क्या आप जानती हैं कि आपका बच्चा पेट में हो कर भी आपकी आवाज सुन सकता है? जी हां जब बच्चा 4थे महीने में होता है तो वह आवाजें सुनने लगता है और जब वह आखरी के तीन महीनों में आता है तो आपको आवाजों पर रिस्पॉन्स भी करने लगता है। क्या आपको अपने बच्चे को गाना सुनाने के लिए हेड फोन आदि का प्रयोग करना चाहिए? अगर ऐसा सोच रही हैं तो इसका जवाब है नहीं। आप अपने बच्चे को अपनी आवाज में गा कर सुना सकती हैं जो उसे रिलैक्स करेगा। अगर आप जन्म से पहले ही अपने बच्चे को अच्छा अच्छा संगीत सुना देती हैं तो इससे अच्छी तो कोई बात हो ही नहीं सकती। उसे संगीत सुनाने के लिए आपकी आवाज किसी भी प्रकार के हेडफोन या इयर फोन से कई गुना ज्यादा बेहतर होती है। तो आज हम इसी विषय पर बात करने वाले हैं कि क्या आपका बच्चा पेट में रह कर भी आपको सुन सकता है? आइए जानते हैं।

क्या आपका बच्चा आपको सुन सकता है?

एक स्टडी के मुताबिक बच्चे पेट में रह कर भी चीजें सीखते हैं। यहां सीखने का मतलब है कुछ चीजों की पहचान करना। इस दौरान पता चला कि बच्चे पैदा होने के बाद उस गाने को सुन कर आनंद महसूस करते हैं जो उनके मां बाप पेट में होते हुए सुनाते थे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसे अच्छा संगीत सुनाने के लिए उसके लिए आज ही नए हेडफोन लेने चली जायेंगी और अपने पेट पर हेडफोन लगा देंगी। बच्चे का अच्छी तरह दिमाग विकसित पेट से बाहर आने पर होता है।

इसलिए आपको कोई अच्छे गायक की सीडी नहीं ले कर आनी है केवल उन चीजों को सुनें और खुद गाएं जिनसे आपको आनंद प्राप्त होता है और आपका मन स्कारत्मक होता है। अगर आप इन चीजों को अपने मुंह से गाएंगी तो बच्चे पर भी इसका पॉजिटिव असर ही पड़ेगा। इससे आपका बच्चा आपको सुनेगा और आपकी आवाज को पहचानने की कोशिश करेगा।

बच्चे को आपको क्या सुनाना चाहिए?

क्या आपको बच्चे के लिए कोई अलग गाना ढूंढना पड़ेगा? डॉक्टरों के मुताबिक ट्यून्स बढ़िया होती हैं या जिस चीज को आप एंजॉय करती हैं वहीं सुनाएं। अगर आप अच्छी ट्यून्स की खोज में हैं तो ऐसी ढेरों वेबसाइट हैं जो केवल प्रेग्नेंसी के समय के लिए ही ट्यून्स बनाती हैं। इन पर आपको कुछ ऐसी ट्यून मिल जायेंगी जो आपको और आपके बच्चे के मन को रिलैक्स करेंगी और बहुत पसंद आएंगी। आप स्पोटिफाई पर भी ऐसी ट्यून ढूंढ सकते हैं।

आवाज कम करें

यह याद रखें कि आपके पेट में पहले ही बहुत सी आवाजें आती रहती हैं, जैसे आपका पेट कई बार गुड़गुड़ाता है, आपका हृदय ब्लड पंप करता है और आपके फेफड़े हवा भरते हैं। इसके अलावा जब आप बोलती हैं तो आपको आवाज आपकी हड्डियों के माध्यम से अंदर जाती है और वह भी एंप्लीफाई होती है। इसलिए अगर आप कोई बाहर का म्यूजिक बजा रही हैं तो यह सुनिश्चित करें कि इसकी ध्वनि केवल 50 से 60 डेसीबल ही हो। इसका मतलब है कि पर पर हेडफोन का प्रयोग तो आपको बिलकुल ही नहीं करना चाहिए।

डॉक्टरों का कहना है कि आवाज जब तक आपके बच्चे तक पहुंचती है वह बहुत तेज हो जाती है और इसलिए आपको बाहर की साउंड अवॉइड करनी चाहिए। आप किसी कॉन्सर्ट या किसी तेज आवाज वाली जगह पर कभी कभार जा सकती हैं लेकिन रोजाना ऐसा न करें।

तो यह बात तो अब आपको समझ आ गई होगी की आपके बच्चे को केवल आपकी आवाज की जरूरत है न कि किसी हेड फोन या इयर फोन के म्यूजिक की। अगर आप इसे तेज आवाज में बजाती हैं तो आपका बच्चा अंदर बिलकुल भी कंफर्टेबल महसूस नहीं करेगा इसलिए आपको इस स्थिति को अवॉइड ही करना चाहिए और अपना और अपने बच्चे का खास ख्याल रखना चाहिए। आपको खुद भी ज्यादा हेडफोन आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए इससे भी आपके बच्चे को नुकसान हो सकता है।

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