नवरात्र सबसे बड़े हिन्दू त्योहारों में से एक है। यह त्योहार, नौ दैवीय रूपों की पूजा करने के लिए समर्पित है। इन 9 दिनों के दौरान देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और साथ ही व्रत उपवास का भी दौर शुरू हो जाता है। कुछ भक्त नौ दिनों तक उपवास करना चुनते हैं, कुछ भक्त केवल नवरात्र के पहले और अंतिम दिन उपवास करना पसंद करते हैं।

नवरात्र में उपवास का महत्व 

नवरात्र में उपवास करना शरीर के पाचन तंत्र के लिए उपयुक्त है। भारतीय तीज-त्योहारों में व्रत और उपवास का भी अपना ही महत्त्व है। एक तरफ हम व्रत कर देवी-देवताओं को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो दूसरी तरफ इसके सेहत संबंधी लाभ भी हैं। इससे ब्लड पे्रशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है, शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है और वजन नियंत्रित रहता है। लेकिन उपवास में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है नहीं तो सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

नवरात्र में खाएं

  • सेब, अनार और कीवी, मौसमी फलों का आनंद लेने के लिए शायद यह सबसे अच्छा समय है। इन फलों के रस से आपको आवश्यक फाइबर प्राप्त होंगे। आप एक त्वरित फल चाट बना सकते हैं या उन्हें दही के साथ खा सकते हैं। पपीता, नाशपाती, और सेब आदि से ऌफ्रुट सलाद बना सकते हैं।
  • चपाती बनाने के लिए कुट्टू  का आटा या सिंघाड़े का आटा का उपयोग कर सकते हैं।
  • आप व्रत में अपने नियमित चावल नहीं ले सकते हैं। हालांकि, आप पुलाव, खिचड़ी और खीर बनाने के लिए सामक के चावल या संवत के चावल का उपयोग कर सकते हैं। यह पचने में बहुत आसान है और किसी भी मात्रा में खाया जा सकता है।
  • उच्च कार्बोहाइड्रेट भोजन को साबूदाना और आलू के साथ बनाए, जो ज्यादातर लौकी, पालक, शिमला मिर्च, टमाटर, गोभी इत्यादि जैसी अन्य सब्जियों के साथ उपवास में उपयोग किया जाता है। इन्हें गहरी ऌफ्राई के बजाय भूनना, ग्रिल या सेंकना सही माना जाता है।
  • मखाना या कमल के बीज के पकौड़े की अभी भी बहुत मांग है। इस व्रत घटक का उपयोग मखाना खीर बनाने के लिए भी किया जा सकता है या आप इसे भुन सकते हैं और इसे एक स्नैक्स के रूप में भी ले सकते हैं।
  • उपवास में सेधा नमक का प्रयोग करें। सेंधा नमक या रॉकसाल्ट का उपयोग करके सभी तैयारियां की जानी चाहिए। सेंधा नमक समुद्री जल को वाष्पित करके बनाया जाता है और इसमें सोडियम क्लोराइड की मात्रा ज्यादा नहीं होती है। यह प्रकृति में शुद्ध माना जाता है।
  • व्रत के दौरान मौसमी और ताजे फलों का खूब सेवन करें। इससे पेट भी भरेगा और वजन भी नियंत्रित रहेगा।
  • इस अवधि के दौरान केवल सात्विक सब्जियों का उपभोग किया जाना चाहिए। शरीर में तामसिक या गर्मी पैदा करने वाली सब्जियों से बचना चाहिए। आलू, टमाटर, लौकी, अरबी, कचालू, नींबू, पालक, ककड़ी और गाजर अकसर व्रत में पसंदीदा सब्जियों के रूप में जाने जाते हैं। आप दही के साथ में लौकी और कद्दू का रायता बना सकते हैं।
  • उपवास में दूध या डेयरी उत्पादों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। आप दूध, दही, पनीर, देसी घी, मलाई, दूध और खोया से बने पकवान खा सकते हैं।
  • पानी, नारियल पानी, मक्खन, हरी चाय, नींबू पानी आदि जैसे कई अन्य तरल पेय पदार्थ का उपभोग किया जा सकता है।

नवरात्र में ना खाएं

  • व्रत से संबंधित भोजन को प्याज या लहसुन के बिना तैयार किया जाना चाहिए क्योंकि वे गर्मी उत्पन्न करते हैं और प्रकृति में तामसिक होते हैं। तली-भुनी चीजें ना खाएं। हल्का एवं सुपाच्य भोजन करें।
  • यदि आप उपवास कर रहे हैं, तो आपको फलियां और मसूर से दूर रखना होगा। चावल का आटा, कॉर्नफ्लोर, गेहू का आटा और सूजी (रवा) की भी अनुमति नहीं हैं।
  • चाय और कॉफी की एक अच्छी मात्रा भूख को रोकने में मदद कर सकती है। हालांकि, सुनिश्चित करें कि आप इन्हें खाली पेट नहीं लेते हैं, यह आपके पाचन तंत्र को काफी प्रभावित कर सकता है। बहुत अधिक चाय या कॉफी का उपभोग करने से आप अकसर सूजन या निर्जलित महसूस कर सकते हैं और अनिद्रा भी हो सकती है।

सुझाव- गर्भवती महिलाएं, मधुमेह और दिल, किडनी एवं लीवर के मरीज व्रत न रखें। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आध्यात्मिक लाभ के साथ-साथ व्रत-उपवास हमारे मन-मस्तिष्क के लिए भी बेहद लाभकारी है। व्रत में भी पौष्टिक आहार ग्रहण कर आप सेहत भी बना सकते हैं और सौंदर्य भी निखार सकते हैं।  

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