प्रेगनेंसी के दौरान ये न करो, वो न करो, ऐसी कई हिदायतें बड़ों- बुजुर्गों द्वारा दी जाती हैं। उनमें एक हिदायत यह भी रहती है कि खुद को आराम से रखो, ज्यादा हिलो- डुलो मत! लेकिन यह बात इसलिए कही जाती थी क्योंकि पहले की महिलाओं के पास करने के लिए बहुत सारा और बहुत तरह का काम होता था। उन्हें अपने आराम के लिए समय मिले, इसलिए भी यह हिदायत दी जाती थी। लेकिन अब जब प्रेगनेन्ट महिला अपना पूरा ध्यान रखती है तो एक रेगुलर एक्सरसाइज रूटीन का होना जरूरी हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रेगनेन्ट महिला के हेल्दी रहने से मां और बच्चे दोनों पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है।

विशेषज्ञों की मानें तो प्रेगनेंसी के दौरान फिजिकली एक्टिव रहने से पीठ में दर्द और थकान नहीं होती है। जिन महिलाओं को नॉर्मल प्रेगनेंसी रहती है, उन्हें कम से कम 30 मिनट का एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। यही वजह है कि अब ज्यादा से ज्यादा प्रेगनेन्ट महिलायें फिटनेस को अपना रूटीन बना रही हैं। प्रेगनेन्ट महिला के लिए स्विमिंग, ब्रिस्क वॉकिंग, स्टेशनरी साइकलिंग, प्राणायाम, लाइट वेट ट्रेनिंग, कएजेल एक्सरसाइज आदि सही रहते हैं।

प्रेगनेन्ट महिला के लिए एक्सरसाइज

 

प्रेगनेंसी के दौरान योग का अभ्यास सबसे बढ़िया है क्योंकि यह हमारे मस्तिष्क को संतुलित रखता है। यदि आपने प्रेगनेंसी के पहले कभी भी योग नहीं किया है तो आपको प्रीनेटल योग करना चाहिए। कुछ मॉडिफिकेशन के बाद आपको रेगुलर योग का अभ्यास करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान खुद को हेल्दी रखने के लिए स्क्वैट सबसे बढ़िया एक्सरसाइज है। लेकिन इसे भी ज्यादा नहीं करना चाहिए। लेबर के समय मजबूत पैर जरूरी होते हैं और फाइनल पुश ही बच्चे को जन्म देने में मदद करता है। जब आप लेबर के लिए स्क्वैट करते हैं तो यह बच्चे को नीचे आने के लिए ज्यादा जगह देता है। स्क्वैट सही हैं लेकिन आपको लंजेज और डीप नी बेंड्स से परहेज कीजिए क्योंकि इससे आपके जॉइन्ट्स में चोट लगने का खतरा रहता है।

केजेल एक्सरसाइज आपके पेल्विक फ्लोर को मजबूत करता है, पेल्विक फ्लोर उन मांसपेशियों का समूह है, जो पेशाब के फ्लो और वजाइना को कंट्रोल करता है। केजेल एक्सरसाइज यूरिनरी इनकॉन्टिनेन्स से बचाते हैं, जो कि देर से होने वाली प्रेगनेंसी और पोस्टपार्टम के दौरान होने वाली एक आम समस्या है।

प्रेगनेन्ट महिला को पैरों की मासपेक्षियों में दर्द होता है, इसे ठीक करने के लिए स्ट्रेचिंग एक बढ़िया एक्सरसाइज है। इसे आप कहीं भी और कभी भी कर सकती हैं।

प्रेगनेंसी एक दौरान जंपिंग और रनिंग से परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे को परेशानी हो सकती है। आप लाइट वेट के साथ एक्सरसाइज कर सकती हैं।  

प्रेगनेन्ट महिला के लिए एक्सरसाइज के लाभ

 

एक्सरसाइज से जेस्टेशनल डायबिटीज़ से बचाव होता है, जो इन दिनों प्रेगनेन्ट महिलाओं को अपना शिकार बना रहा है। यह आपके मस्तिष्क को एन्डोरफिन रिलीज करने देता है, जो हैप्पी केमिकल्स होते हैं। ये तनाव और दबाव को दूर करके आपके मूड को बेहतर बनाते हैं। पीठ दर्द से बचने के लिए एब्स के सेट सबसे बढ़िया है। वे एक्सरसाइज जो सीधे पेट पर असर नहीं करते हैं, वे भी पीठ दर्द और दबाव से मुक्ति दिलाते हैं।

एक एक्टिव बॉडी बोवेल को भी सही रखती है। जो प्रेगनेन्ट महिलायें एक्सरसाइज करती हैं, उन्हें लेबर में कम समय लगता है। आप प्रेगनेंसी के दौरान जितनी फिट रहेंगी, बच्चे के जन्म के बाद उतनी ही जल्दी रिकवर करेंगी। अमूमन प्रेगनेंसी के दौरान ठीक से नींद नहीं आती है लेकिन एक्सरसाइज करने से अच्छी नींद आती है और आराम महसूस होता है। एक्सरसाइज से एनर्जी लेवल भी बेहतर रहता है।

बच्चे के लिए एक्सरसाइज के लाभ

 

एक्सरसाइज जितना आपके लिए अच्छा है, उतना ही बच्चे के लिए भी सही है। गर्भ में रहने के दौरान आवाज और वाइब्रेशन के दौरान बच्चों को भी अच्छा महसूस होता है। जो प्रेगनेन्ट महिलायें एक्सरसाइज करती हैं, उनके बच्चों का वजन भी सही रहता है। रिसर्च बताते हैं कि जिन बच्चों की मांएं प्रेगनेंसी के समय एक्सरसाइज करती रहती हैं, वे बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में अधिक इंटेलिजेंट, स्टेबल हार्ट रेट और एक्टिव ब्रेन फंक्शन के साथ पैदा होते हैं।

प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज करते समय ये सावधानी हैं जरूरी

 

प्रेगनेंसी के दौरान एक्सरसाइज की शुरुआत करने से पहले जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर से बात कर लें। इस तरह से आप अपनी और अपने बच्चे की मदद करेंगी। आपका डॉक्टर आपको एक्सरसाइज करने के लिए मना कर सकता है, यदि आपकी प्रेगनेंसी का इतिहास मिसकैरेज, प्री- मैच्योर लेबर का हो या आपको दूसरे या तीसरे ट्रायमेस्टर में ब्लीडिंग, स्पॉटिंग, हार्ट डिजेज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, एनीमिया आदि हो।

प्रेगनेंसी में एक्सरसाइज करने के समय इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

 

अपने आपको अच्छे से हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। एक्सरसाइज से पहले, के दौरान और बाद में ढेर सारा पानी पीना जरूरी है।

यदि अनकम्फर्टेबल महसूस हो तो स्ट्रेच बिल्कुल न करें।

अपने एक्सरसाइज की शुरुआत धीमे करें और फिर धीरे- धीरे अपने वर्कऔ को बढ़ाएं।

एक्सरसाइज के दौरान ब्रेक लेते रहना जरूरी है।

एक्सरसाइज एक समय ढीले और कम्फर्टेबल कपड़े ही पहनना सही है।

एक्सरसाइज से कम से कम एक घंटे पहले खाना फिनिश कर लें।

जंपिंग, हॉपिंग, बाउंसिंग, स्कीइंग जैसे हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज बिल्कुल न करें।

एक्सरसाइज करते समय ध्यान रखें कि आप जहां एक्सरसाइज कर रही हैं, वहां का टेम्परेचर गरम और उमस भरा न हो।

 

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