दिवाली क्यों मनाई जाती है यह हर हिंदू जानता है। लेकिन देव दीपावली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है शायद आप सब लोग इस बात से अनजान हों। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह काशी में मनाई जाती है और जैसे कि एक यह नाम खुद ही अपने बारे में बताता है, देवों की दिवाली यानी कि ऐसी दीपावली जो देवता भी मनाते हैं।

माना जाता है कि स्वर्ग के 33 करोड़ देवी देवता इस दिन काशी आए थे और उन्होंने कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा किनारे दीपदान किया था। और हमारे पुराण भी इस दीपावली का जिक्र करते हैं इसी लिए तब से देव दीपावली मनाई जाती है।

देव दिवाली का महत्व और मान्यता

महत्व और मान्यता

पूरे भारतवर्ष में कार्तिक मास की अमावस्या के दिन तो दिवाली का त्यौहार मनाया ही जाता है। लेकिन कार्तिक मास की पूर्णमासी के दिन काशी में गंगा के तट पर दीप जलाकर भव्य तरीके से गंगा मां की आरती के साथ यह उत्सव भी मनाया जाता है।

काशी में क्यों मनाई जाती है देव दीपावली

काशी में क्यों मनाई जाती है

पुरानी मान्यताओं की मानें तो इस दिन भगवान शंकर जी ने त्रिपुरासुर नामक दानव का वध किया था और इसी खुशी में उन्होंने अपनी विजय को हर्षोल्लास के साथ देवताओं के साथ जाहिर भी किया था।

यह भी माना जाता है कि भगवान शंकर इस दिन धरती पर अवतरित हुए थे। यह अद्भुत संयोग ही है कि इस दिन दीपदान भी किए जाते हैं जिनका अपना एक विशेष फलदाई महत्व है। इसी वजह से इसे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से भी जोड़ा जाता है।

पौराणिक कथा में देव दीपावली

पौराणिक कथा में देव दीपावली

पुरानी कथाओं में कहा गया है कि सरयू नदी का संगम यही हुआ था और वह श्री राम के पूर्वज भागीरथ ने ही करवाया था और यह भी पुराणों से पता चला है कि सरयू, भगवान विष्णु के नेत्रों से प्रकट हुए थे।

देव दीपावली से जुड़ी मान्यता

देव दीपावली से जुड़ी मान्यता

यदि पुराणों की बात करें तो इससे जुड़े हुए इतनी सारी कथाएं हैं उन्हीं कथाओं में से एक कथा है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी 4 महीने की निद्रा से जागते हैं और 14वे दिन भगवान शंकर सभी देवी देवताओं के साथ यहां आकर दीप जलाते हैं।

इस दिन महापर्व के रूप में एक महा आयोजन किया जाता है और बनारस के सभी घाटों को सजाया जाता है जहां पर दुनियाभर से लोग आकर दीपदान करते हैं। इस मनोरम और विहंगम दृश्य को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे पूरा देवलोक धरती पर आ गया हो।

दिवोदास की कथा

दिवोदास की कथा

इस महापर्व से जुड़ी एक कहानी दिवोदास की भी है। माना जाता है कि दिवोदास बहुत घमंडी था और उसने काशी में सभी देवताओं का प्रवेश रोक दिया था। जब इस विषय में भगवान शंकर को पता चला तो वह कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपना भेष बदलकर गंगा घाट पहुंचे और उन्होंने वहां गंगा नदी में स्नान भी किया।

दिवोदास को इस विषय में पता चला तो उसे बहुत ज्यादा पछतावा हुआ और उसने भगवान से क्षमा मांगी। उसके बाद उसने सभी देवताओं पर लगाए हुए रोक को हटा लिया। तब से देवता गण उत्साह में इस दिन गंगा घाट पर आकर देव उत्सव मनाते हैं और दीपदान करते हैं।

योगी जी के सहयोग से बढ़ गया देव दिवाली का महत्व

योगी जी के सहयोग से बढ़ गया महत्व

देव उत्सव की जो महत्ता थी। उसके साथ अब आस्था और अर्थ भी जुड़ गया है और इसका पूरा श्रेय हमारे सीएम योगी आदित्यनाथ को जाता है। क्योंकि इसके साथ अब भव्यता बढ़ गई है और यह काशी के तटों से निकलकर शहरों तक पहुंच गयी है। यहां तक कि विदेशों में भी इसके प्रति लोगों की बहुत आस्था बढ़ी है।

इसने अपनी रोशनी से पूरी दुनिया में प्रकाश फैला दिया है। तभी तो पूरी दुनिया से काफी पर्यटक इस दिन देव दीपावली देखने के लिए यहां आते हैं। महीनों पहले से ही यहां नौकाओं की, होटलों की बुकिंग हो जाती है। ताकि आखिरी समय में किसी को यहां कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े।

इसी वजह से यहां होटल के किराए कई गुना इन दिनों में बढ़ा दिए जाते हैं। जिन लोगों को यहां रहने खाने की व्यवस्था नहीं मिलती, उन्हें निराश होना पड़ता है। घाटों पर इतने लोग एकत्र हो जाते हैं कि इस उत्सव को लाखों मेलों के बराबर माना जाता है और यह सब सिर्फ और सिर्फ योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से ही संभव हो पाया है।

काशी में पंचगंगा घाट से देव दीपावली की शुरूआत 

काशी में पंचगंगा घाट से शुरूआत

इसकी शुरुआत कब से हुई अगर आप यह जानना चाहते हैं तो हम आपको बता दें इसकी शुरुआत हुई थी 1985 से जब यहां के क्षेत्रीय लोगों ने मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरुदेव के अथक प्रयासों ने इसको वृहद् और विहंगम रूप दिया।

उन्होंने न केवल इस उत्सव का महत्व बढ़ाया बल्कि गंदे पड़े गंगा घाटों को भी सफाई अभियान से जोड़कर एक नया प्रयास और एक नयी दिशा दी। उन्होंने महसूस किया कि यह सब तभी संभव है जब यहां पर ऐसा कोई दीप प्रज्वलन उत्सव किया जाए। उन्होंने इसलिए पंचगंगा घाट के साथ पांच अन्य घाटों को भी शामिल किया। 

समापन

काशी में देव दीपावली की शुरूआत

देव दीपावली आज पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन महालक्ष्मी की पूजा करने से वह प्रसन्न होती हैं और घर में धन, संपदा, हर्ष उल्लास, प्रसंता, सुख-संपत्ति की बाढ़ आती है। कुछ लोग इस दिन लक्ष्मी पूजा का आयोजन करते हैं।

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