी हंसी में मेरी हंसी और झेंप दोनों शामिल थे।

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