कमर दर्द आज के समय में महिलाओं के लिए एक आम समस्या बनती जा रही है। खासतौर में, जिन महिलाओं को लंबे समय तक बैठकर काम करना पड़ता है, उन्हें यह समस्या अधिक होती है। इतना ही नहीं, महिलाओं में पुरूषों के मुकाबले जल्दी कैल्शियम खोने लगता है, जिससे उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और फिर उन्हें कमर दर्द की शिकायत होने लगती है। आज के समय में देखा जाता है कि बेहद कम उम्र में ही महिलाएं कमर दर्द को लेकर परेशान होती हैं। ऐसे में वह दर्द से राहत पाने के लिए या तो पेन किलर का सहारा लेती हैं या फिर फिजियोथेरेपी करवाती हैं। हालांकि, इसमें आपका काफी पैसा खर्च हो जाता है। इतना ही नहीं, लगातार पेन किलर का सेवन सेहत पर विपरीत प्रभाव भी डालता है। ऐसे में आप कुछ योगासनों का अभ्यास करें। इससे आपको पहले ही दिन काफी फर्क नजर आने लगेगा। तो चलिए आज हम आपको इन योगासनों के बारे में बता रहे हैं-

ताड़ासन : इसे करना बेहद ही आसान है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए आप पहले सीधे खड़ी हो जाएं। वैसे तो इस आसन में दोनों पैरों को आपस में मिलाया जाता है, लेकिन आप इनके बीच बेहद हल्का सा गैप रखें। अब दोनों हाथों को कंधे की सीध में फैलाएं और फिर उपर की ओर उठाएं। इस स्थिति में आपके हाथ उपर की ओर तने हुए हों और आपके एड़ी भी जमीन से उपर हों। अब पंजों पर बल देते हुए शरीर को उपर की ओर खींचे। इस दौरान शरीर का सारा भार पंजों पर ही हो। कुछ क्षण इस स्थिति में रूकने के बाद सामान्य अवस्था में लौट आएं। आप इस आसन का अभ्यास कम से कम आठ से दस बार करें।

वृक्षासन : ताड़ासन के बाद बारी आती है वृक्षासन करने की। इस आसन को करने के लिए पहले सीधी खड़ी हो जाएं। अब अपने दाएं पैर को मोड़ते हुए बाएं पैर पर शरीर का सारा भार डाल दें। दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाएं और अपने बाएँ पैर के साथ लगा दें। अपने दोनों हाथ को उपर की ओर खींचते हुए प्रार्थना मुद्रा में लें जाएं। इस कुछ क्षण इसी मुद्रा में रहें। इसके बाद सामान्य अवस्था में लौट आएं और फिर दूसरे पैर से भी यही प्रोसेस दोहराएं।

कटिचक्रासन : इस आसन का अभ्यास भी पैर जोड़कर किया जाता है, लेकिन बैक पेन वाली महिलाओं को पैरों के बीच में थोड़ा गैप रखना चाहिए। सबसे पहले आप सीधी खड़ी हो जाएं। इसके बाद आप सांसों को अंदर लेते हुए, हथेलियां एक दुसरे के सामने रखते हुए अपने हाथों को सामने समानांतर करें। आपके हाथों और कन्धों की दूरी समान होनी चाहिए। इसके बाद आप आप श्वास छोड़ते हुए कमर दाहिनी ओर घुमाएं और बाएं कंधे से पीछे की ओर देखें। इस दौरान आपके पैरों को एक ही जगह पर रखें। अब श्वास लेते हुए पुनः सामने की ओर घूम जाएँ। फिर श्वास छोड़ते हुए इस आसन को बाएँ ओर घुमते हुए दोहराएँ। अंत में सांस लेते हुए पुनः सामने की ओर घूम जाएँ। इस तरह एक चक्र पूरा हुआ। इसी तरह आप दोनों तरफ इस आसन को करें।

तिर्यक ताड़ासन : बैक पेन की समस्या होने पर तिर्यक ताड़ासन को थोड़ा अलग तरीके से किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले आप सीधी खड़ी हो जाए। इसके बाद आप दोनों हाथों को उपर ले जाने के स्थान पर एक हाथ को उपर ले जाएं और दूसरा हाथ नीचे ही रखें। इसके बाद आप हाथों के विपरीत साइड में जितना हो सके, झुकें। इस दौरान घुटनों को मोड़ना नहीं है और कोशिश करें कि आपने जिस हाथ को उपर किया है, झुकते समय उसकी हथेली देखें। कुछ क्षण इस अवस्था में रूकें। फिर वापिस आ जाएं। अब हाथ को नीचे कर लें और दूसरे हाथ से भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

तितलीआसन : इसके बाद आप बैठकर तितलीआसन करें। इसके लिए आप मैट पर बैठ जाएं। अब आप अपने दोनों पैरों के पंजों को आपस में मिला लें। अब आप दोनों हाथों से दोनों पंजों को पकड़ें और फिर पैरों को जोर-जोर से हिलाएं। इस तरह आपकी मुद्रा एक तितली की भांति हो जाएगी।

पवनमुक्तासन : यह आसन बैक पेन के साथ-साथ पेट से जुड़ी परेशानियों से भी राहत दिलाता है। इसके लिए आप सबसे पहले मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। अब आप अपने दोनों पैरों को मोड़ लें और हाथों की मदद से उसे होल्ड करें। आमतौर पर पवनमुक्तासन के अभ्यास के दौरान गर्दन को भी उपर उठाया जाता है और घुटने को नाक से छूने की कोशिश की जाती है। लेकिन अगर आपको बहुत अधिक कमर दर्द है या फिर सर्वाइकल की समस्या है तो ऐसे में गर्दन को ना उठाएं। कुछ देर इस स्थिति में रूकें और फिर वापिस सामान्य अवस्था में लौट आएं। आप पवनमुक्तासन का अभ्यास पहले एक-एक पैर से और फिर दोनों पैरों से करें।

मर्कटासन : कमरदर्द के लिए यह आसन किसी चमत्कार से कम नहीं है। आपको चाहे कितना भी अधिक कमर दर्द हो, इसके अभ्यास से तुरंत ही राहत का अहसास होता है। इतना ही नहीं, यह पेट की चर्बी कम करने के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। मर्कटासन का अभ्यास करने के लिए आप सबसे पहले मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। अब आप अपने दोनों पैरों को घुटने से मोड़ें और दोनों हाथों को सीधा फैला लें। ध्यान रखें कि आपकी हथेलियां खुली हों और आकाश की तरफ हों। साथ ही दोनों पैरों के बीच भी हल्का सा गैप रखें। इसके बाद आप अपने पैरों को दाईं तरफ मोड़ें और गर्दन को बाईं तरफ ले जाएं। इससे आपको अपनी कमर में एक ट्विस्ट महसूस होगा। कुछ देर इसी अवस्था में रूकें। इसके बाद वापिस आ जाएं। अब आप पैरों को बाईं तरफ मोड़ें और गर्दन को दाईं तरफ ले जाएं। इसी तरह दोनों साइड से इस प्रक्रिया को दोहराएं।

नोट-

  • इन सभी आसनों का अभ्यास इसी क्रम में करें। मसलन, ताड़ासन के बाद वृक्षासन का ही अभ्यास करें और मर्कटासन से पहले पवनमुक्तासन का। आसनों का क्रम ना बदलें।
  • शुरूआत में आप अपनी क्षमतानुसार इनका अभ्यास कर सकती हैं। धीरे-धीरे इनका क्रम बढ़ाती जाएं।
  • इन योगासनों के बाद प्राणायाम जैसे ओम् चैंटिंग, कपालभांति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम आदि का अभ्यास करने से आपको अतिरिक्त लाभ मिलता है।
  • बहुत अधिक कमर दर्द होने पर आप पैरों को हल्का खोलकर ही योगासनों का अभ्यास करें। व प्राणायाम करते समय आप कमर के पीछे कुशन अवश्य लगाएं।

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