लहसुन के पौधे लता के रूप में पाए जाते हैं। इसके पत्ते पतले और लंबे होते हैं। नीचे जड़ में से जो कंद निकलता है, वही लहसुन कहलाता है। लहसुन की गंध बहुत तीव्र होती है। यह स्निग्ध, उष्ण, उत्तेजक, रुक्ष, गरम, कटु और तीक्ष्ण होता है। इसे पुष्टिकारक, शक्तिदायक और वीर्यवर्द्धक कहा जाता है। लहसुन में सैकड़ों स्वास्थ्यवर्द्धक गुण होने के कारण यह अमृत के समान है। आयुर्वेद की अनेक औषधियों में इसका प्रयोग किया जाता है।

लहसुन कंठशोधक, पाचक, दस्तावर, मेधा के लिए हितकारी तथा भग्न स्थान को जोड़ने वाला है। यह वायुगोला, भोजन के प्रति अरुचि, सूजन, बवासीर, मंदाग्नि, कुष्ठ, दमा, कफ, जीर्ण ज्वर, मलेरिया तथा हृदय रोगों के लिए रामबाण है। लहसुन के सेवन से चेहरे पर चमक आती है। कीटाणुओं का नाश होता है और बुढ़ापे का प्रभाव दूर होता है। यह शारीरिक व्याधियों से छुटकारा दिलाने में भी कारगर है। इससे धमनियों में खून जमने नहीं पाता। लहसुन हृदय रोग और कैंसर से भी बचाव करता है। इसके प्रमुख औषधीय गुण इस प्रकार हैं-

  • लहसुन के सेवन से कैंसर की कोशिकाएं नष्ट होती है। इससे कैंसर के विरुद्ध सुरक्षा कवच बन जाता है।
  • लहसुन को कुचलकर खाने तथा बार-बार सूंघने से नजला और जुकाम दूर हो जाता है।
  • एक कली लहसुन, चार पत्ती तुलसी, चार काली मिर्च और एक चुटकी सेंधा नमक इन सबका काढ़ा बनाकर पीने से इंफ्लूएंजा शांत हो जाता है।
  • नित्य रात में कुछ सप्ताह तक सोने से पूर्व एक कली लहसुन चबाकर निगलने से स्वप्नदोष दूर होता है।
  • आधे कप उबले दूध में लहसुन की 4-5 पिसी कलियां डालकर पी जाएं। उसके बाद ऊपर से 250 ग्राम मीठा गुनगुना दूध पीने से पीलिया नष्ट होता है।
  • प्रतिदिन लहसुन की एक-दो कली का सेवन करें। हड्डियों की दुर्बलता शीघ्र ही नष्ट हो जाती जाएगी।
  • दो कली लहसुन, एक चम्मच जीरा तथा एक चुटकी काला नमक को पीसकर म_ïे के साथ सेवन करें। एक सप्ताह तक यह नुस्खा प्रयोग करने से संग्रहणी समाप्त होती है।
  • लहसुन और अमचूर को पीसकर बिच्छू के डंक वाले स्थान पर लगाएं। विष का प्रभाव नष्ट हो जाएगा।
  • लहसुन के रस को पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक पीने से जलोदर रोग से छुटकारा मिल जाता है।
  • लहसुन की कुछ कलियों को देशी घी में भूनकर नियमित रूप से खाने पर नपुंसकता दूर होकर स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।
  • बादाम की चार-पांच गिरी को रात्रिकाल पानी में भिगो दें। सुबह उन्हें छीलकर लहसुन की तीन कली के साथ खा जाएं। काली खांसी में काफी लाभ होगा।
  • नमक मिला लहसुन का रस चाटने से पेट दर्द और वायु विकार से छुटकारा मिलता है।
  • 250 ग्राम लहसुन को एक किलो सरसों के तेल में कड़ाही में औटाएं। जब तेल अच्छी तरह पक जाए तो उसे उतारकर ठंडा कर लें। इस तेल से लकवाग्रस्त स्थानों की मालिश करें। काफी लाभ होगा।
  • प्रतिदिन चौथाई चम्मच नीम की पत्तियों के रस में दो बूंद लहसुन का रस मिलाकर सेवन करने से मधुमेेह रोग दूर होता है।
  • प्रतिदिन सुबह-शाम लहसुन की चार कलियों का सेवन शहद के साथ करें। उदर कृमि मरकर बाहर निकल जाएंगी।
  • गरम जल में पिसा लहसुन मिलाकर गरारे करें। बैठा गला खुल जाएगा।
  • रात्रिकाल लहसुन के रस में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाकर सो जाएं। सुबह सिर धो डालें। सारी जुएं मर जाएंगे।
  • लहसुन को भूनकर पीस डालें। फिर इसमें घी मिलाकर दाद-खाज पर लगाएं। शीघ्र लाभ होगा।

 

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