हर दिन लाखों लोगों को माइग्रेन का दौरा पड़ता है, जिससे उसका काम-काज, घरेलू और सामाजिक जीवन प्रभावित हो जाता है। पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों को यह रोग अधिक होता है। ज्यादातर युवा तथा प्रौढ़ इसके शिकार होते हैं। यह बीमारी बहुत आम है और किसी भी व्यक्ति को कभी भी हो सकती है।

  यद्यपि इस बीमारी का सही कारण पूर्णतः ज्ञात नहीं है, किंतु यह माना जाता है कि मस्तिष्क की रक्त-धमनियों में सिकुड़न और उसके बाद फैलाव के कारण जो गड़बड़ी होती है, उससे देखने में तकलीफ होती है और सिर में भी भयंकर दर्द होने लगता है। माइग्रेन मुख्यतः निम्न कारणों से होता है:

  1. चॉकलेट, पनीर या शराब आदि के सेवन के बाद शरीर में मौजूद ‘ऐमीन’ का लेवेल बढ़ जाता है। यह ऐमीन रक्त-धमनियों को प्रभावित करता है जिससे भयंकर सिर दर्द हो जाता है ।
  2. मानसिक तनाव से।
  3. ब्लड-शूगर का लेवेल अत्यंत कम होना। बहुत देर तक भूखे रहने या अत्यधिक मीठा या चर्बीयुक्त भोजन करने से भी ऐसा हो सकता है।
  4. धुंआ भरे बंद कमरे में रहने से।
  5. गर्म-शुष्क हवा के प्रभाव से।
  6. मोनो-एमीनो एंजाइम की कमी के कारण मासिक धर्म के समय शरीर में होने वाले हार्मोन-परिवर्तन से तथा पिल से प्राप्त हार्मोन के कारण।
  7. माइग्रेन से ग्रस्त लोगों को ब्लड-प्रेशर बढ़ने या सिर यागर्दन में हल्की चोट लगने पर भी माइग्रेन हो जाता है।
  8. कुछ खास किस्म के भोजन के बाद भी कुछ लोगों को माइग्रेन हो जाता है।

लक्षण

  माइग्रेन आम सिर दर्द से भिन्न है और इसका लक्षण अलग-अलग रोगियों में अथवा अलग-अलग दौरे में भिन्न हो सकता हैं। फिर भी साधारण सिर दर्द और माइग्रेन की भिन्नता को समझने के लिए यह स्मरण रहे कि माइग्रेन में आधे सिर में दर्द होता है जो एक आँख के ऊपर या पीछे सिर के एक ही ओर होता है। इसके साथ मिचली आना, धुंधली दृष्टि, रोशनी और शोर बर्दाश्त न कर पाना आदि लक्षण जुड़े होते हैं। कभी-कभी रोगी का शरीर कांपता है, चक्कर आता है, बोलने में तकलीफ होती है तथा अजीब-अजीब दृश्य देखने जैसा अहसास होता है।

खतरा
  माइग्रेन एक तकलीफदेह बीमारी जरूर है, पर खतरनाक नहीं। किंतु माइग्रेन के अटैक के दौरान कोई भी वाहन चलाना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि उस समय दृष्टि स्पष्ट नहीं रहती और दूरी तथा दिशा का सही अंदाज कर पाना मुश्किल होता है । जिन्हें पहले माइग्रेन की शिकायत नहीं थी, यदि उन्हें बार-बार भयंकर सिर दर्द होने लगता हो तो डॉक्टर की राय लेनी चाहिए और यह निश्चय कर लेना चाहिए कि सिर  में रक्त का थक्का जमने या ट्यूमर जैसे भयंकर कारणों से तो यह सिरदर्द नहीं है ?

इलाज
  ऐलोपैथी दवाओं से साइड-इफेक्ट होता है, अतः बिना चिकित्सक की राय के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। अटैक के प्रारम्भिक चरण में जठर ठीक से काम नहीं करता, अतः दर्द नाशक दवाएं लेने से पहले मिचली और कै की संभावना को रोकने की दवा लेनी चाहिए।

परहेज –

  • माइग्रेन का सबसे अच्छा इलाज परहेज है ।
  • यह जानने के लिए कि आपको माइग्रेन का अटैक क्यों हुआ, एक डायरी रखें, जिसमें अटैक से पहले के चौबीस घण्टे में लिए गये भोजन तथा तनावपूर्ण बातों का विवरण लिखें। इससे आप क्रमशः यह जान जाएंगी कि कौन-सा भोजन लेने या न लेने से आप बीमार होती हैं।
  • यदि आंखों की थकान के कारण ऐसा हो, तो अपने चश्मे का पावर चेक कराएं।
  • अत्यधिक थकान, भीड़, दमघोंटू जगह आदि के कारण माइग्रेन हो, तो भविष्य में इनसे बचें।
  •  तनाव से बचें । घरेलू जीवन, व्यक्तिगत संबंध, नौकरी-पेशा की उलझनों से उत्पन्न तनाव से माइग्रेन हो जाता है। अतः आप ऐसी स्थितियों में न पड़ें, जिससे आप पर बहुत मानसिक दबाव आ जाए।
  • तनाव कम करने के लिए मन-ही-मन घुमड़ने के बजाए अपने मन की बातों और समस्याओं को लेकर संबंधित व्यक्ति या मित्र से बातचीत करें। हल्के व्यायाम या योगाभ्यास से भी शरीर में स्फूर्ति आती है और तनाव कम होता है।
  • नियमित मेडिटेशन भी लाभप्रद होता है।

अटैक के दौरान

  बिना तकिया के, बिस्तर पर सीधी लेटें। कमरे में शोरगुल या आवाज न हो। रोशनी बुझा दें। सिर, गर्दन, कंधे, पीठ और पेट में हल्का मसल दिया जाए तो आराम मिलता है। नाक तथा सिर के पल्स प्वाइंट तथा कनपटियों के पीछे उंगलियों से दबाने से दर्द से अस्थायी छुटकारा मिल सकता है। यदि माइग्रेन मानसिक तनाव के कारण है, तो मन में दबी हुई बातों को तुरंत किसी से उगल दीजिए। पूरी सांस खींचें और पूर्ण विश्राम लें। सिर में हथौड़ा पीटने जैसा दर्द हो तो आइस-बैग अथवा ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें, इससे राहत मिलेगी। कुछ लोगों को माइग्रेन आनुवांशिक होता है। इसका कोई स्थायी निदान नहीं है किंतु परहेज और एहतियात से उसे अवश्य नियंत्रण में रखा जा सकता है।

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