शादी की पहली रात हर लड़की के लिए खास होती है। हजारों सपने उसकी पलकों में सजे होते हैं, लेकिन मेरी शादी की पहली रात किसी काली रात से कम नहीं थी। उसके बाद आने वाली कई खौफनाक रातों के घाव आज भी मेरे दिल में जिंदा है जिसे मैं शुरुआत में पति के अधिकारों से जोड़कर ही देखा करती थी। एक रोज मेरे सब्र का बांध टूट गया और मुझे एहसास हुआ कि मैं भी एक इंसान हूं। पत्नी और इंसान होने के नाते मेरे भी कई अधिकार हैं।

अपने पति के हाथों करीब 7 वर्षों से शारीरिक और मानसिक प्रताडऩा झेलने के बाद 28 वर्षीय कल्पना (बदला हुआ नाम) ने कानून का सहारा लेना बेहतर समझा। कल्पना भी उन ‘मैरिटल रेप से पीडि़त महिलाओं में से एक हैं जो सामाजिक और पारिवारिक दवाब के चलते सालों-साल चुप्पी साधकर घुटती रहती हैं।

नम आंखों के साथ अपनी कहानी बयां करते हुए बैंककर्मी कल्पना कहती हैं कि शादी से पहले मैंने तस्वीर में उन्हें देखा था… सुहागरात पर हर लड़की की तरह मेरे भी बहुत से सपने थे। मैंने उनके लिए तोहफा भी लिया था। सोचा था कि उनसे खूब सारी बातें करूंगी लेकिन सुहाग सेज पर मेरे डॉक्टर पति ने बातें तो दूर हाथ तक नहीं थामा और तल्खी भरे अंदाज में कहा ‘अपना घूंघट उतारों, क्या जेवरों से लदकर बैठी हो…, तुम्हें पता नहीं है कि हमारी अभी शादी हुई है और पति अपनी पत्नी से क्या चाहता है?

चुप न रहें
कल्पना बताती हैं कि उनके शरीर पर अभी भी कई जगह घाव हैं। तबियत खराब होने या अन्य शारीरिक परेशानी होने पर जब वे शारीरिक संबंध के लिए मना करती तो पति मारते-पीटते थे। बार-बार दिमाग में यही बात आती है कि शारीरिक शोषण करने वाला मेरा करीबी था। जिसके साथ जिंदगी भर साथ निभाने की कसम लेकर आई थी। अब कल्पना दकियानूसी रिवाजों और कुंठित सोच के दायरों से बाहर निकलकर अपनी पहचान पाना चाहती हैं। उनके पति तो तलाक देकर मामले को रफा-दफा करके दूसरी शादी करना चाहते हैं जबकि वे उन्हें उनके किए की सजा दिलवाना चाहती हैं। पुरुषों को एहसास हो कि औरत कोई खिलौना नहीं है, जिससे वे जब चाहें खेल लें।

कानूनी राय
देशभर में न जाने कितनी ऐसी कल्पना हैं जो रोजाना जुल्म की शिकार हो रही हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही अपने हक की लड़ाई के लिए कदम उठा पाती हैं। मैरिटेल रेप को लेकर चर्चा गहन चल रही है। कुछ ही लोग मैरिटेल रेप जैसी स्थिति से इंकार करते हैं। वहीं पारंपरिक रीति-रिवाजों का हवाला देकर इसे निजी मामला करार देने वालों की भी कमी नहीं है।
कानून सलाहकार प्रीति सिंह के मुताबिक कानून के अंर्तगत किसी भी लड़की के साथ उसकी सहमति के विरुद्ध बनाया गया सम्बन्ध रेप की श्रेणी में आता है। जोर जर्बदस्ती पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाना पति का अधिकार नहीं है। ऐसा होने पर किसी भी पीडि़त महिला को चुप नहीं रहना चाहिए और कानून की मदद लेनी चाहिए। महिलाओं के लिए कई हैल्प लाइन सुविधा भी उपलब्ध है। बस जरूर है तो सिर्फ हिम्मत की।

मनोचिकित्सक के अनुसार
मैरिटेल रेप या जबरदस्ती की शिकार महिला की मानसिक हालत के बारे में मनोचिकित्सक आराधना शर्मा बताती हैं कि स्त्री और पुरुष दोनों के लिए सैक्स के अलग-अलग मायने होते हैं। स्त्री के लिए ‘सैक्स केवल शारीरिक जरूरत तक सीमित न होकर भावनात्मक मुद्दा भी है। भावनाओं को सम्मान न मिलने पर औरत को शादी में जबर्दस्ती का अनुभव होने लगता है। उसमें स्वयं के शारीरिक उपयोग की भावना आने लगती है। हमारे पुरुष प्रधान समाज में पुरुषों को असीमित अधिकार दिए गए है, जो पति बनने पर दोगुने हो जाते हैं।

डॉ. आराधना शर्मा के मुताबिक, ‘हमारे भारतीय परिवेश के पारंपरिक ढांचे के अनुसार पुरुष घर चलाने के लिए पैसे कमाता है इसलिए उसकी जरूरत पूरी करना स्त्री का धर्म है। कहीं न कहीं समाज में औरत की स्थिति और दर्जा ऐसा बना दिया गया है। जिससे उसके लिए अपनी इच्छा, अनिच्छा और जरूरत जैसे विषयों पर खुलकर बात करना सही नहीं माना जाता है। उससे यही अपेक्षा की जाती है कि शांति से पत्नी धर्म निभाएं। समाज औरतों को व्यक्तिगत इकाई के रूप में नहीं देखती। अधिकतर पुरुष महिलाओं की मनोस्थिति से अनभिज्ञ रहते हैं। वहीं दूसरी ओर पत्नी पति से भावात्मक सहारा चाहती है लेकिन इसके अभाव में पति से कभी भी जुड़ नहीं पाती और असंतुष्ट ही रहती है।