Sports for Children

खेलने से बच्चे में एकाग्रता एकता की भावना और असफलताओं को भी हंसकर झेलने की भावना आती है। देखा जाए तो अपनी असफलताओं को गिनकर सफलता हासिल करने का भी अपना अलग ही मजा है। अपनी असफलता को स्वीकारना हर किसी के बस की बात नहीं है। लेकिन जिसने भी ये काम कर लिया उसे सफलता हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता है। 

जिंदगी की ये एक ऐसी सीख है जो न सिर्फ हमें खुद को, बल्कि बच्चों को भी देनी चाहिए। आपने सदी के सबसे बेहतरीन बास्केटबाल खिलाड़ियों में से एक माइकल जार्डन का नाम तो सुना ही होगा। जी हां ये वही शख्सियत हैं, जिन्होंने अपनी जितनी भी असफलताओं को गिना, उन्हें उतना ही ऊंचा मुकाम हांसिल हुआ। 

ये बात उनके विषय में है, जो उनके द्वारा खेले गये खेल का पर्याय बन गये। आप सचिन तेंदुलकर, धोनी और सिंधु की प्रतिभा से भी अनजान नहीं होंगे। ये सभी वो खिलाड़ी हैं, जिनके पास धैर्य है, और जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपना करियर चमका लिया। आप भी अपने बच्चों को उनसे अच्छी सीख दे सकती हैं।

क्या वाकई बच्चे खेल से जीवन का कोई महत्वपूर्ण सबक या पाठ ले सकते हैं? यह सवाल आपके मन में भी आया होगा। तो जवाब है, हां। खेल के जरिए बच्चे एक नहीं बल्कि कई सारे सबक ले सकते हैं। आपके बच्चे के विकास के लिए आप उसकी प्लेयिंग एक्टिवीटीज ऐसे प्लान करें जिससे उसकी लर्निंग स्किल में बढ़ौत्री हो। इस लेख में हम आपको Sports for Children की भूमिका बताने वाले हैं जो बेहद जरूरी है।

एक टीम में मजबूत रिश्ते

आप इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि, खेल इंसान को ना सर्फ एक टीम में बंधने का मौका देता है, बल्कि अपने साथियों के साथ खून से भी सगा रिश्ता निभाने का मौका देता है। आपने अगर “रिमेम्बर द टाइटन्स” फिल्म देखी है, तो ये समझना आपके लिए थोड़ा आसान हो सकता है। ठीक उसी तरह अगर बच्चे किसी टीम में शामिल होते हैं, तो उनके अंदर टीम भावना और साथ लेकर चलने की भावना का संचार होता है।

लगन और मेहनत जरूरी

लगन और मेहनत जरूरी

लाइफ में सबकुछ आसानी से हो जाए ऐसा जरूरी नहीं है। खले में बच्चों को अपना लक्ष्य हासिल करना है तो उन्हें इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। मिल्खा सिंह इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं। उनकी कही हुई एक बात,  ‘जब तक मैं अपने पसीने की एक बाल्टी नहीं भर लेता, तब तक मैं रुकता नहीं’।  खेल में बलिदान और मेहनत सबसे ज्यादा जरूरी है। इस तरह आप बच्चों को खेल के माध्यम से लगन और मेहनत का पाठ पढ़ा सकते हैं।

हारना है तो शान से हारो

हारना है तो शान से हारो

खेल में हार जीत तो आम बात है। जितना जीत को लेकर हम खुशी मनाते हैं, उतना ही हमें हार के लिए भी अपने बच्चों को तैयार करना होगा। किसी भी खेल में हारना विनम्रता को सिखाता है। हार के बाद अपने प्रतिद्वंदी को बधाई देना और शान से सिर उठाकर खेल से बाहर निकलने की भी बात कुछ और ही है।

खेल बच्चों को एक ऐसी सीख देता है, जिसमें वो ये सीखते हैं कि जीवन में हमेशा जीत हो ऐसा नहीं हो सकता। बल्कि कई मुकाम में हार और नुकसान का भी सामना करना पड़ता है। हमें हार को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए और यही बात हमें अपने बच्चों को भी सिखानी चाहिए।

खेल की सच्ची भावना, सीखते रहना

खेल की सच्ची भावना, सीखते रहना

खेल के मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह साहस, धैर्य, सम्मान और विन्रमता को बनाए रखना जरूरी है। जीत और हार की तरह भी जीवन का अच्छा और बुरा समय होता है। खेल में बच्चों को यही सीख आप सिखाइए ताकि वो अपने जीवन की हर मुश्किल घड़ी में खुद को तैयार कर सकें, और उससे निपटने का साहस रखना सीख सकें।

क्योंकि सच्ची भावना से खेला जाने वाला खेल सम्मान करना सिखाता है। चाहे वो कोच हो, विरोधी टीम का हो या रेफरी हो। बच्चे में धैर्य और अपनी भावनाओं को कंट्रोल करना सिखाता है।

आत्म जागरूकता की सीख सबसे जरूरी

आत्म जागरूकता की सीख सबसे जरूरी

खेल में बच्चा ताकत के साथ कमजोरियों को जानना सीख जाता है तो समझिये आधी जंग ऐसे ही जीती जा सकती है। इससे वो अपने नियन्त्रण को सीखते हैं। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने इसका अच्छा उदाहरण सेट किया है। हमें मदद मांगने या किसी और तरह के समाधान ढूंढने से पहले खुद की एबिलिटी के बारे में जरुर जान लेना चाहिए। आत्म जागरूकता खेल में दी जाने वाली ऐसी सीख है, जो बच्चे के साथ ताउम्र रहती है। 

जोखिम उठाना भी बेहतर सीख

जोखिम उठाना भी बेहतर सीख

हमारे कई निपुण खिलाडियों ने कई तरह के खेलों में इतिहास रचा है। खेल के मामले में इतिहास रचना इतना आसान भी नहीं है, जितना दर्शकों को देखने में लगता है। कुछ पाने के लिए जोखिम उठाना भी बेहद जरूरी है। आप अपनी लाइफ में कुछ पाना चाहते हैं तो आपको, जोखिम उठाना पड़ेगा। किसी ने सच ही कहा है कि जीवन में कुछ पाना है तो, सीमाओं को निर्धारित न करें, और सीमाएं निर्धारित भी हैं तो उन्हें पार करने की जरूरत है। खेल में ये सीख आपके बच्चे के लिए बेहद जरूरी है।

छोड़ना, कोई ऑप्शन नहीं

कभी हार ना मानें

बच्चे को खेल में सबसे अहम और जरूरी सीख यही दीजिये कि वो कभी हार ना मानें। चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा उन्हे प्रोत्साहित करें और उनका जमकर मनोबल बढाएं। उन्हें हार नहीं मानने दें। खिलाड़ियों को भी शुरू में यही सीख दी जाती है कि चाहे कुछ भी हो जाए हमेशा अडिग रहना चाहिए।

लाइफ में हमेशा निष्पक्ष होना चाहिए। जीवन में हमेशा हर चीज आसानी से मिल जाएं, ये जरूरी नहीं है। ऐसे में आपको दृढ़ संकल्प और लचीला होने की जरूरत है। आप किस तरह इन चुनौतियों से निपटते हैं, उससे आप मजबूत बनते हैं। यही सीख आप अपने बच्चों को दें।

खेल में बच्चों को सिखाने वाली ये कुछ ऐसी सीख हैं, जो बच्चों के ताउम्र (लाइफ टाइम) काम आती हैं। ये सीख आपको औ हमें भी अपनानी चाहिए। सीख खेल के मैदान से जुड़ी हो या असल जिंदगी से…दोनों में ही हमारे काम आती है। और बच्चों का अच्छा भविष्य भी निर्धारित करती है।

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