• रात में सोने से पूर्व व प्रात:काल उठकर शौच करने के बाद ब्रश, दातुन अवश्य करें। कुछ भी खाने के बाद कुल्ला (नमक के पानी से) अवश्य करें।
  • भोजन तभी करें जब बहुत तेज भूख लगी हो। भूख से थोड़ा कम ही खाएं। भोजन सात्त्विक शुद्ध पदार्थों से निर्मित ही करें।
  • अधिक तीखा, खट्टा, मसालेदार, चिकनाई युक्त भोजन स्वास्थ्य का शत्रु है। 
  • भोजन से सलाद, कच्ची व हरी सब्जियां, दूध-दही, फल सभी वस्तुओं को थोड़ा-थोड़ा शामिल करें।
  • आहार को अधिक पीसने, तलने, भूनने से उसके स्वाभाविक गुण नष्ट हो जाते हैं। दाल, शाक, फल छिलके सहित खाएं। 
  • अंकुरित दालें, चना, गेहूं में थोड़ा सा नींबू, टमाटर, हरी मिर्च बहुत हल्का नमक मिलाकर खाएं तो स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा रहता है। मांसपेशियां पुष्ट होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
  • सब्जियों को काटने से पहली ही अच्छी प्रकार धो लें। फिर काटने के बाद भी दो बार धोएं। दालों को ठीक से बीनकर बनाएं।
  • सप्ताह में एक दिन उपवास रखें। उपवास वाले दिन नींबू, छाछ, दूध, फल, सलाद आदि ही लें। गरिष्ठ भोजन या प्रतिदिन लिया जाने वाला भोजन दिन में एक बार भी न करें। पानी खूब पीएं।
  • प्रात:काल रात को तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल अथवा ताजा जल गुनगुना करके, दो गिलास अवश्य पिया करें। उसके बाद ही शौच जाने की आदत डालें। प्रात:काल चाय न पीएं। प्रात:काल इस प्रकार जल सेवन अनेक रोगों से बचाता है और शरीर से विषैले तत्त्वों को धो डालता है।
  • भोजन करते समय व भोजन से आधा घंटा पूर्व तथा एक घंटे बाद तक जल न पीएं। पीना भी पड़े तो एक-दो घूट ही पीएं।
  • भोजन के साथ जल के स्थान पर दही, म_ा, छाछ, जूस कुछ भी ले सकते हैं।
  • प्रात:काल, शौचादि से निवृत होकर टहलना व्यायाम माना गया है।
  • प्रात:काल टहलते समय नाक से गहरी-गहरी सांस लिया करें। हृदय रोगी चिकित्सक से सलाह करके ही टहलने जाएं।
  • टहलने के बाद, घर के आस-पास शाक, क्यारी, फुलवारी आदि लगाकर उनमें थोड़ा कार्य करें।
  • जवान लोग प्रात:काल धीरे-धीरे दो-तीन कि.मी. की दौड़ लगाया करें। सूर्य नमस्कार एक अच्छा व्यायाम है।
  • प्रात:काल भारी नाश्ता वे ही लें जिन्हें दिन भर कठोर शारीरिक श्रम करना है।
  • प्रात:काल नाश्ते में अंकुरित अनाज, दूध, छाछ और कोई फल भी ले सकते हैं।
  • चार बादाम, चार मुनक्के, दो काली मिर्च रात में भिगोकर, प्रात:काल सिलबट्टे पर पीसकर नियमित गुनगुने दूध से लें। दिमाग, दृष्टि में दम-खम के लिए सर्वश्रेष्ठ नुस्खा है।
  • चॉकलेट, टॉफी, आइसक्रीम, च्यूइंग गम, बबलगम जैसी वस्तुएं दांतों को गला देती हैं। इनका सेवन न स्वयं करें, न बच्चों को करने दें।
  • सप्ताह में कम से कम एक दिन, स्नान से एक घंटा पूर्व, सारे शरीर की शुद्ध पीली सरसों के तेल से या जैतून के शुद्ध तेल से हल्गी-हल्की मालिश करें। शरद ऋतु में ऐसा सप्ताह में दो बार करें। तत्पश्चात्ï रगड़-रगड़ कर स्नान करें। 
  • कभी भी भोजन करने के फौरन बाद स्नान न करें। भोजन के तीन घंटे बाद ही स्नान करें।
  • जहां तक हो सके, स्नान ठंडे पानी से ही करें। गठिया जोड़ों के दर्द के रोगी गुनगुने पानी से स्नान कर सकते हैं।
  • पानी में स्नान से थोड़ी देर पूर्व नीम  की कुछ पत्तियां, थोड़ी सी देसी गुलाब की पंखुड़ियां तथा आधा नींबू का छिलका डाल दें। 15-20 मिनट बाद स्नान करें। समस्त त्वचा रोगों से रक्षा हो जाती है व शरीर का रोम-रोम ताजगी से परिपूर्ण हो जाता है।
  • सिर की मालिश सप्ताह में तीन बार करें। सिर में साबुन, शैम्पू के स्थान पर मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करें। 
  • भोजन करने के दस मिनट बाद, दोनों समय, मूत्र त्याग अवश्य करें। ऐसा करने से मूत्र व अन्य संबंधित विकारों से बचा जा सकता है।
  • किसी भी प्रकार के नशे से, चाहे व शरीर का हो, मन का हो या विषयों का हो, बचें। तम्बाकू, धूम्रपान, बीड़ी, सिगरेट, शराब, हेरोइन, स्मैक, इंजेक्शन, गोलियां आदि का प्रयोग कदापि न करें। यह जहर तन-मन व परिवार सभी को जला डालता है।
  • जीवनसाथी से ही शारीरिक सम्पर्क बनाएं, शादी से पूर्व ब्राहृचर्य का पालन करें अन्यथा एड्स या रतिरोग हो सकते हैं और फिर जीवन भर पछताना पड़ता है।
  • नींद कम से कम 6 घंटे की आवश्यक है।

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