हालांकि हर गर्भवती मां को किसी न किसी का सहारा चाहिए लेकिन पुराने व लंबे रोग से ग्रस्त गर्भवती को इसकी अधिक जरूरत पड़ती है। हालांकि आप अपने रोग के बारे में सब जानती हैं लेकिन गर्भावस्था में उसके सारे नियम कानून व दवाएं बदल जाते हैं। आपको निम्नलिखित सहारों की जरूरत पड़ सकती हैः

मेडिकल सपोर्ट :- आपको गर्भधारण से पूर्व ही डॉक्टर के पास जाकर राय लेनी होगी ताकि अपने रोग को काबू में कर सकें। इसके अलावा आपको अपने प्रसूति विशेषज्ञ के साथ-साथ दूसरे डॉक्टरों को भी टीम में शामिल करना पड़ सकता है वे सब मिलकर आपका व शिशु का ध्यान रखेंगे। सभी डॉक्टरों को एक-दूसरे द्वारा किए गए टेस्ट व रिपोर्ट का पता हो यदि कोई डॉक्टर नई दवा दें तो उसे खाने से पहले अपने दूसरे डॉक्टरों की भी राय लें लें।

इमोशनल सपोर्ट :- आपको इस समय ढेर सारे इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होगी। जब आप ढेर सी दवाओं, टेस्ट व डाइट प्लान से घबरा जाएं तो आपको रोने के लिए कंधा चाहिए। आप अपने साथी पति से इस बारे में मदद ले सकती हैं। अपने दोस्तों रिश्तेदारों की मदद लें। यदि किसी ऐसी मां से मिल सकें, जो आपकी तरह इसी रोग से ग्रस्त रही हो तो आपकी काफी जिज्ञासाएं शांत हो जाएंगी। वे आपको कई ऐसे सुझाव दे सकती हैं, जो सचमुच काम आएंगे।

फिजिकल सपोर्ट :- आपको ढेर सा फिजिकल सपोर्ट भी चाहिए यानी कोई आपके लिए खरीदारी करे, घर में खाना पका दे, मैले कपड़ों का ढेर धो दे। ऐसी मदद लेने में संकोच न करें यदि कोई नौकरानी/आया रख सकें तो और भी बेहतर होगा।

 

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