Posted inकथा-कहानी

प्रेम की पराकाष्ठा: गृहलक्ष्मी की कहानियां

गृहलक्ष्मी की कहानियां ओ हो! ये क्या हाल बना रखा है आपने अपना! और देखो तो सही पलंग पर भी कैसे सामान फैला रखा है? कोई बैठना चाहे तो बैठ भी ना सके।अरे लेक्चर ना सुनाओ मुझे, जैसा रखा है वैसा ही रखा रहने दो तुम मेरा सामान। तुम तो सफाई के नाम पर कहीं […]