मौसम को रोकना या बदल पाना इंसान के बस की बात नहीं पर हम अपनी सूझबूझ व होशियारी द्वारा स्वयं को ऋतु के अनुरूप ढालकर, अपनी दिनचर्या, पहनावा, खानपान, रहन-सहन और बचाव व एहतियात बरतकर इस झुलसती गर्मी में राहत पा सकते हैं। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य पृथ्वी के कुछ नजदीक आ जाता है। जिसके कारण गर्मियों में धरती पर सूर्य की किरणें अपना प्रचंड असर डालती हैं। इस तपन भरी झुलसती गर्मी से न केवल इंसान बल्कि पेड़-पौधे व पशु भी प्रभावित होते हैं। यह भयंकर गर्मी मानव की जीवनचर्या व सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। सूरज की इन रश्मियों के प्रकोप से हमारी कोमल त्वचा भी प्रभावित होती है जिससे कभी-कभी सूजन और खुजली भी होने लगती है। इतना ही नहीं ग्रीष्म ऋतु में इंसान के शारीरिक बल का ह्रïस होता है, भूख कम लगती है और प्यास बढ़ जाती है, क्योंकि जब इंसान प्यास के कारण बार-बार जल ग्रहण करता है तो उसकी भूख स्वत: ही कम हो जाती है। आलस्य व ढीलापन आ जाता है, काम करने का जी नहीं करता, मन उत्साहहीन रहता है, बेचैनी बढ़ जाती है। ऐसे में किस प्रकार का आहार लें आइए जानते हैं।

गर्मियों के जायकेदार व पौष्टिक फल-

गर्मियों में यदि फलों का जिक्र होता है तो हमारे जहन में सबसे पहला नाम फलों के राजा आम का आता है। यह फल स्वाद और पौष्टिकता से तो भरपूर होता ही है पर साथ में अचूक औषधि भी है। तभी तो यह कहावत मशहूर है, ‘आम के आम गूठलियों के दाम। आम का हर हिस्सा उपयोगी है। कच्चा होने पर अचार बनता है, आम पापड़ बनाया जाता है। फिर पक जाने पर लोग आम को ठंडा-ठंडा खाते हैं। बची हुई गुठली की गिरी भी खाई जाती है और कुछ लोग गुठली को भूनकर नमक डालकर  खाते हैं। ग्रीष्म ऋतु में कच्चे आम का पन्ना बनाकर पीने से लू नहीं लगती। इसके अलावा ककड़ी, खीरा, तरबूज, खरबूज, संतरा, अंगूर, लीची, फालसा आदि फल इस मौसम में बहुतायत से मिलते हैं जो शीतल व सुपाच्य होते हैं। इन फलों में जल का अंश ज्यादा होता है जो गर्मी में जल की आवश्यकता को पूरा करता है और शरीर को तृप्ति देता है।

गर्मी में हितकारी सब्जियां- प्रकृति ने हमारे देश को ऐसी नियामत प्रदान की है कि प्रत्येक मौसम के मुताबिक यहां पर फल, सब्जियों व अनाज उपलब्ध होते हैं। गर्मियों में लौकी, तुरई, टिंडा, नींबू, प्याज, पुदीना, का सेवन हितकारी है, क्योंकि यह सब्जियां शीतल होती हैं जो मनुष्य के शरीर के ताप को कम करती हैं।

खान-पान- अपने खान-पान में गर्मी के मुताबिक बदलाव करके हम गर्मी में होने वाले दुष्प्रभावों से बच सकते हैं। प्रकृति की उष्णता के कारण शरीर में जल व क्षारीय पदार्थों की मात्रा कम हो जाती है। इस मौसम में पित्त बढ़ जाता है और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि गर्मी में कम आहार ही लिया जाए, वरना बदहजमी, दस्त, उल्टी, अजीर्ण, हैजा, एसिडिटी आदि बिमारियां घेर लेती हैं। पुरानी मान्यता है कि यदि इस मौसम में दोपहर के वक्त पानी पीने से पहले 1 चम्मच शक्कर या मिश्री खाई जाए तो गर्मी से बचा जा सकता है।

क्या खाएं?

● अन्न हल्का, सुपाच्य, स्निग्ध और शीत प्रकृति का होना चाहिए। जैसे जौ व चने का सत्तू, सादी रोटी, मूंग की दाल, हल्की उबली सब्जी, चावल, दही, लस्सी सलाद आदि।

● ग्रीष्म में चूंकि पसीना अधिक मात्रा में निकलता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ का सेवन आवश्यक होता है। इससे शरीर में जल का संतुलन बना रहता है।

● चंदन, खसखस, गुलाब का शर्बत लाभदायक होता है।

● मैंगो शेक, नींबू पानी, रूह अफजा, ठंडा दूध और फलों का जूस अधिक मात्रा में लेना चाहिए।

● सौंफ, खरबूजे के बीज, खसखस, गुलाब के फूल, मुनक्का, काली मिर्च, शक्कर, दूध आदि से बनी ठंडाई शरीर को ठंडक प्रदान करती है और गर्मी में होने वाली बिमारियों से बचाती है।

●फलों के रस (तरबूज, संतरा, मौसमी में शहद, शक्कर, काली मिर्च और जरा सा सेंधा नमक मिलाकर पीना लाभदायक है।

● आंवले का गूदा, कच्ची कैरी का गूदा, थोड़ी सी इमली, काली मिर्च, सेंधा नमक, चीनी और जल को मिलाकर उसे कपड़े से छानकर नए मिट्टी के बर्तन में भरकर रख दें। इसका सेवन गर्मी में बहुद फायदेमंद है।

● सवेरे शाम एक बड़ा चम्मच आंवले का मुरब्बा, बेल का मुरब्बा और गुलकंद का सेवन शरीर को सुकून प्रदान करता है।

● ग्रीष्म ऋतु में साठी के पुराने चावल, गेहूं, दूध, मक्खन, गौघृत के सेवन से शरीर में शीतलता, स्फूर्ति तथा शक्ति आती है।

● सब्जियों में लौकी, गिल्की, परवल, नींबू, करेला, केले के फूल, चौलाई, हरी ककड़ी, हरा धनिया, पुदीना और फलों में द्राक्ष, तरबूज, खरबूजा, एक-दो केले, नारियल, मौसमी, आम, सेब, अनार, अंगूर का सेवन लाभदायी है।

क्या न खाएं?

इस ऋतु में तीखे, खट्टे, कसैले एवं कड़वे रस वाले पदार्थ नहीं खाने चाहिए। नमकीन, रुखा, तेज मिर्च-मसालेदार तथा तले हुए पदार्थ, बासी एवं दुर्गंधयुक्त पदार्थ, दही, अमचूर, अचार, इमली आदि न खाएं। गरमी से बचने के लिए बाजारू शीतल पेय (कोल्डड्रिंक), आइसक्रीम, आइसफ्रूट, डिब्बाबंद फलों के रस का सेवन कदापि न करें। इसके अतिरिक्त माद्यपान इस मौसम में निषेध है। इनके सेवन से शरीर में कुछ समय के लिए शीतलता का आभास होता है परंतु ये पदार्थ पित्तवर्द्धक होने के कारण आंतरिक गर्मी बढ़ाते हैं। इनकी जगह कच्चे आम को भूनकर बनाया गया मीठा पना, पानी में नींबू का रस तथा मिश्री मिलाकर बनाया गया शरबत, जीरे की शिकंजी, ठंडाई, हरे नारियल का पानी, फलों का ताजा रस, दूध और चावल की खीर, गुलकंद आदि शीत तथा जलीय पदार्थों का सेवन करें। इससे सूर्य की अत्यंत उष्ण किरणों के दुष्प्रभाव से शरीर का रक्षण किया जा सकता है। ग्रीष्म ऋतु में गर्मी अधिक होने के कारण चाय, कॉफी, सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू आदि सर्वथा वर्ज्य हैं। इस ऋतु में पित्तदोष की प्रधानता से पित्त के रोग होते हैं जैसे कि दाह, उष्णता, मूर्च्छा अपच, दस्त, नेत्रविकार आदि। अत: उनसे बचें। फ्रिज का ठंडा पानी पीने से गला, दांत एवं आंतों पर बुरा प्रभाव पड़ता है इसलिए इन दिनों में मटके या सुराही का पानी पिएं।

सुबह का आहार- सुबह उठते ही नितकर्म से निवृत होने के बाद एक गिलास लस्सी, ठंडाई, मटटा आदि पेय, गुड़ मिलाकर पीना चाहिए। इनके सेवन से बेचैनी, थकावट, सिर दर्द, जलन, प्यास कम लगती है। यह पेय कब्जनाशक, वीर्यवर्धक, शक्तिदायक होने के साथ शरीर को कई रोगों से बचाते हैं।

दोपहर का भोजन- इस मौसम में पेट से संबंधित कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए दोपहर का आहार हल्का और सुपाच्चय होना चाहिए ताकी भोजन जल्दी पच जाए। जैसे चावल, पतली दाल, पतली कढ़ी, दही आदि। जितनी भूख हो उससे कम खाना चाहिए और भोजन गर्म व ताजा करना चाहिए।

शाम का नाश्ता- अक्सर लोगों को चाय की आदत होती है। लोगों को कहते देखा गया है ‘गर्मी, गर्मी को मारती है पर यह गलत धारणा है। इससे उल्टा नुकसान होता है। शाम को ठंडा पेय पदार्थ लेना लाभदायक है। भुने हुए चने व जौ को चबाकर खाने के बाद ठंडा जल पीने से भी गर्मी के दौरान बिमारियों से बचा जा सकता है।

रात का आहार- आहार हलका होना चाहिए। मक्का या गेहूं की रोटी, हरी पत्तेदार सब्जियां, नींबू, प्याज, पुदीना और धनिया की चटनी का सेवन हितकर है। रात को चावल से परहेज जरूरी है। आम का पना और जीरा रस का सेवन करना फायदेमंद होता है।

● इस मौसम में भोजन को पचाने के लिए व बीमारी से बचने के लिए उचित है कि भोजन के थोड़ी देर बाद टहला जाए।

● गर्मी में प्यास लगने पर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना उचित है वरना अपच की शिकायत बनी रहती है।

● घर से बाहर निकलने से पहले एक गिलास पानी जरूर पीकर निकलें।

● तेज गर्मी से तुरंत आकार पानी न पिएं।

● घर में शीतल व स्वच्छ जल का प्रयोग करें या फिर उबालकर पिएं, क्योंकि दूषित पानी दस्त आदि बिमारियों का घर है।

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