सवाल उठता है पानी जरूरी क्यों? इसको पीने से किन-किन बिमारियों से दूर रहा जा सकता है। साथ ही कम पीने से क्या नुकसान होते हैं। एक दिन में कितना पानी पीना चाहिए और कैसे? आइए जानते है। 

पानी जरूरी क्यों?

पानी शरीर के लिए जरूरी है, क्योंकि हमारे शरीर में पूरे वजन का 50 से 75 प्रतिशत पानी होता है। शरीर के मुख्य अंगों में पानी की सप्लाई उनकी जरूरतों के अनुसार होती है। कई अंग अपने चारों ओर स्थित पानी में केमिकल तत्त्व डिस्चार्ज करके अन्य अंगों की मदद करते है। पानी ही है जो शरीर के तापमान व त्वचा की बनावट को सामान्य बनाए रखता है। ‘टॉक्सिन’ को पसीने, पेशाब व सांस के जरिये बाहर निकालता है। यह खून व लसीका के जरिए अंदरूनी अंगों की लाइनिंग में चिकनाई को बनाता है। हमारे शरीर में लगभग 30 लाख ग्रंथियां हैं जो तभी एक्टिव होती हैं जब पानी शरीर में पूर्ण रूप से होता है। अन्यथा वे सिकुड़ जाएंगी और शरीर कई प्रकार की बिमारियों से ग्रसित हो जाएगा। पानी प्रोटीन, मिनरल और विटामिनों को घोलने में सहायक होता है। पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि पानी शुद्ध होना चाहिए। हमारे यहां लगभग 70 प्रतिशत लोग पानी की जरूरत से अनजान हैं। जब प्यास लगती है तभी पानी पीते हैं। ज्यादातर बिमारियों की वजह शरीर में पानी की कमी ही होती है। हमारे शरीर का 65 से 70 भाग जल ही तो है। शरीर के उत्तकों में जल की अलग-अलग मात्रा पाई जाती है। शरीर की बनावट, लिंग व वजन आदि के आधार पर ही किसी व्यक्ति के शरीर में जल की मात्रा पता चलती है। जरा ध्यान दें-

पानी की कमी का प्रभाव

1. 1 से 2 प्रतिशत कमी आने पर- प्यास जोर से लगती है।

2. 5 प्रतिशत कमी आने पर- त्वचा में सिकुड़न, मुंह व जीभ सूखना, दृष्टिभ्रम।

3. 15 प्रतिशत कमी आने पर- मृत्यु भी हो सकती है।

शरीर में पानी से लाभ

शरीर उत्तकों व पेशियों को आपस में चिपकने से रोकता है। यह पाचन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुंह में पैदा होने वाली लार, भोजय को लुगदी बनाकर भीतर ले जाने में मदद करती है। पानी पाचक रस बनाता है और अमाशय में भोजन सामग्री को घोल में बदल देता है। पानी आयनीकरण का एक अच्छा माध्यम है। यह शरीर की हर कोशिका का एक हिस्सा है तथा हड्डियों के बीच के जोड़ों को चिकना बनाए रखता है। मस्तिष्क मेरु द्रव में भरा जल, तंत्रिका तंत्र को चोट लगने से बचाता है।

यह मल-मूत्र व पसीने के जरिए शरीर के जहरीले तत्त्वों को बाहर निकाल देता है। हम जल ग्रहण करते रहते हैं और वह शरीर से बाहर निकलता रहता है। यदि जल का निष्कासन व प्रतिस्थापन एक सा हो तो इनका संतुलन बना रहता है।

पानी ही शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करता है व शारीरिक उष्मा को शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाता है। यह कोशिकाओं की दीवारों से पोषक तत्त्वों के अणुओं के प्रवेश को संभव बनाता है। शरीर में पैदा होने वाले व्यर्थ पदार्थों के उत्सर्जन में मदद करता है तथा शरीर में अम्लीयता व रसायनिक बनावटों में होने वाले अनियंत्रित बदलाव को रोकता है।

कब्ज करे दूर

यह सच है कब्ज कई बिमारियों की जड़ है। ‘कब्ज को दूर करने का सही तरीका है पानी का खूब सेवनÓ इसके लिए जरूरी है खाना खाने से आधा घंटे पहले पानी पिएं, फिर खाने के दौरान दो-चार घंूट पानी पिएं व खाने के आधें घंटे बाद पुन: पानी पिएं। इसके दो घंटे बाद पानी पिएं। ऐसा करने से बचा हुआ खाना भी पच जाता है व शरीर का तापमान नियमित रहता है। साथ ही सवेरे उठते ही कम से कम आधा लीटर सामान्य पानी अथवा गुनगुना पानी पिएं। कब्ज नहीं रहेगा। पानी कम पीने की स्थिति में मल आंतों में चिपकता रहता है जो कई बिमारियों की जड़ बनता है। जैसे-गैस बनना, एसिडिटी होना आदि।

मोटापा भगाए

कहते है कि शरीर में पानी की कमी होने पर खाने की इच्छा ज्यादा होने की संभावना रहती है। और पानी से प्राप्त होने वाली अतिरिक्त ऊर्जा यूरिन के रूप में बाहर निकल जाती है। भोजन का केवल पांचवां हिस्सा ही दिमाग को प्राप्त हो पाता है। बाकी जमा हो कर मोटापे का कारण बनता है। इसलिए पानी की पर्याप्त मात्रा पीने से वसा जल्दी पचती है और फालतू वसा शरीर से बाहर निकल जाती है। ऐसे में वजन कंट्रोल में रहता है।

दमा और एलर्जी में हो फायदा

पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर दमा व एलर्जी में आराम मिल सकता है। दमा में, सांस नली व फेफड़ों में कफ जम जाता है, जिसको पानी से वमन क्रिया द्वारा बाहर निकाला जाता है। इसी तरह कम पानी पीने से शरीर में एलर्जी हो जाती है, उदाहरण के रूप में मुहांसों का निकलना। इसके लिए खूब पानी पीकर इनको रोका जा सकता है। दमा में ठंडे पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। चिकित्सकों का मानना है कि दमें के मरीजों को 8-10 गिलास या इससे ज्यादा पानी पीना चाहिए, जिसमें चुटकी भर नमक हो तो अच्छा है। क्योंकि नमक शरीर में पानी को नियंत्रित करता है।

सर्दी-जुकाम में हो आराम

बहती नाक, गले में दर्द व खराश, हल्का बुखार यही है सर्दी-जुकाम की निशानी। वैसे तो सर्दी-जुकाम के जरिये शरीर के ‘टॉक्सिन’ बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में शरीर को ज्यादा से ज्यादा पानी की जरूरत होती है। कम पानी की वजह से ‘डिहाड्रेशन’ हो सकता है। अत: सर्दी-जुकाम में खूब पानी पीना चाहिए।

इससे फेफड़ों के आसपास ‘म्यूकस’ की परत पतली व चिकनी हो जाती है और बलगम आसानी से बाहर आ जाता है। पानी बलगम को हल्का करता है, जिससे गले की खराश भी दूर होती है। पानी की ज्यादा मात्रा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।

किडनी स्टोन व मूत्राशय संक्रमण से बचाव

कम पानी के सेवन से किडनी में स्टोन व मूत्राशय संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है, क्योंकि कम पानी पीने से पेशाब कम बनेगा दस-बारह गिलास पानी पीने से यूरिन सक्रिय व इंफेक्शन रहित होता है। किडनी में बैक्टीरिया व अत्यधिक प्रोटीन बनने से उसमें क्रिस्टल जैसे पदार्थ पनपने लगते हैं, जिन्हें स्टोन या पथरी कहा जाता है। ज्यादा पानी पीने से इससे बचाव संभव है।

हाई ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल से दे राहत

आज केबदलते लाइफ स्टाइल की वजह से हृदय रोगियों की संख्या में अच्छा-खासा इजाफा हो रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह है ‘कोलेस्ट्रॉल’ की अधिकता व हाई ‘ब्लड प्रेशर’। पानी सही मात्रा में पीने से उसका चिपचिपापन कोशिका की दीवारों को आपस में बांध कर रखता है। ‘डिहाइड्रेशन’ होने पर इसकी कमी हो जाती है और हमारे सिस्टम में कोलेस्ट्रॉल ज्यादा बनने लगता है, जिससे इसका स्तर बढ़ जाता है। धमनियों की बाहरी सतह मोटी और सख्त हो जाती है। रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है। हृदय में रक्त कम पहुंच पाता है और ऑक्सीजन भी कम पहुंचती है, फिर दिल का दौरा पड़ सकता है। पानी अधिक पीने से रक्त पतला रहेगा तो कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी कम हो जाएगी। हल्का गुनगुना पानी पिएं तो बहुत अच्छा। यदि यह संभव न हो तो चार-पांच बार तो गरम पानी पिएं ही ताकि वसा बाहर निकल जाए, इससे ब्लड प्रेशर भी नियमित रहेगा और कोलेस्ट्रॉल भी।

जोड़ों के दर्द में आराम

जोड़ों का दर्द भी पानी की कमी से होता है, क्योंकि जोड़ों में लोच कम हो जाता है। ऐसे में ठंडी व गरम पानी की पट्टी से बड़ा आराम मिलता है। पंद्रह मिनट ठंडी व पंद्रह मिनट गरम, फिर ठंडी फिर गरम रखनी चाहिए। 

चेहरे को दे चमक

पानी चेहरे की त्वचा में लोच व चमक बनाए रखता है। ज्यादा पानी पीने से पेट साफ रहेगा तो चेहरे पर झाइयां, मुंहासे व भौवों के चारों ओर काले घेरे से निजात मिलेगी। कहने का मतलब है कि पानी हमारे शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक तत्त्व है, पर जरूरत है शुद्ध व संतुलित पानी पीने की। डाइटीशियन का मानना है कि पानी की मात्रा व्यक्ति की उम्र, लंबाई, चौड़ाई काम व जीवनशैली पर निर्भर है। जो शारीरिक श्रम ज्यादा करते हैं उन्हें ज्यादा पानी पीना चाहिए। बुजुर्ग लोग जिनको ज्यादा पानी पीने से बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है वह सात-आठ गिलास पानी लें, जिसमें जूस, कोकोनट वाटर, सूप आदि शामिल हैं। इसके अलावा बुखार में खूब पानी पीने से एनर्जी मिलती है। ध्यान रहे कम पानी पीने से पेशाब का रंग गाढ़ा पीला होगा, पेशाब में जलन होगी और पेशाब के समय रक्त भी आ सकता है। अत: खूब पानी पिएं और स्वस्थ रहें। 

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