सिर में दर्द होना एक आम स्वास्थ्य समस्या है और इसलिए अक्सर हम इसे नजरअंदाज ही करते हैं। हालांकि, यह देखने में आता है कि सिरदर्द की शिकायत पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं को अधिक होती है। शायद घर के साथ-साथ काम की टेंशन व अन्य कई जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए वह इसकी शिकार हो जाती है। इतना ही नहीं, महिलाएं किसी भी विषय पर बहुत अधिक सोचती हैं, जिससे उनके भीतर का तनाव बढ़ने लगता है और परिणामस्वरूप उन्हें सिरदर्द भी होता है। यूं तो सिरदर्द से निजात पाने के लिए आप दवाई या गोली का सहारा लेती होंगी। लेकिन अगर बार-बार यह समस्या होती है तो हर बार दवाई का सेवन भी आपके स्वास्थ्य को विपरीत तरह से प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सबसे बेहतर उपाय है कि आप सिरदर्द को दूर करने के अन्य विकल्पों पर विचार करें। इन्हीं विकल्पों में से एक है योगाभ्यास। योग के जरिए आप केवल अपने तन को ही नहीं, बल्कि मन को भी संतुलित कर पाती हैं और जब आप अधिक रिलैक्स होती हैं तो सिरदर्द की शिकायत होने की कोई संभावना ही नहीं होती। इतना ही नहीं, नियमित योगाभ्यास आपको सिरदर्द यहां तक कि माइग्रेन के दर्द से भी छुटकारा दिला सकता है। तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसे योगासनों के बारे में बता रहे हैं, जो सिरदर्द में आपको काफी राहत का अहसास करवा सकते हैं-

सेतुबंधासन

यूं तो इस आसन के अभ्यास से महिलाओं को पाचन तंत्र से लेकर मासिक धर्म की समस्याओं तक में राहत मिलती है, लेकिन इस आसन को सिरदर्द के लिए भी बेहद प्रभावी माना गया है। दरअसल, इस आसन के अभ्यास से मस्तिष्क को शांति मिलतीहै और चिंता भी कम होती है। जिससे सिरदर्द में आराम मिलता है।

इस आसन के अभ्यास के लिए सबसे पहले एक हवादार जगह पर मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं और घुटनों को मोड़ लें। ध्यान रहे कि घुटने और पैर एक सीध में रहें और उन दोनों के बीच हल्का सा गैप हो। अब आप सांस लेते हुए, धीरे से अपनी पीठ के निचले, मध्य और फिर सबसे ऊपरी हिस्से को जमीन से उठाएं। याद रखें कि आपको केवल अपने शरीर को उठाना है, आपके दोनों हाथ मैट पर ही होने चाहिए। अब ठुड्डी को हिलाए बिना छाती को ठुड्डी से लगाएं। इस दौरान शरीर के निचले हिस्से को स्थिर रखें। अगर आप पहली बार इस आसन का अभ्यास कर रही हैं तो ऐसे में आप आप अपने हाथों के सहारे शरीर के ऊपरी हिस्से को उठा सकती हैं। लेकिन कमर को झटका बिल्कुल भी ना दें। यथानुसार इस अवस्था में रूकें और फिर सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में लौट आएं।

बालासन

इसे शिशुआसन या चाइल्ड पोज भी कहा जाता है। अगर आप इस आसन का अभ्यास करती हैं तो इससे आपका तंत्रिका तंत्र काफी रिलैक्स होता है है और जिसके कारण सिरदर्द को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद मिलती है। 

इस आसन के अभ्यास के लिए आप सबसे पहले मैट पर घुटने मोड़कर बैठ जाएं, जिस तरह आप वज्रासन में बैठती हैं। इसके बाद आप अपने दोनों हाथों को उपर की ओर उठाएं। अब आप दोनों हाथों को धीरे-धीरे आगे की ओर लाते हुए जमीन की तरफ झुकें। आपको इतना झुकना है कि आपका माथा जमीन को टच करे और आपके हाथ आगे की तरफ हों। कुछ क्षण इसी अवस्था में रूकें। इसके बाद आप सामान्य अवस्था में लौट आएं। आप अपनी सुविधानुसार इस आसन का अभ्यास कर सकती हैं। हालांकि, इस आसन का अभ्यास करते हुए ध्यान रखें कि अगर आपको कमर में दर्द है या फिर आपका ऑपरेशन हुआ है तो इस आसन का अभ्यास ना करें।

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन योगासन महिलाओं के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। इसके नियमित अभ्यास से ना केवल महिलाओं में सिरदर्द की समस्या ठीक होती है, बल्कि यह उनके मातृत्व में भी लाभदायक है। मसलन, अगर किसी महिला को मासिक धर्म संबंधी समस्या हो या फिर उसे बच्चेदानी में समस्या के कारण गर्भधारण में परेशानी हो रही हो तो ऐसे में इस आसन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए।

इस आसन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले दोनों पैरों को आगे की ओर लंबा फैलाकर मैट पर बैठ जाएं। आपके पैर या घुटने मुड़े हुए नहीं होने चाहिए। अब आप अपने दोनों हाथों की मदद से पैरों के अंगूठों को पकड़ने का प्रयास करें। अंगूठों को पकड़ते वक्त इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपकी छाती आपके घुटनों को छू रही हो और आपका सिर नीचे की ओर झुका हुआ हो। आप यथासंभव इस अवस्था में रूकें और फिर सांस छोड़ते हुए पहले की मुद्रा में लौट आएं।

प्राणायाम

सिरदर्द के पीछे की एक मुख्य वजह तनाव होता है। ऐसे में प्राणायाम का अभ्यास करना आपके लिए कई मायनों में लाभदायक है। आपको कई तरह के प्राणायाम जैसे ओम् चैटिंग, कपालभांति प्राणायाम, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम आदि का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। यह आपके शरीर को भीतर से रिलैक्स करते हैं, जिससे आपको तनाव कम होता है और फिर सिरदर्द की शिकायत होती ही नहीं है। इतना ही नहीं, अगर आप नियमित रूप से महज 15 मिनट प्राणायाम करती हैं तो इससे मोटापा कम किया जा सकता है, चेहरे पर गजब का ग्लो आता है, मूड स्विंग्स व चिड़चिड़ापन आदि नहीं होता। प्राणायाम आपको अंदर से हील करने का काम करता है, जिसका असर आपको बाहर भी नजर आता है।

 

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