सेतुबंधासन :- 

समतल जगह पर चटाई बिछा लें। फिर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। फिर दोनों पैरों के घुटनों को 90 डिग्री तक मोड़ें। अब दोनों हाथों की हथेली से दोनों पैरों की ऐडिय़ों को पकड़ें। फिर सांस रोककर छाती वक्ष को ऊपर की तरफ लें जाएं। फिर सांस धीरे धीरे छोड़ें। 2 मिनट तक 90 डिग्री में शरीर को स्थिर रखें। बाद दोबारा समतल पुन: साधारण लेटी स्थिति में आ जाएं। इसी तरह से 4-5 बार सेतुबंधासन करें।

धनुरासन :-

आसन पर पेट के बल लेट जाएं। पैरों को घुटनों में मोड़कर एडियों को कूल्हों पर ले आएं। दोनों पैरों के टखनों को हाथों से पकड़ें। अब हाथों को सीधा रखते हुए पैरों को पीछे की ओर खींचना है और कूल्हों के ऊपर उठाना है। यह क्रिया करते समय श्वांस अंदर लेनी है। इसी समय जांघों को और सिर को जमीन से जितना ऊपर उठा सकते हैं उतना अपनी क्षमतानुसार प्रयास करें। दोनों घुटनों को साथ रखने का प्रयास करें। यह क्रिया आप अपनी क्षमतानुसार 10 से 20 सेकंड तक करें और इस दरम्यान दीर्घ श्वसन लेना और छोडऩा चालू रखें। अगर आप जांघों को नहीं उठा सकते हैं तो केवल सिर भी उठा सकते हैं। इसे सरल धनुरासन कहा जाता हैं। अंत में श्वांस छोड़ते हुए पैरों को और सीने को जमीन पर धीरे से रखना है।

बालासन :-

पालथी लगाकर अपनी ऐडिय़ों पर बैठें और शरीर के ऊपरी भाग को जंघाओं पर टिकाएं। सिर को जमीन से लगाएं। अपने हाथों को सिर से लगाकर आगे की ओर सीधा रखें और हथेलियों को जमीन से लगाएं। अपने हिप्स को ऐडिय़ों की ओर ले जाते हुए सांस छोड़ें। इस अवस्था में 15 सेकेण्ड से 2 मिनट तक रहें।

विन्यास आसन :-

इस आसन को करने के लिए शुरुआत करें पर्वतासन से। इस दौरान श्वांस सामान्य रखें और आसन में आने के बाद पांच बार गहरी श्वास लें और छोड़ें। पर्वत आसन करने के लिए जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। अब बाजू की मदद से नितंब और कमर के हिस्से को ऊपर उठाएं और सिर जमीन की दिशा में रखें। इस दौरान शरीर का आकार पर्वत जैसा होता है। अब शरीर के निचले हिस्से को जमीन पर लाएं और अग्रभाग को ऊपर करें। शरीर का सारा भार हाथों पर दें और अग्रभाग को अधिक से अधिक स्ट्रेच करने का प्रयास करें। इस अवस्था में पांच बार गहरी श्वांस लें। इसे भुजंगासन की अवस्था कहेंगे। अब अग्रभाग को नीचे लाएं और शरीर को हथेली व पंजों के बल जमीन से एक बित्ते की दूरी पर रखकर पांच बार गहरी श्वास लें। ठीक वैसा जैसा ह्रश्वलैंक में करते हैं। इसे कुंभक आसन कहेंगे। इसके बाद पुन: पर्वतासन की मुद्रा में आएं और यह चक्र दोहराएं।

शीर्षासन :-

इस आसन को करने के लिए के सर्वप्रथम दरी बिछा कर समतल स्थान पर वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएं। इसके पश्चात आगे की ओर झुककर अपने दोनों हाथों की कोहनियों को जमीन पर टिका दें। अब अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ लें। फिर सिर को दोनों हथेलियों के बीच में धीरे-धीरे रखें। इस वक्त सांस सामान्य रखें। सिर को जमीन पर टिकाने के पश्चात धीरे-धीरे शरीर का पूरा भार सिर पर छोड़ते हुए शरीर को ऊपर की ओर उठाएं। शरीर का भार सिर पर लें और शरीर को सीधा कर लें। शरीर की इस अवस्था को शीर्षासन कहा जाता है। यह आसन सिर के बल किया जाता है, इसलिए ही इसका नाम शीर्षासन है।