कई दफा ऐसा होता है कि हम और आप ऑफिस और घर के काम- काज की वजह से अपनी फिटनेस पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। दिन भर कुर्सी पर बैठे रहना और एक्सरसाइज के नाम पर कुछ नहीं करना दिनोंदिन बढ़ते पेट का कारण है। सिर्फ यही नहीं, थकान, मांसपेशियों में दर्द और भी न जाने कितनी तरह की तकलीफ फिजिकली फिट न रहने की वजह से हो जाती है। ऐसे में अगर आप फटाफट माइक्रो वर्कआउट कर लें, तो यह बढ़िया है। माइक्रो वर्क आउट 10 से 20 मिनट का होता है, जो आपके फिट रहने के लिए सही है।

माइक्रो वर्क आउट स्ट्रेंथ के साथ कार्डियो का बढ़िया काम्बिनेशन है, जिसे इक्विप्मेन्ट या बॉडी वेट के सतह किया जा सकता है। इसके लिए आसान, प्रभावशाली और फास्ट पेस वाले एक्सरसाइज जैसे स्किपिंग, ब्रिस्क वॉक, जंपिंग जैक, बर्पी आदि बहुत कम समय में आपके दिल की धड़कन को बढ़ाते हैं। फिर चाहे यह एचआईआईटी हो, टबाटा हो या सेवन मिनट वर्कआउट हो, ये आपके एन्ड्यूरेन्स लेवल, मोबिलिटी, कपैसिटी, ब्रीदिंग और बेसिक स्ट्रेंथ को बढ़ाते हुए फैट लॉस में भी मदद करते हैं।

माइक्रो वर्क आउट के प्रकार

एचआईआईटी (हाई इन्टेन्सिटी इंटरवल ट्रेनिंग) : इसमें आप कम इन्टेन्सिव रिकवरी मूवमेंट्स में हाई बर्स्ट वाले ऐनेरोबिक मूवमेंट करते हैं। इसमें हमेशा इक्विप्मेन्ट की जरूरत नहीं पड़ती है।

टबाटा : एचआईआईटी वर्क आउट का एक अन्य स्टाइल टबाटा है, जिसमें आप किसी भी एक्सरसाइज को 20 सेकेंड के लिए अपने मैक्सिमम एफर्ट के साथ करते हैं और 10 सेकेंड आराम करते हैं। छह एक्सरसाइज के आठ राउन्ड होते हैं। यह मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मददगार है, लीन मसल मास को बढ़ाता है और एरोबिक के साथ ऐनेरोबिक फिटनेस लेवल को भी बूस्ट करता है।

रेगुलर वर्क आउट बनाम माइक्रो वर्क आउट

फैट बर्निंग एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें आप लंबे वर्क आउट में फैट के जरिए ऑक्सीजन की उपस्थिति की वजह से अधिक कैलोरी बर्न करते हैं। छोटे वर्कआउट में आप ग्लूकोज के फॉर्म में उपलब्ध एनर्जी का प्रयोग करते हैं। हालांकि, माइक्रो वर्क आउट अमूमन हाई इन्टेन्सिटी होते हैं और संभव है कि आप एक्सेस पोस्ट एक्सरसाइज ऑक्सीजन कन्सम्पशन पर फैट बर्न करें। शॉर्ट वर्कआउट भी इफेक्टिव हो सकते हैं, लेकिन आपको इसके लिए अपने फॉर्म और पोस्चर पर ध्यान देना पड़ता है। माइक्रो वर्क आउट आपको बर्न आउट होने के चांसेज भी कम करते हैं और आपको फोकस को बढ़ाते हैं।

कितनी बार वर्क आउट करना चाहिए

शुरुआत आप छोटे 10 मिनट के सेशन से कर सकते हैं। जिनका फिटनेस लेवल अच्छा है, वे लोग सप्ताह में एक बार तीन से पांच सेशन कर सकते हैं। प्रति सेशन 20 मिनट देने चाहिए। ऐसे वर्कआउट पैटर्न को लीजिए, जो आपकी बॉडी के लिए काम अकरे और उस शेड्यूले पर बने रहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि बहुत कम समय में आपको बहुत ज्यादा नहीं करना है। खुद को ओवर ट्रेन करने से आपके स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसॉल बढ़ जाता है, जिससे चोट लगने और बर्नआउट की आशंका रहती है।

एएमआरएपी: यह जितनी बार संभव हो, उतनी बार दोहराव के लिए इस टर्म का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए, 10 मिनट का एएमआरएपी राउन्ड में 500 मीटर की दौड़, 50 स्क्वाट, 20 बर्पी को आप 15 मिनट में जितनी बार संभव हो, दोहरा सकते हैं। यह विभिन्न मसल ग्रुप को हिट करता है और कम समय में अधिक कैलोरी बर्न करता है।

7 मिनट वर्क आउट: इसमें 12 विभिन्न एक्सरसाइज शामिल हैं, जो आपकी अपर और लोअर बॉडी और कोर पर काम करता है। आप हर एक्सरसाइज को 30 सेकेंड के लिए कर सकते हैं और बीच- बीच में 10 सेकेंड का ब्रेक ले सकते हैं।

वे गलतियां जो आपके माइक्रो वर्क आउट सेशन को बिगाड़ सकती हैं

एक्सरसाइज ज्यादा करना

फॉर्म और तकनीक पर ध्यान नहीं देना

स्ट्रेंथ और कार्डियो के अच्छे संतुलन को मिस करना

सिर्फ लोअर या अपर बॉडी करना

वर्क आउट के बाद अनहेल्दी खाना

हाइड्रेटेड नहीं रहना 

माइक्रो वर्क आउट के साथ जरूरी है सही न्यूट्रिशन

सिर्फ माइक्रो वर्क आउट आपके फिट रहने का रास्ता नहीं है, इसके लिए आपको अपनी डाइट और कैलोरी इनटेक पर भी ध्यान देना चाहिए। प्रोटीन जरूरी है और इसके लिए आप अंडे अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं। अंडे के साथ चिकन, लीन मीट, फिश और पनीर प्रोटीन के हाई स्रोत हैं। सिम्पल कार्बोहाइड्रेट से परहेज कीजिए और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट को ऐड कीजिए क्योंकि ये न्यूट्रिशन डेन्स होने के साथ आपके स्वास्थ्य के लिए बढ़िया होते हैं। नट्स, बादाम, अखरोट, आलिव ऑइल जैसे हेल्दी फैट भी सही होते हैं। अपनी इम्यूनिटी को बनाए रखने के लिए विटामिन के स्तर का हाई रहना चाहिए, इसके लिए आप मल्टी विटामिन ले सकते हैं। सबसे जरूरी बात, रोजाना भरपूर पानी पिएं।

आखिरी लेकिन जरूरी बात

महामारी के इस दौर में हमें मासिक तौर पर स्वस्थ रहना चाहिए। हमें वह सब करना चाहिए, जो हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। क्योंकि जो हमारा मस्तिष्क मानता है, बॉडी उसकी को प्राप्त कर पाता है। अगर संभव हो तो माइक्रो वर्क आउट के साथ कुछ देर के लिए मेडिटेशन भी करें।

 

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