इन दिनों देर से शादी करना एक चलन बन गया है। 35 की उम्र में शादी और 40 तक आते-आते कहीं जाकर बच्चे की प्लैनिंग शुरू होती है। ऐसे में ज्यादातर कपल्स को ट्रीटमेंट के लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ता है। हम सभी जानते हैं कि महिलाओं का शरीर एक उम्र तक ही गर्भ धारण करने में सक्षम होता है। उसके बाद नैचुरली बेबी कंसीव करना नमुमकिन सा हो जाता है। क्योंकि 45 से 50 के बीच मेनोपॉज (मासिक धर्म का बंद होना) हो सकता है। जबकि हाल ही में टीवी एक्ट्रेस किश्वर मर्चेंट ने 40 साल की उम्र में नैचुरली कंसीव कर सबको हैरत में डाल दिया है। न कोई ट्रीटमेंट और न ही ऐसी कोई प्लैनिंग। यह कैसे संभव हो पाया? क्या आप नहीं जानना चाहेंगी। तो चलिए जानते हैं उन टिप्स के बारे में जो नैचुरल तरीके से कंसीव करने में मदद करेगा- 

गर्भपात होना (Risk Of Miscarriage)

शायद आप भी इस बात से इत्तेफाक रखती होंगी कि अधिक उम्र में इनफर्टिलिटी (Infertility) प्रॉब्लम होना कोई बड़ी बात नहीं है। यह दिक्कत उन कपल्स को भी होती है, जो अपना दूसरा बच्चा प्लान कर रहे होते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट भी मानते हैं कि थर्टीज के बाद महिलाओं में एग क्वालिटी प्रॉब्लम (Egg quality Problem), पीसीओडी (pcod) या पीसीओएस (pcos), थायरॉइड  (Thyroid) और फेलोपाइन ट्यूब में इन्फेक्शन (Fallopian Tube Infection) जैसे हेल्थ इश्यूज (Health Issues) शुरू हो जाते हैं। डॉक्टर्स की मानें तो 35 की उम्र के बाद मिस्कैरेज का डर बना रहता है इसलिए रूटीन चेकअप बहुत जरूरी है। 

रूटीन चेकअप (Routine Checkup)

यदि समय रहते बेबी प्लान कर लिया जाए तो दिक्कतें कम होती हैं। कई ऐसे कपल्स हैं जिन्हें फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का कोई फायदा नहीं पहुंचता है। अंत में उन्हें आई.वी.एफ (IVF) करवाना पड़ता है। जो कि सभी के लिए पॉकेट फ्रेंडली नहीं है। सच कहें तो शादी के तुरंत बाद ही आपको अपना रूटीन चेकअप करा लेना चाहिए। यदि कोई हेल्थ इश्यूज हैं तो पहले उसका ट्रीटमेंट कराएं। आप इस समय को एन्जॉय कर सकती हैं। यकीन मानिए इस तरह आप आसानी से कंसीव कर लेंगी। इससे आगे जाकर प्रेगनेंसी में कोई कॉम्पलिकेशंस भी नहीं होते हैं बस आप अपने स्ट्रेस लेवल को कंट्रोल में रखें। 

स्ट्रेस और एंजायटी (Stress Problem)

माना कि घर और ऑफिस की जिम्मेदारी आप पर है लेकिन मैनेजमेंट सीखिए। यदि आप जॉइंट फैमिली में रहती हैं तो काम को बांट दीजिए। सबसे महत्वपूर्ण बात कि शादी के फिक्स होते ही किसी अच्छे गायनोलॉजिस्ट के पास जाइए। अपना फुल चेकअप कराइए और स्ट्रेस लेना छोड़ दीजिए। अपना पूरा टेंशन अपने डॉक्टर को दे दीजिए। आपको बता दें कि इससे सेक्स लाइफ डिस्टर्ब होती है। और, हां प्रेगनेंसी के लिए सेक्स मत कीजिए। इसका आपके पार्टनर पर असर पड़ता है। न प्रेशर खुद लीजिए और न अपने पार्टनर को दीजिए। बहरहाल, स्ट्रेस को कम करने के लिए योग या व्यायाम कीजिए। सुबह-शाम जब भी समय मिले ब्रिस्क वॉक करें। आप रोप स्किपिंग भी कर सकती हैं। ध्यान रहे कि आपको बहुत ज्यादा एक्सरसाइज भी नहीं करनी है क्योंकि इससे आप थक जाएंगी और सेक्स करने का मन नहीं करेगा। 

फॉलिक एसिड (Folic acid)

महिलाएं प्रेगनेंसी में ज्यादातर फॉलिक एसिड लेती हैं जबकि इसका सेवन आपको शादी के बाद ही शुरू कर देना चाहिए। बेशक आप कभी भी फैमिली प्लैन करें लेकिन फॉलिक एसिड लेना आपके लिए जरूरी है। कई बार पूरे प्रीकॉशन के बाद भी प्रेगनेंसी ठहर जाती है। यदि आप फॉलिक एसिड लेती रही हैं तो मिस्कैरेज होने का डर कम रहता है। फॉलिक एसिड की जगह फॉलिंज (Folinz) भी ले सकती हैं। इसमें फॉलिक और जिंक दोनों होते हैं। जिंक हमारी बॉडी के लिए बहुत अच्छा होता है। खासकर, एक हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए। 

हेल्दी डाइट (Healthy Diet)

देखिए चालीस के बाद वैसे भी प्रेगनेंसी के चांसेस 5 प्रतिशत ही रह जाते हैं। ऐसे में आपको अपने खानपान की बहुत ध्यान रखने की जरूरत होती है। चाय-कॉफी की जगह मेथी, जीरा और अजवाइन का पानी पिएं। यह सभी एल्कलाइन फूड हैं। विशेषकर मेथी दाना। यह आपके वजाइना (Vagina) के Ph बैलेंस को बढ़ाता है। वजाइना के एल्कलाइन होने से प्रेगनेंसी आसानी से कंसीव होती है। इसके अलावा नींबू पानी, छांछ और दही का सेवन अधिक से अधिक करें। केला, सेब, संतरा, एवेकाडो और मौसंबी खूब खाएं। अगर आपको जल्दी  कंसीव करना है तो पपीता और पाइनएप्पल से परहेज करें। इसमें मौजूद एंजाइम्स पीरियड्स होने में हेल्प करते हैं। 

ऑव्यूलेशन फेज (ovulation phase) 

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है पीरियड्स का फ्लो भी कम होता चला जाता है। साथ ही पीरियड्स साइकिल भी आगे-पीछे हो जाती है। ऐसे में ऑव्यूलेशन फेज (Ovulation phase) का ठीक-ठीक अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। हालांकि, मार्केट में ऑव्यूलेशन किट (ovulation kit) मिलती है लेकिन आप घर पर भी इसका पता लगा सकती हैं। इसके लिए अपने पीरियड्स खत्म होने के अगले दिन से ही थर्मामीटर से अपना टेम्प्रेचर नापें। जब भी सुबह आपकी आंख खुले उस वक्त आपको थर्मामीटर लेकर अपनी वजाइना में डालना है और टेम्प्रेचर नापना है। आप देखेंगी जिस दिन आपका ऑव्यूलेशन फेज होता है, उस दिन आपके बॉडी का तापमान (Temprature) एक डिग्री अधिक होगा। यदि रोजाना आपका टेम्प्रेचर 98.7 रहता है तो उसदिन 99 होगा या हर रोज आपका टेम्प्रेचर 97 रहता है तो ऑवल्यूशन डे (Ovulation) वाले दिन 98 होगा। उस दिन आपको सेक्स जरूर करना है। सेक्स करने के लिए अपने पार्टनर पर दबाव न डालें

शतावरी (Shatavari)

शतावरी का उपयोग सेहत के लिए फायदेमंद होता है। महिलाओं के लिए यह वरदान है। कुछ लोगों का मानना है कि यह वजन बढ़ाता है। यदि आपका वजन बहुत अधिक है तो पहले उसे कम करें और फिर इसका सेवन करें। इसे आप सुबह और शाम को दूध के साथ ले सकती हैं। यह पाउडर या गोली दोनों ही में मिलता है। आपको इसके फायदे बता दें कि यह कंसीव करने में मदद करता है। जिन महिलाओं का ऑव्यूलेशन फेज सही समय पर नहीं होता है तो उन्हें इसका सेवन जरूर करना चाहिए। इससे ऑव्यूलेशन फेज समय पर आने लगता है। 

वेट लॉस (Weight Loss)

कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि वजन ज्यादा होने से कुछ नहीं होता है लेकिन आप भी जानते हैं कि ये दिल बहलाने वाली बात है। वजन ज्यादा होने से गर्भाश्य (Uterus) में चर्बी बढ़ जाती है। जिससे भी कंसीव करने में दिक्कत होती है। इससे गर्भधारण की क्षमता प्रभावित होती है। यह आपके ऑव्यूलेशन फेज पर भी असर डालता है इसलिए अपने वजन को नियंत्रण में रखें। 

ये भी पढ़ें – 

एग फ्रीजिंग – जानिए क्या है पूरा प्रोसेस, सही उम्र, खर्च और इसके फायदे

प्रेगनेंसी सम्बन्धी यह आलेख आपको कैसा लगा ?  अपनी प्रतिक्रियाएं जरूर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही प्रेगनेंसी से जुड़े सुझाव व लेख भी हमें ई-मेल करें- editor@grehlakshmi.com