या आप जानते हैं कि कुछ खाद पदार्थ ऐसे होते हैं, जिनको खाने के लिए हमें मौसम देखने की जरूरत नहीं है बल्कि उन्हें हम पूरे साल खा सकते हैं और वे सभी मौसम में हमारे लिए फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इनकी न्यूट्रीशियस वैल्यू इतनी ज्यादा होती है कि ये हमेशा हमारी सेहत के लिए जरूरी और अच्छे होते हैं आइए जाने कुछ ऐसे ही हेल्दी फूड के बारे में- 

कॉफी

कॉफी न केवल सेहत के लिए अच्छी होती है बल्कि इसके स्वाद से तन और मन भी तरोताजा महसूस करता है। कॉफी के बींस की खूशबू से ही मन महक उठता है। कॉफी में मौजूद कैफीन की वजह से ही इसे खास पसंद किया जाता है।

कॉफी डिप्रेशन को भी दूर करती हैं। हाल ही में हुई एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि हर दिन 1 कप कॉफी पीने से शरीर का फैट से लड़ने वाला डिफेंस उत्तेजित होता है, जिससे मोटापे के साथ-साथ डायबिटीज से भी लड़ने में मदद मिलती है। साइंटिफिक रिपोर्ट्स नाम के जर्नल में यह स्टडी प्रकाशित की गई है। दरअसल, हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा है ब्राउन फैट फंक्शन जो तेजी से कैलोरी को बर्न कर एनर्जी में बदलने में हमारी मदद करता है और कॉफी में ऐसे कॉम्पोनेंट्स पाए जाते हैं, जिसका इस ब्राउन फैट फंक्शन पर सीधा असर पड़ता है। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंगम के प्रोफेसर और इस स्टडी के को डायरेक्टर माइकल साइमंड्स ने कहा, ‘ब्राउन फैट शरीर में अलग तरह से काम करता है और गर्मी पैदा कर शुगर और फैट को बर्न करने में मदद करता है। जब इस ब्राउन फैट की एक्टिविटी को बढ़ा दिया जाता है तो इससे शरीर का ब्लड शुगर लेवल भी बेहतर हो जाता है। साथ ही एक्सट्रा कैलरी भी बर्न होती है जिससे वेट लॉस में मदद मिलती है। ऐसे में 1 कप कॉफी का ब्राउन फैट के फंक्शन्स पर सीधा असर होता है।’ साइमंड्स कहते हैं, कॉफी में मौजूद कैफीन एक ऐसा इंग्रीडियंट है जो ब्राउन फैट को उत्तेजित और ऐक्टिवेट करने में स्टीम्यूलस का काम करता है। ऐसे में इस कॉम्पोनेंट का इस्तेमाल वेट लॉस मैनेजमेंट के साथ-साथ ग्लूकोज रेग्यूलेशन प्रोग्राम में भी किया जा सकता है ताकि मोटापा कम करने के साथ-साथ डायबिटीज को भी कंट्रोल किया जा सके।

कॉफी में कैफीन के अतिरिक्त अन्य पोषक तत्त्व भी मौजूद होते हैं, जैसे कि विटामिन बी2, विटामिन बी 5, मैग्नीज़ होते हैं यही नहीं कॉफी में पोटैशियम और मैग्नीशियम भी होते हैं, जो शरीर को इंसुलिन का उपयोग करने में मदद करते हैं। और ब्लड शुगर के स्तर को नियमित करते हैं। कॉफी पीने से न केवल मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है, बल्कि शारीरिक कार्य क्षमता भी बढ़ जाती है. कै$फीन नामक तत्व रक्त में एड्रेनलिन हार्मोन के स्तर को बढ़ा देता है. जिससे शरीर अत्यधिक मेहनती कार्य के लिए तैयार हो जाता है।

कॉफी के सेवन से लिवर कैंसर और कोलेरेक्टल कैंसर दोनों से बचा जा सकता है। शोध से यह बात स्पष्ट है कि कॉफी पीने वाले लोगों में लिवर कैंसर होने की संभावना 40 प्रतिशत तक और कोलोरेक्टल कैंसर की संभावना 14 प्रतिशत तक कम हो जाती है। हेपेटाइटिस जैसी ऐसी कई बीमारियां हैं, जो लिवर को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं। प्रतिदिन 4 कप कॉफी के सेवन से आप अपने लीवर को सिरॉसिस नामक स्थिति से 80 प्रतिशत  तक बचा सकते हैं। शोध से यह बात स्पष्ट हुई है कि कॉफी में पाया जाने वाला कै$फीन प्राकृतिक रूप से मोटापा कम करने में सक्षम है। यह मानव शरीर का मेटाबॉलिज़्म को 11 प्रतिशत  तक बढ़ा देता है, जिससे शरीर से ऊर्जा ज़्यादा ख़र्च न होने से शरीर में चर्बी जमा नहीं हो पाती है।

ऑलिव ऑयल

ऑलिव ऑयल यानी जैतून के तेल का प्रयोग शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। ऑलिव ऑयल त्वचा के लिए भी लाभकारी है। ऑलिव ऑयल में फ्लेवसेनॉयड्स स्कवेलीन और पोरीफेनोल्स एंटीऑक्सीडेंट्स होता है, जो फ्री रैडिकल्स से कोशिकाओं को समाप्त होने से बचाता है। यह हर मौसम में रूखी त्वचा को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसका प्रयोग करने से बालों से डैंड्रफ समाप्त होता है। झुर्रियों को समाप्त करने के लिए यह बहुत उपयोगी है।

शरीर के हर अंग में इस ऑयल का प्रयोग किया जा सकता है। खाने में इसे शामिल कर ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित किया जा सकता है। जैतून के तेल में फैटी एसिड की पर्याप्त मात्रा होती है, जो हृदय रोग के खतरों को कम करती है। मधुमेह रोगियों के लिए यह काफी लाभदायक है। शरीर में शुगर की मात्रा को संतुलित बनाए रखने में इसकी खास भूमिका है। इसलिए आहार में भी इस तेल का प्रयोग किया जाता है। जैतून के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। इसमें विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है साथ ही यह मानसिक विकार दूर कर आपको जवां बनाए रखने में भी मदद करता है। जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। ऑलिव ऑयल को त्वचा की नमी के लिए एक अच्छा मॉइश्चराइजर माना जाता है। इसमें विटामिन ए और ई के साथ ही फैटी एसिड भी पाया जाता है, जिससे आपके शरीर की त्वचा में झुर्रियों का बनना तो रुकता ही है चेहरे पर पड़ने वाली लाइंस को भी रोकता है।

चाय

चाय के पौधे को वैज्ञानिक भाषा में कैमेलिया साइनेेंसिस कहा जाता है। चाय के उत्पादन की एक प्रक्रिया होती है, जिसमें हरी व ताजी कलियों को सूखी और काली चाय में परिवर्तित किया जाता है। चुनने से लेकर डिब्बों में बंद करने तक यह कई प्रक्रियाओं से होकर गुजरती है। सामान्य रूप से चाय निम्न प्रकार की होती है- सफेद चाय (अनॉक्सीकृत), हरी चाय (अनॉक्सीकृत), ओलॉग चाय (आंशिक ऑक्सीकृत) तथा काली चाय (पूर्ण ऑक्सीकृत) जड़ी बूटी वाली चाय सामान्यत: काढ़ा पत्तियों फूलों व फलो, शाखाओं अथवा पौधों के अलग-अलग भागों का मिश्रण होती है जिसमें कैमेलिया साइनेंसिस नही होता।

अध्ययन बताते है कि सफेद चाय में कैंसर रोधी प्रति ऑक्सीकारक हरी चाय की तुलना में अधिक होते हैं। शुद्ध चाय रक्त चाप के जमाव को कम करने, रक्तचाप को घटाने, कॉलेस्ट्रॉल को कम करने तथा शरीर के परिवहन तंत्र, धमनी व शिराओं का स्वास्थ्य बनाये रखती है। शोध द्वारा पाया गया कि वे लोग जो एक या एक से अधिक काली चाय के प्याले का सेवन करते हैं उनमें हृदयघात का खतरा चाय का सेवन न करने वालों की तुलना में 40 प्रतिशत तक कम होता है। ऐसा माना जाता है कि चाय कैंसर से बचाव में सहायक है। इसमें उपस्थित प्रति ऑक्सीकरण, मुंह, पेट, पैंक्रियाज़, फेफड़े, ग्रास नली, छाती, वृहदन्त और पौरूष ग्रन्थि के कैंसर से बचाव करने में सहायता करते हैं।

हरी चाय ग्रास नालिका के कैंसर को रोकने में सहायक होती है। हरी और काली चाय पौरूषग्रन्थि के कैंसर को बढ़ने से रोकती है। हरी तथा सफेद चाय वृहदन्त कैंसर से लड़ती है तथा पेट के कैंसर के खतरों को कम करती है। गर्म चाय त्वचा कैंसर के खतरे को कम करती है। इतना ही नहीं चाय धूम्रपान से होने वाले कैंसर से भी बचाव करती है। चाय को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला माना जाता है। हरी चाय के कुछ तत्व ल्यूकीमिया कोशिकाओं को मारने में सहायता करते हैं। इनसे शरीर में फुर्ती का अहसास होता है।

चाय में मौजूद एल-थियेनाइन नामक अमीनो-एसिड दिमाग को ज़्यादा सक्रिय लेकिन शांत रखता है। चाय में एंटीजन होते हैं, जो इसे एंटी-बैक्टीरियल क्षमता प्रदान करते हैं। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और कई बीमारियों से बचाव करते हैं।

चाय में फ्लोराइड होता है, जो हड्डियों को मज़बूत करता है और दांतों में कीड़ा लगने से रोकता है। चाय को कैंसर, हाई कॉलेस्ट्रॉल, एलर्जी, यकृत और दिल की बीमारियों में $फायदेमंद माना जाता है। कई शोध कहते हैं कि चाय कैंसर व ऑर्थराइटस (जोड़ों का दर्द) की रोकथाम में अहम भूमिका निभाती है और बैड कॉलेस्ट्रॉल (एल डी एल) को नियंत्रित करती है साथ ही, हृदय और यकृत संबंधी समस्याओं को भी कम करती है।

शहद

शहद मधुमक्खियों द्वारा फूलों से निकाले गए पराग से बनता है। मधुमक्खियां पहले पराग से सुगंध और वाष्पीकरण की प्रक्रिया करते हुए शहद बनाती हैं फिर इसे प्राथमिक भोजन स्रोत के रूप में इसे मोम छिद्रों से बने अपने छत्ते में संग्रहित कर लेती हैं। मानवीय उपभोग के लिए इसे छत्ते से काट के निकाला जाता है। शहद का स्वाद फूलों के अलग अलग प्रकारों पर निर्भर करता है, जिससे पराग निकाला गया होता है। शहद के इस्तेमाल से हाई ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल किया जा सकता है।

शहद के अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं। शहद उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, सर्दी जुकाम, पाचन और साथ ही खून की कमी में फायदेमंद है, और साथ ही यह चीनी का एक विकल्प भी है। शहद का नियमित सेवन सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है। शहद कीमोथैरेपी के मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की संख्या को कम होने से रोक सकता है।

शहद का सेवन लाभदायक एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की संख्या को बढ़ाता है, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है और हानिकारक सूक्ष्मजीवों से लड़ता है। संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रीय शहद बोर्ड शहद के सेवन का सुझाव देता है क्योंकि इसमें कम मात्रा में बहुत से विटामिन और मिनरल होते हैं। इनमें कैल्शियम, कॉपर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन बी, सी, लौह, मैगनीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम और जिंक शामिल हैं। शहद धरती पर पाई जाने वाली सबसे पुरानी मीठी चीज है। कई रेसिपी में इसका इस्तेमाल होता है। शहद आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। इस कारण आमतौर पर यह हर रसोई में अपनी जगह बना लेता है। शहद कमाल के गुणों से भरपूर है। यह बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी के लिए अच्छा होता है।

सूखे मसाले

मसाले हमारे भोजन का स्वाद तो बढ़ाते ही हैं, हमारी सेहत की रक्षा भी करते हैं। कुछ मसाले तो अपने खास गुणों के कारण घरेलू औषधि के रूप में भी काम आते हैं। तरह-तरह के मसालों का इस्तेमाल करना हमारी पाक कला का हिस्सा है।

इलायची को कई भारतीय व अन्य मिष्ठानों में अतिरिक्त सुगंध और स्वाद देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका दवा क्षेत्र में भी बहुत इस्तेमाल होता है। यह सांस की बदबू और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में काम आती है। मधुमेह रोगियों के लिए इलायची बहुत लाभदायक होती है।

हल्दी का इस्तेमाल खाना बनाने से लेकर त्वचा की सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसके ढेर सारे औषधीय गुण हैं। प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटी बैक्टीरियल हल्दी का प्रयोग दाल-सब्जी तैयार करने में किया ही जाता है, जले-कटे से लेकर अनेक बीमारियों के उपचार में भी यह फायदेमंद साबित होती है।

अनेक औषधीय गुणों से भरपूर सरसों का कई रूपों में इस्तेमाल किया जाता है। मसाले और तेल के अलावा सरसों के दाने के और भी अनेक इस्तेमाल हैं। भोजन को स्वादिष्ट बनाने के साथ तेल के रूप में भी भोजन में जान डालता है।

धनिया सब्जियों में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख मसाला है। इसके औषधीय गुण भी हैं। इसका इस्तेमाल जोड़ों में और गठिया के दर्द के निवारण में भी होता है और एलर्जी, पाचन, गले की समस्याओं से भी निजात दिलाता है।

लाल मिर्च भोजन में स्वादिष्ट तीखा स्वाद डालने वाला प्रमुख मसाला है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट बुरे कॉलेस्ट्रॉल से बचाव में सहायता करता है। यह कैलोरी जलाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

जीरे का इस्तेमाल भोजन पकाने में तो होता ही है साथ-साथ इसके कई औषधीय गुण भी हैं। यह लौह तत्वों का अच्छा स्रोत है और इम्यून सिस्टम को स्वस्थ रखता है। जीरा डाल कर उबाला गया पानी अतिसार का बहुत अच्छा उपचार है।

अजवायन पेट में मरोड़ ठीक करती है, अफारा ठीक करती है, पेट के कीड़े नष्ट करती है, मां का दूध बढाती है, सर्दी जुकाम में आराम देती है।

कालीमिर्च सर्दी, जुकाम, खांसी से बचाव करती है। मलेरिया व वायरल बुखार में इसके सेवन से आराम मिलता है। यह  भूख बढ़ाती है व पाचन में सहायक होती है। इसका सेवन आंखों के लिए फायदेमंद है।

फलों का जूस

यंग एज में फलों को सीधा ही खाया जा सकता है लेकिन बुर्जुगों के लिए जूस ज्यादा लाभकारी होता है। एक गिलास जूस में विटामिन सी, ई, और आयरन के साथ ही अनेक प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं। फ्रूट जूस बॉडी में इंटरफेरान और ऐंटीबॉडीज के लेवल को बढ़ा देता है और इनमें पाया जाने वाला नैचुरल शुगर हार्ट को स्ट्रॉन्ग करता है। इससे बॉडी से यूरिक एसिड और दूसरे हार्मफुल केमिकल्स बाहर निकल आते हैं, जिससे आप दिनभर एनर्जेटिक और फ्रेश बने रहते हैं।

ताजा रसों में क्षारीय तत्वों की अधिकता रहती है, इससे खून व शारीरिक कोशिकाओं में अम्लीय और क्षारीय तत्वों का संतुलन सामान्य होने में सफलता मिलती है। ताजा रस में कैल्शियम, पोटेशियम, सिलिकॉन आदि होते हैं, जो शरीरिक कोशिकाओं में जैव रसायन और खनिज का सही संतुलन बनाते हैं, इससे बूढ़ा होने की प्रक्रिया रुक जाती है।

सेब के रस में विटामिन ए, बी और सी होता है। साथ ही इसमें मिनरल्‍स जैसे, कैल्‍िशयम, मैग्नीशियम, फास्‍फोरस और पोटैशियम होता है। सेब का रस गठिया का दर्द ठीक करता है पेट साफ रखता है। इससे कब्‍ज की भी परेशानी सुलझती है।

अंगूर का रस पीने से कब्‍ज, दिल का रोग, शरीर में पानी की कमी, गठिया, टीबी, लिवर की बीमारी और कई प्रकार की एलर्जी में बहुत फायदा होता है।

कीवी में विटामिन सी और आयरन होता है। इसमें फाइबर होता है जो कि कब्‍ज और पाचन तंत्र की सारी समस्‍याओं को ठीक करता है। इसके अलावा यह खून से सारा कॉलेस्‍ट्रॉल भी बाहर निकालता है।

अनानास का रस इसमें विटामिन बी और सी होता है, जो कि पाचन शक्‍ित को बढ़ाता है साथ ही खून की खराबी को सही करता है और सर्दी-जुखाम और गला दर्द भी ठीक करता है।

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